Uncovered: Actor Vijay Chandrasekhar की जीत के मायने क्या हैं? क्या DMK-AIADMK युग खत्म?
जोसेफ विजय चंद्रशेखर...ये हैं तमिल फिल्म इंडस्ट्री के सबसे बड़े सितारे, जो आज तमिलनाडु की राजनीति के भी सबसे बड़े स्टार बन गए हैं. 234 सीटों के सदन में 108 सीटें लाकर विजय की पार्टी TVK सबसे आगे है और ये लभभग निश्चित है कि वो तमिलनाडु के नए चीफ मिनिस्टर बनेंगे. आज अनकवर्ड के हमारे एपिसोड में हम आपको बताएंगे कि विजय की जीत के मायने क्या हैं? और कैसे विजय की ये जीत. बाकी फिल्मस्टार्स की जीत से अलग है.
एक ऐसा स्टार जो पिछले साल अपनी पत्नी संगीता से डायवोर्स के चलते चर्चा में था.उनकी पत्नी का आरोप था कि विजय का एक अन्य एक्ट्रेस के साथ अफेयर है, लेकिन उनके फैन्स को इन बातों से कोई मतलब नहीं है. उनके लिए तो उनका सुपरस्टार किसी भगवान से कम नहीं है.
70 फिल्मों में काम कर चुके हैं
पिछले 30 साल के अपने फिल्मी करियर के दौरान विजय करीब 70 फिल्मों में काम कर चुके हैं. जिनमें से कई सुपरहिट रहीं.एक अनुमान के मुताबिक, फिल्मों से उनकी कमाई करीब 600 करोड़ रुपए से ऊपर हो चुकी है.उनकी कई फिल्में सोशल मैसेज देती हैं.साल 2018 में आई, उनकी फिल्म 'सरकार' का थीम था. आपका वोट, आपकी ताकत है. इस फिल्म में हीरो विजय दिखाते हैं कि कैसे एक वोट से पूरा सिस्टम बदल सकता है.
'सरकार' में वो सब दिखाया गया था
विजय की फिल्म 'सरकार' में वो सब दिखाया गया था, जो तमिलनाडु की राजनीति में गलत है...जैसे विकास करने के बजाय, लोगों को फ्रीबीज देना...वैसे तो फ्रीबीज कल्चर पूरे देश की राजनीति में घुल चुका है. लेकिन इसकी शुरुआत तमिलनाडु से ही हुई थी.
एक बड़ा फैन बेस बना
बिगिल, मास्टर और मेर्सल उनकी ऐसी फिल्में रहीं, जो कि Women Empowerment, करप्शन, अमीर-गरीब के बीच की खाई और घटिया हेल्थ केयर सिस्टम जैसे मुद्दों पर सवाल उठाती है.इन फिल्मों में उन्होंने आम आदमी के हक की बात की, जिससे उनका एक बड़ा फैन बेस बना और फिर उनके कई फैन क्लब भी बन गए.
ये अलग बात है कि जिस फ्रीबीज का विजय ने अपनी फिल्मों में विरोध किया. वही फ्रीबीज उनकी पार्टी TVK के मेनिफेस्टो में सबसे अहम रहीं.अब आपको बताते हैं कि विजय ने इस इलेक्शन में तमिलनाडु के वोटर्स से क्या-क्या वादा किया था.
- हर परिवार की मुखिया महिलाओं को 2500रु. प्रति महीना
- हर परिवार को साल में 6 फ्री LPG सिलेंडर
- आर्थिक रूप से कमजोर परिवार की बेटियों की शादी में 8 gram सोने का सिक्का, इसका मतलब है. करीब 1 लाख 20 हजार रु और एक सिल्क की साड़ी
- बच्चों की शिक्षा के लिए पेरेंट्स को 15 हजार रु. की वार्षिक मदद का ऐलान
- महिलाओं के लिए फ्री बस सर्विस
- हर महीने 200 यूनिट बिजली फ्री
- बेरोजगार युवाओं के लिए 2500 से 4 हजार रु. तक भत्ता देने का ऐलान
- पूरे परिवार के लिए 25 लाख का हेल्थ इंश्योरेंस
एंटी इनकंबेंसी का फायदा
इसके अलावा भी कई ऐसे फ्रीबीज का वादा किया गया, जिसने वोटर्स को विजय की ओर आकर्षित किया लेकिन ऐसा नहीं है कि सिर्फ फ्रीबीज ने ही. विजय को तमिलनाडु में जीत दिलाई हो. DMK के 5 साल के शासन के बाद उनका सबसे बड़ा विरोधी दल AIADMK भी एंटी इनकंबेंसी का फायदा उठाने में नाकाम रहा तो इसका साफ मतलब ये है कि तमिलनाडु का वोटर अब द्रविड़ राजनीति से ऊब चुका है और विजय एक नए विकल्प के तौर पर सामने आए हैं. उन्हें लोगों ने एक ईमानदार लीडर के तौर पर देखा. जो उनके सपनों को पूरा कर सकता है.
MGR कई सालों तक DMK की राजनीति में शामिल थे
दक्षिण भारत की राजनीति में यूं तो कई सुपरस्टार जनता के दिल को जीतने में कामयाब रहे हैं.लेकिन विजय की जीत उनसे काफी अलग है.तमिलनाडु में 1977 में CM बने MGR एक बड़े सुपरस्टार थे, लेकिन अपनी पार्टी AIADMK बनाने से पहले वो कई सालों तक DMK की राजनीति में शामिल थे. तमिलनाडु में एक और फिल्म स्टार जयललिता भी कई बार चीफ मिनिस्टर रहीं, लेकिन पहली बार CM बनने से पहले वो कई सालों तक MGR के साथ जुड़ी रहीं थीं.
विधानसभा चुनाव में शानदार कामयाबी हासिल की
वहीं, तमिलनाडु के पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश में तेलुगू सुपरस्टार NTR 1983 में पहली बार CM बने लेकिन इससे पहले उन्होंने अपनी पार्टी TDP बनाने के साथ ही पूरे आंध्र प्रदेश का दौरा किया.और अपनी पार्टी का जनाधार तैयार किया लेकिन विजय की कहानी इन सारे फिल्म स्टार्स से अलग है. साल 2024 के आखिरी महीनों में विजय ने पार्टी तो बना ली. लेकिन ना तो पार्टी का सही रूप से संगठन बना और ना ही विजय ने पूरे तमिलनाडु में घूमकर जनाधार तैयार किया.फिर भी उनकी पार्टी ने इस विधानसभा चुनाव में शानदार कामयाबी हासिल की.
विजय की ये कामयाबी ना सिर्फ तमिलनाडु, बल्कि देश की राजनीति में भी ऐतिहासिक है.विजय की पार्टी TVK से पहले भारत में तीन ही राजनीति पार्टियां ऐसी रही हैं. जिन्होंने अपने गठन के तुरंत बाद सत्ता हासिल कर दी थी.इनमें से एक TDP का जिक्र हम पहले कर चुके हैं.
AGP के पीछे एक लंबा छात्र आंदोलन
दूसरी पार्टी साल 1985 में असम में बनी.असम गण परिषद यानी AGP थी.जिसने उसी साल विधानसभा चुनाव जीतकर सत्ता हासिल की थी. वहीं तीसरा उदाहरण दिल्ली की आम आदमी पार्टी का है.साल 2012 में बनी इस पार्टी ने 2013 में ही दिल्ली की सत्ता हासिल कर ली.लेकिन इन तीनों पार्टियों की तुलना TVK से नहीं की जा सकती, क्योंकि TDP तेलुगू प्राइड के नाम पर बनी थी. AGP के पीछे एक लंबा छात्र आंदोलन था और आम आदमी पार्टी अन्ना आंदोलन से निकली थी.जबकि विजय की पार्टी ना किसी आंदोलन से निकली है, ना ही चुनाव से पहले इसके पास कोई बड़ा जनाधार था.
पॉलिटिकल बेस बनाने में आसानी होगी
हमें लगता है कि आज विजय की जीत के साथ ही तमिलनाडु में द्रविड़ राजनीति का पतन शुरू हो गया.ऐसे में बीजेपी के लिए भी आने वाले वक्त में इस राज्य में अपना पॉलिटिकल बेस बनाने में आसानी होगी.यही कारण है कि बीजेपी भी विजय की जीत से दुखी नहीं है.
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