Explainer: तलाक-ए-हसन क्या है? तीन तलाक से कितना अलग है यह तरीका, जानें पूरी प्रक्रिया...
What is Talaq-e-Hasan: मुस्लिम पर्सनल लॉ में तलाक के कई तरीके मौजूद हैं और इनमें से एक नाम बार-बार सुर्खियों में रहता है, वो है तलाक-ए-हसन. दरअसल, हाल के महीनों में सुप्रीम कोर्ट में इससे जुड़ी कई याचिकाएं दाखिल हुई हैं, जिनमें इस प्रक्रिया को असंवैधानिक बताते हुए रद्द करने की मांग की गई है. बड़ी बात ये है कि सुप्रीम कोर्ट इन याचिकाओं पर सुनवाई करने के लिए तैयार भी हो गया है.
ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि आखिर तलाक-ए-हसन काम कैसे करता है और 2019 में गैरकानूनी घोषित हो चुके तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) से यह किस तरह अलग है. बता दें तलाक-ए-हसन दरअसल इस्लामी कानून में बताए गए तलाक के तीन मुख्य तरीकों में से एक है. बाकी दो हैं तलाक-ए-अहसन और तलाक-ए-बिद्दत यानी एक साथ तीन बार तलाक कहना. बता दें तीनों प्रक्रियाओं में सबसे बड़ा फर्क समय और मौका देने का है.
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बिहार में स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल, नदी में फंसा ट्रैक्टर; प्रसव पीड़ा से तड़पती गर्भवती की रास्ते में मौत
Bihar News: बिहार के बगहा से स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन की दावों की हवा निकालती हुई एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है. जब देश में विकास और बेहतर सुविधाओं के बड़े बड़े दावे किए जा रहे हैं, उस दौर में भी ग्रामीण इलाकों में लोग बुनियादी सुविधाओं के अभाव में अपनी जान गंवाने को मजबूर हैं. खबर बगहा के गोबरहिया थाना क्षेत्र स्थित सिंगाड़हवा गांव की है, जहां एक गर्भवती महिला की अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में मौत हो गई.
मृतका की पहचान सत्ताइस वर्षीय सुमन देवी के रूप में हुई है. सुमन देवी को रविवार के दिन अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई थी. गांव में कोई बेहतर अस्पताल या एंबुलेंस की सुविधा न होने के कारण परिजनों ने आनन फानन में उन्हें ट्रैक्टर पर लादा और हरनाटांड़ स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाने की तैयारी की. गांव से अस्पताल की दूरी लगभग इक्कीस किलोमीटर है, लेकिन यह सफर किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था.
उफनाती नदी में फंसा ट्रैक्टर और थम गईं सांसें
बारिश के मौसम के कारण इलाके की हरहा नदी में जलस्तर काफी बढ़ा हुआ था. परिजनों ने काफी देर तक पानी कम होने का इंतजार किया. जब पानी थोड़ा कम हुआ तो ट्रैक्टर को नदी पार कराने के लिए पानी में उतारा गया. लेकिन रास्ते में कीचड़ और खराब रास्ते की वजह से ट्रैक्टर नदी के बीच में ही बुरी तरह फंस गया.
एक तरफ ट्रैक्टर को बाहर निकालने की मशक्कत चल रही थी, तो दूसरी तरफ ट्रैक्टर की ट्रॉली में लेटी सुमन देवी प्रसव पीड़ा से तड़प रही थीं. समय बीतता जा रहा था और इलाज न मिलने की वजह से महिला की हालत पल-पल बिगड़ती जा रही थी. काफी देर तक नदी के बीच फंसे रहने के बाद आखिरकार सुमन देवी ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया. अगर समय रहते उन्हें चिकित्सीय सहायता मिल जाती, तो शायद उनकी और उनके नवजात की जान बचाई जा सकती थी.
पुल और सड़क के अभाव में ग्रामीण झेल रहे मुसीबत
बगहा का यह दोन क्षेत्र हमेशा से प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार रहा है. हरहा नदी पर आज तक पुल का निर्माण नहीं हो सका है, जिसके कारण बारिश के दिनों में दर्जनों गांवों का संपर्क मुख्य सड़क से पूरी तरह कट जाता है. सामान्य दिनों में भी अगर कोई बीमार पड़ जाए तो उसे अस्पताल ले जाना किसी जंग जीतने से कम नहीं होता.
गांव वालों का कहना है कि हर साल मानसून के समय यह नदी उनके लिए काल बनकर आती है. हरहा नदी पर पुल न होना और पक्की सड़क का अभाव अब लोगों की जान पर भारी पड़ने लगा है. स्थानीय ग्रामीणों ने कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से पुल बनाने की मांग की, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला.
स्वास्थ्य सुविधाओं से काफी दूर हैं ग्रामीण क्षेत्र
भौगोलिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो सिंगाड़हवा दोन से हरनाटांड़ की दूरी करीब इक्कीस किलोमीटर है. वहीं प्रखंड मुख्यालय रामनगर लगभग पैंतीस किलोमीटर दूर पड़ता है. आपातकालीन स्थिति में हरनाटांड़ ही नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र है, लेकिन रास्ते की बदहाली के कारण वहां तक समय पर पहुंच पाना नामुमकिन सा हो जाता है.
सुमन देवी की शादी डोलबजवा गांव के रहने वाले संजित उरांव के साथ हुई थी. वह पिछले कुछ समय से अपने मायके सिंगाड़हवा में रह रही थीं. सुमन का यह दूसरा बच्चा था और उनका एक छोटा बच्चा पहले से है. इस दुखद घटना के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है. मासूम बच्चे के सिर से मां का साया हमेशा के लिए उठ गया है. इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि कागजी दावों से अलग, जमीनी हकीकत आज भी बहुत डरावनी और बदहाल है.
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