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तमिलनाडु में TVK को समर्थन देगी कांग्रेस, आज जारी हो सकता है औपचारिक पत्र, पढ़ें खबर

तमिलनाडु की सियासत में एक नया अध्याय जुड़ गया है, जहां कांग्रेस ने अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) को सरकार बनाने के लिए अपना समर्थन देने का ऐलान किया है। विधानसभा चुनाव में टीवीके ने 108 सीटों के साथ ऐतिहासिक उलटफेर करते हुए सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी है, और अब कांग्रेस के ‘हाथ’ के साथ सत्ता की दहलीज पर खड़ी है। इस घोषणा के साथ ही तमिलनाडु में नई सरकार के गठन की दिशा स्पष्ट हो गई है, जहाँ विजय ने पहले ही कांग्रेस से समर्थन की गुहार लगाई थी। राज्य में यह राजनीतिक घटनाक्रम पारंपरिक द्रविड़ पार्टियों के वर्चस्व को चुनौती देता दिख रहा है।

दरअसल ऑल इंडिया कांग्रेस समिति (AICC) ने मंगलवार (5 मई) को इस संबंध में अंतिम फैसला तमिलनाडु इकाई पर छोड़ दिया था, जिसके बाद प्रदेश कांग्रेस ने वर्चुअल मीटिंग में टीवीके को समर्थन देने का प्रस्ताव पारित कर दिया। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस द्वारा समर्थन का औपचारिक पत्र बुधवार यानी आज 6 मई को जारी होने की संभावना है। इसके बाद कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय से मुलाकात करेंगे, जिसमें गठबंधन की रूपरेखा को अंतिम रूप दिया जाएगा और सरकार गठन की अगली रणनीति पर विचार-विमर्श होगा। बताया जा रहा है कि कांग्रेस के समर्थन की जानकारी पहले ही टीवीके नेतृत्व को दे दी गई थी, जिससे दोनों पार्टियों के बीच गठबंधन लगभग तय माना जा रहा है। यह कदम राज्य में एक मजबूत और धर्मनिरपेक्ष सरकार बनाने की दिशा में उठाया गया है।

केसी वेणुगोपाल ने दिए थे संकेत

कांग्रेस के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने मंगलवार (5 मई) को मीडिया से बात करते हुए कहा था कि तमिलनाडु के चुनावी नतीजे यह साफ संकेत देते हैं कि जनता एक धर्मनिरपेक्ष सरकार चाहती है, जो संविधान का पूरी तरह से पालन करे। उन्होंने जोर देकर कहा कि कांग्रेस यह सुनिश्चित करना चाहती है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) या उसके सहयोगियों की अगली सरकार में कोई भूमिका न हो। वेणुगोपाल ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस जनता की भावना और जनादेश के अनुरूप ही फैसला लेगी, और उनका यह निर्णय उसी भावना का प्रतिबिंब है।

तमिलनाडु विधानसभा में कुल 234 सीटें

तमिलनाडु विधानसभा में कुल 234 सीटें हैं, और सरकार बनाने के लिए किसी भी दल या गठबंधन को 118 सीटों के बहुमत की आवश्यकता होती है। विजय की पार्टी टीवीके 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है, लेकिन बहुमत के आंकड़े से अभी भी 10 सीटें पीछे है। कांग्रेस के समर्थन से अब यह कमी पूरी हो जाएगी, जिससे टीवीके के लिए सरकार बनाने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। टीवीके का यह शानदार प्रदर्शन तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा बदलाव लेकर आया है, जहाँ दशकों से द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) और ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) का दबदबा रहा है। टीवीके की यह विजय पारंपरिक राजनीतिक समीकरणों को चुनौती देती दिख रही है और राज्य में एक नए राजनीतिक युग की शुरुआत का संकेत दे रही है।

युवाओं और शहरी मतदाताओं के व्यापक समर्थन से विजय की पार्टी अब सरकार बनाने की दौड़ में सबसे आगे है। अपनी मजबूत चुनावी जीत के आधार पर, तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) के नेताओं ने राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया है। उन्होंने सदन में बहुमत साबित करने के लिए राज्यपाल से दो हफ्ते का समय भी मांगा है। सूत्रों के अनुसार, सरकार बनाने के लिए आवश्यक समर्थन जुटाने के उद्देश्य से विजय ने कांग्रेस नेतृत्व से स्वयं बातचीत की थी। इस गठबंधन से राज्य में एक नई राजनीतिक शक्ति का उदय हुआ है, जो भविष्य की राजनीति को नया आकार देगा।

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6 दिन की मासूम का सौदा! हाईवे पर मिली बच्ची से खुला बच्चा तस्करी रैकेट, स्टाफ नर्स समेत 7 गिरफ्तार

कभी-कभी एक छोटी सी घटना इतनी बड़ी कहानी खोल देती है, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की होती। श्योपुर में हाईवे किनारे मिली एक मासूम बच्ची ने भी कुछ ऐसा ही किया। जो बच्ची लावारिश हालत में मिली थी, वही बच्चा तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का राज खोलने की वजह बन गई।

पहली नजर में यह मामला एक सामान्य घटना लग सकता था, लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, हर दिन एक नया खुलासा सामने आता गया। पुलिस की मेहनत ने आखिरकार उस सच्चाई को सामने ला दिया, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया इस पूरे रैकेट की मास्टरमाइंड कोई और नहीं, बल्कि एक सरकारी अस्पताल की नर्स निकली।

हाईवे पर मिली बच्ची से खुला बच्चा तस्करी रैकेट

श्योपुर बच्चा तस्करी मामले की शुरुआत उस समय हुई, जब सवाई माधोपुर नेशनल हाईवे के पास एक ढाबे के करीब दो साल की बच्ची लावारिश हालत में मिली। बच्ची अकेली थी, डरी हुई थी और उसे देखकर साफ लग रहा था कि कुछ गलत हुआ है।

ढाबा संचालक सोनू आर्य ने इंसानियत दिखाते हुए बच्ची को सुरक्षित थाने पहुंचाया। यही वह पहला कदम था, जिसने इस पूरे बच्चा तस्करी नेटवर्क की परतें खोलने का रास्ता बनाया। पुलिस ने जैसे ही जांच शुरू की, यह साफ हो गया कि मामला साधारण नहीं है। बच्ची का यहां होना किसी बड़ी साजिश की ओर इशारा कर रहा था।

100 से ज्यादा सीसीटीवी और भोपाल तक पहुंची जांच

श्योपुर बच्चा तस्करी मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने तीन थानों की संयुक्त टीम बनाई। जांच के दौरान 100 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई।

हर फुटेज एक सुराग बनती गई और जांच की कड़ी धीरे-धीरे भोपाल तक पहुंच गई। आखिरकार पुलिस ने उस दंपती को गिरफ्तार कर लिया, जिसने बच्ची को हाईवे पर छोड़ दिया था। पूछताछ में दंपती ने जो बताया, उसने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया। उन्होंने कबूल किया कि उन्होंने बच्ची को खरीदा था और बाद में उसे छोड़ दिया।

सरकारी नर्स निकली मास्टरमाइंड

श्योपुर बच्चा तस्करी मामले का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ, जब पुलिस ने इस नेटवर्क की असली सूत्रधार तक पहुंच बनाई। जांच में सामने आया कि इस पूरे रैकेट की मास्टरमाइंड एक सरकारी अस्पताल में काम करने वाली हेड नर्स है। आरोप है कि उसने एक गरीब परिवार की मजबूरी का फायदा उठाया और बच्ची को बेच दिया।

करीब दो साल पहले, जब बच्ची सिर्फ 6 दिन की थी, तब उसे सौदे के तहत बेचा गया। इस सौदे में कई लोग शामिल थे, जिनमें एक ब्यूटी पार्लर संचालिका भी थी, जिसने बच्ची को आगे भोपाल के दंपती तक पहुंचाया।

16 दिन की जांच में 7 आरोपी गिरफ्तार

श्योपुर बच्चा तस्करी मामले में पुलिस ने 16 दिनों तक लगातार मेहनत की। इस दौरान कई शहरों में दबिश दी गई। खरगोन, धार, इंदौर और भोपाल में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने अब तक 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें 5 महिलाएं और 2 पुरुष शामिल हैं।

यह कार्रवाई बच्चा तस्करी के खिलाफ एक बड़ी सफलता मानी जा रही है। पुलिस का कहना है कि इस नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करने के लिए जांच अभी भी जारी है।

असली माता-पिता तक पहुंची पुलिस, डीएनए टेस्ट होगा

श्योपुर बच्चा तस्करी मामले में एक राहत भरी खबर भी सामने आई है। पुलिस ने 16 दिनों की जांच के बाद बच्ची के असली माता-पिता को खोज निकाला है।
अब बच्ची और माता-पिता का डीएनए टेस्ट कराया जाएगा, ताकि पूरी तरह पुष्टि हो सके। अगर रिपोर्ट मैच होती है, तो कानूनी प्रक्रिया के बाद बच्ची को उसके असली परिवार को सौंप दिया जाएगा।

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18 साल हो गए, बहुत दुख होता है... केकेआर से हार के बाद दिल्ली कैपिटल्स के क्रिकेट निदेशक का दिल टूटा

दिल्ली कैपिटल्स को इंडियन प्रीमियर लीग 2026 में कोलकाता नाइट राइडर्स से मिली शुक्रवार की हार ने उसके प्लेऑफ की उम्मीदों को लगभग खत्म कर दिया. टीम के क्रिकेट निदेशक वेंकटपति राव ने हार के बाद निराशा जाहिर की. उन्होंने कहा 18 साल हो गए लेकिन ट्रॉफी नहीं जीत पाए,बहुत ज्यादा दुख होता है. Sat, 9 May 2026 10:37:02 +0530

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