श्रम संहिता: केंद्र ने श्रमिकों के लिए राष्ट्रव्यापी वार्षिक स्वास्थ्य जांच पहल शुरू की
नई दिल्ली, 7 मई (आईएएनएस)। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार और युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने गुरुवार को 40 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी श्रमिकों के लिए राष्ट्रव्यापी वार्षिक स्वास्थ्य जांच पहल का शुभारंभ किया। यह देश के श्रमबल के लिए व्यावसायिक स्वास्थ्य देखभाल और सामाजिक सुरक्षा कवरेज को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
नई श्रम संहिताओं के तहत 40 वर्ष या उससे अधिक के श्रमिकों की स्वास्थ्य जांच कराना अनिवार्य है।
केंद्र ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सरकार ने पिछले 12 वर्षों में रोजगार सृजन और कल्याणकारी उपायों के माध्यम से श्रम शक्ति और युवा शक्ति को सशक्त बनाने के लिए काम किया है।
इस अवसर को श्रम शक्ति के सम्मान को समर्पित दिन बताते हुए उन्होंने कहा कि सरकार सभी श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा कवरेज को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सरकार ने पिछले 12 वर्षों में रोजगार सृजन और कल्याणकारी उपायों के माध्यम से श्रम शक्ति और युवा शक्ति को सशक्त बनाने के लिए काम किया है।
मांडविया ने बताया कि देश में सामाजिक सुरक्षा कवरेज में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है, जो एक दशक पहले लगभग 30 करोड़ लोगों से बढ़कर आज लगभग 94 करोड़ लाभार्थियों तक पहुंच गया है, यानी सामाजिक सुरक्षा कवरेज 19 प्रतिशत से बढ़कर 64 प्रतिशत हो गया है।
उन्होंने यह भी बताया कि ईएसआईसी के दायरे में आने वाले लाभार्थियों की संख्या एक दशक पहले लगभग 7 करोड़ थी, जो आज बढ़कर लगभग 15 करोड़ हो गई है।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य जांच के माध्यम से शीघ्र निदान से गंभीर बीमारियों को रोकने में मदद मिल सकती है। उन्होंने बताया कि जांच शिविरों के दौरान पहचानी गई बीमारियों का इलाज और दवाएं ईएसआईसी सुविधाओं के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएंगी।
चार श्रम संहिताओं के तहत प्रमुख श्रम सुधारों पर प्रकाश डालते हुए डॉ. मांडविया ने कहा कि पुरुष और महिला श्रमिकों के लिए समान वेतन के प्रावधान सुनिश्चित किए गए हैं, मातृत्व अवकाश 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह कर दिया गया है, और महिलाओं के लिए घर से काम करने के प्रावधान भी शामिल किए गए हैं।
डॉ. मांडविया ने आगे कहा कि जहां दुनिया भर के देश अब भी गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा ढांचे के तहत लाने के तरीकों की खोज कर रहे हैं, वहीं मोदी सरकार ने नए श्रम संहिता के माध्यम से सक्रिय रूप से उनके समावेश को सुनिश्चित किया है।
केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, खतरनाक व्यवसायों में लगे श्रमिकों और यहां तक कि 10 से कम कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों में काम करने वाले कर्मचारियों को भी अब ईएसआईसी के दायरे में लाया जा रहा है।
--आईएएनएस
एबीएस
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