PM Surya Ghar Yojana: क्या है पीएम सूर्य घर योजना? कैसे सौर ऊर्जा से बदल रही करोड़ों भारतीयों की किस्मत?
PM Surya Ghar Yojana: आज का भारत विकास और पर्यावरण के संतुलन से अपनी सांस्कृतिक विरासत को ग्रीन एनर्जी के संकल्प से जोड़ रहा है. सूर्य और पवन जैसी प्राकृतिक ऊर्जाओं को अपनाकर हम न केवल आत्मनिर्भर बन रहे हैं, बल्कि विश्व के लिए सस्टेनेबल ग्रोथ का नया मानक बना रहे हैं. इसी कड़ी में, भारत की सौर यात्रा पिछले दशक की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक बनकर उभरी है. यह यात्रा केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र निर्माण के एक संकल्प का भी हिस्सा है.
एक दशक का अभूतपूर्व बदलाव
यह दृढ़ नीतिगत इच्छाशक्ति का ही परिणाम है कि वर्ष 2014 में जहाँ भारत की सौर क्षमता मात्र 2.82 गीगावाट के करीब थी, वहीं आज हम 150 गीगावाट के ऐतिहासिक पड़ाव को पार कर चुके हैं. यह छलांग भारत की तकनीकी क्षमता और भविष्य के प्रति हमारी नीतिगत दृढ़ता का जीवंत प्रमाण है. इस निरंतरता को बनाए रखने के लिए ऊर्जा सुरक्षा को देश की सर्वोच्च प्राथमिकता बनाया गया है. सरकार के प्रयासों से आज सौर ऊर्जा हर बड़े प्रोजेक्ट का हिस्सा बन रही है.
उपभोक्ताओं का सशक्तिकरण
राष्ट्र निर्माण की इस प्रक्रिया में सरकार ने न केवल विशाल सौर पार्क पर ध्यान केंद्रित किया, बल्कि 'पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना' के माध्यम से इस सौर क्रांति को सीधे आम नागरिक की दहलीज तक पहुँचा दिया है. आज भारत का आम आदमी केवल एक उपभोक्ता नहीं, बल्कि एक ‘प्रोज्यूमर’ यानी उत्पादक और उपभोक्ता दोनों की भूमिका निभा रहा है. 1 करोड़ घरों को 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली प्रदान करने का यह लक्ष्य देश के मध्यम और निम्न आय वर्ग के लिए आर्थिक स्वाधीनता का नया द्वार खोल रहा है.
योजना की जमीनी सफलता
आंकड़ों की बात करें तो अप्रैल 2026 में मात्र एक महीने में 2.7 लाख रिकॉर्ड इंस्टॉलेशन के साथ इस योजना के तहत अब तक 37 लाख से अधिक घर रोशन हो चुके हैं. इस योजना से जब एक परिवार सालाना बिजली बिल पर बचत करता है, तो वह राशि शिक्षा, स्वास्थ्य और बेहतर जीवन स्तर में निवेश होती है. यह बचत अंततः देश की अर्थव्यवस्था को नई गति प्रदान करती है. लोग अब अपनी छतों का इस्तेमाल कमाई के लिए भी कर पा रहे हैं.
पारदर्शिता और सुलभता का डिजिटल ढांचा
इस महाभियान की सफलता की नींव इसकी पारदर्शिता है. देश भर में लाभार्थियों के खातों में 'प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण' यानी डीबीटी के माध्यम से अब तक लगभग 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी पहुँच चुकी है. इसके साथ ही, 6 प्रतिशत से भी कम की रियायती ब्याज दर पर बिना किसी गारंटी के ऋण उपलब्ध कराकर सरकार ने मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए आत्मनिर्भरता के मार्ग को और अधिक सुलभ और सरल बना दिया है.
कौशल विकास और ग्रीन जॉब्स का नया युग
राष्ट्र के भविष्य का निर्माण युवाओं के बिना अधूरा है. इसी लिए, इस योजना के माध्यम से देश भर में 3 लाख से अधिक युवाओं को आधुनिक सौर तकनीक से जोड़कर उनके कौशल को तराशा जा रहा है. 1 लाख से अधिक समर्पित 'सोलर पीवी तकनीशियन' तैयार करना और कुल 17 लाख 'ग्रीन जॉब्स' के अवसर सृजित करना भारत को भविष्य के ग्लोबल स्किल हब के रूप में स्थापित कर रहा है. केंद्र, राज्य और वित्तीय संस्थानों के बीच का यह तालमेल एक मजबूत बुनियादी ढांचा तैयार कर रहा है.
वैश्विक नेतृत्व और आत्मनिर्भरता का संकल्प
भारत की यह दूरदर्शिता सीमाओं में बंधी नहीं है. इंटरनेशनल सोलर एलायंस के जरिए भारत उन देशों का मार्गदर्शक बन रहा है जहाँ सौर ऊर्जा की अपार संभावनाएं हैं. वहीं, घरेलू स्तर पर पीएलआई योजना के माध्यम से सौर उपकरणों के स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा देकर ‘मेक इन इंडिया’ को प्रोत्साहित किया जा रहा है. इससे भारत सामरिक और आर्थिक रूप से संप्रभु बनता है और विदेशों पर हमारी निर्भरता कम होती जा रही है.
विकसित भारत की ओर बढ़ते कदम
भारत का लक्ष्य 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता हासिल करना है. साथ ही कार्बन उत्सर्जन में 720 मिलियन टन की कटौती का संकल्प यह सिद्ध करता है कि भारत का विकास पर्यावरण के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है. भारत की कुल स्थापित बिजली क्षमता का लगभग 50 प्रतिशत अब गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से आता है. यह लक्ष्य 2030 की समयसीमा से काफी पहले हासिल कर लिया गया है, जो स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में भारत को विश्व गुरु बनाता है.
पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना
पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के 'नेशनल पोर्टल' के माध्यम से सौर ऊर्जा की प्रक्रिया को घर-घर तक पहुंचाकर भारत ने एक ऐसा मॉडल तैयार किया है, जो देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बना रहा है. यह योजना मात्र बिजली देने का साधन नहीं है, बल्कि यह हर नागरिक की जेब में अतिरिक्त आय, हर घर में उजाला और राष्ट्र को अखंड व सशक्त बनाने की एक ऐतिहासिक मुहिम है. भारत अब सूर्य की ऊर्जा से अपनी प्रगति की नई इबारत लिख रहा है.
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पाकिस्तान: इमरान खान की बेगम बुशरा बीबी को देर रात ले जाया गया अस्पताल, पीटीआई ने उठाए सवाल
इस्लामाबाद, 7 मई (आईएएनएस)। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की बेगम बुशरा बीबी को बुधवार रात गुप्त तरीके से अस्पताल ले जाने और फिर वापस जेल भेजने की खबरों पर गहरी चिंता और नाराजगी जताई है। पार्टी ने आरोप लगाया कि पूरे मामले में पारदर्शिता की कमी है और यह मानवाधिकारों के उल्लंघन का संकेत देता है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रावलपिंडी की अदियाला जेल में बंद बुशरा बीबी को कड़ी सुरक्षा के बीच अस्पताल ले जाया गया था। बताया गया कि यह उनकी आंख की जांच और फॉलो-अप उपचार के लिए था। पिछले महीने उनकी दाहिनी आंख में रेटिना डिटैचमेंट की समस्या के चलते सर्जरी कराई गई थी।
पाकिस्तान के प्रमुख अंग्रेजी दैनिक डॉन के अनुसार, पीटीआई ने सवाल उठाया कि यदि उनकी तबीयत इतनी बिगड़ गई थी कि आधी रात को अस्पताल ले जाना पड़ा, तो सरकार और जेल प्रशासन जनता को इसकी जानकारी क्यों नहीं दे रहे हैं। पार्टी ने पूछा कि उन्हें किस अस्पताल में ले जाया गया, कौन से परीक्षण किए गए और किन डॉक्टरों ने जांच की।
पार्टी का कहना है कि बुशरा बीबी पिछले कई महीनों से एकांत कारावास, मानसिक दबाव और अमानवीय व्यवहार का सामना कर रही हैं। पीटीआई ने आरोप लगाया कि उनके निजी डॉक्टरों से मिलने की अनुमति नहीं दी जा रही और परिवार से मुलाकात में भी बाधाएं डाली जा रही हैं।
पीटीआई ने मांग की कि बुशरा बीबी की स्वास्थ्य स्थिति पर स्वतंत्र और पारदर्शी मेडिकल रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। साथ ही उनके निजी चिकित्सकों को तत्काल पहुंच देने और परिवार से मुलाकात की अनुमति देने की भी मांग की गई है। पार्टी ने उन्हें तुरंत शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल में स्थानांतरित करने की मांग की।
पार्टी अध्यक्ष गौहर अली खान ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पोस्ट में कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि बुशरा बीबी को “आई लेजर ट्रीटमेंट” के लिए अस्पताल ले जाया गया था और बाद में वापस जेल भेज दिया गया। चेतावनी दी कि यदि बुशरा बीबी की सेहत को कोई भी नुकसान पहुंचता है तो इसकी पूरी राजनीतिक, नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी सरकार और जेल प्रशासन की होगी।
--आईएएनएस
केआर/
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