Petrol Diesel Price Hike: 5 रुपए तक बढ़ सकते हैं दाम, LPG सिलेंडर भी होगा महंगा? 5-7 दिन में फैसला संभव
नई दिल्ली। आम लोगों को जल्द महंगाई का झटका लग सकता है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 4-5 रुपए प्रति लीटर तक बढ़ोतरी और घरेलू LPG सिलेंडर 40-50 रुपए तक महंगा होने की संभावना जताई जा रही है।
सरकारी सूत्रों के हवाले से India Today की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के चलते सरकार इस पर गंभीरता से विचार कर रही है।
क्या हो सकता है बदलाव?
- पेट्रोल: +4 से 5 रुपए /लीटर
- डीजल: +4 से 5 रुपए /लीटर
- LPG सिलेंडर: +40 से 50 रुपए
क्यों बढ़ सकती हैं कीमतें?
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को ऊपर धकेल दिया है।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में कीमतों का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ता है।
तेल कंपनियों पर बढ़ा दबाव
भारतीय तेल विपणन कंपनियां लंबे समय से कीमतों को स्थिर रखे हुए हैं, जबकि लागत लगातार बढ़ रही है। इस वजह से कंपनियों को अंडर-रिकवरी का सामना करना पड़ रहा है, जिसका असर अब सरकार के वित्तीय संतुलन पर भी दिखने लगा है।
चुनाव के बाद बदला रुख?
हाल ही में चुनावों के दौरान कीमत बढ़ाने से इनकार किया गया था, लेकिन अब वैश्विक हालात बदलने के बाद सरकार विकल्पों पर विचार कर रही है।
सूत्रों के मुताबिक, अगले 5-7 दिनों में इस पर फैसला लिया जा सकता है।
आम जनता पर क्या असर पड़ेगा?
अगर कीमतें बढ़ती हैं तो:
- ट्रांसपोर्ट महंगा होगा।
- रोजमर्रा के सामान के दाम बढ़ सकते हैं।
- रसोई गैस महंगी होने से घर का बजट बिगड़ सकता है।
सबसे ज्यादा असर मध्यम और निम्न-मध्यम वर्ग पर पड़ने की आशंका है।
हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। यह जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स और सरकारी सूत्रों के हवाले से सामने आई है।
ब्रिक्स में 'मिडिल-ईस्ट' पर रार: सदस्य देशों में नहीं बनी सहमति, भारत ने फलस्तीन के पक्ष में बुलंद की आवाज
मिडिल-ईस्ट में जारी भीषण संघर्ष के बीच भारत ने ब्रिक्स (BRICS) देशों के मंच पर अपना रुख साफ कर दिया है। भारत की अध्यक्षता में हो रही ब्रिक्स की महत्वपूर्ण बैठक में सदस्य देशों के बीच गहरा मतभेद उभरकर सामने आया है, जिसके कारण किसी भी आम सहमति वाले दस्तावेज पर मुहर नहीं लग सकी।
हालांकि, इस कूटनीतिक गतिरोध के बावजूद भारत ने स्पष्ट किया है कि वह फलस्तीन के मुद्दे और 'दो-राष्ट्र समाधान' (Two-State Solution) के अपने पुराने और विश्वसनीय स्टैंड पर मजबूती से कायम है।
साझा दस्तावेज पर रार: बंटे नजर आए सदस्य देश
भारतीय अधिकारियों के अनुसार, मिडिल-ईस्ट के हालात पर एक साझा राय बनाने की कोशिशें फिलहाल नाकाम साबित हुई हैं। रूस, चीन और ब्राजील जैसे देशों के साथ इस संघर्ष पर दृष्टिकोण में भिन्नता होने के कारण कोई सर्वसम्मत घोषणापत्र तैयार नहीं हो सका।
अगले महीने होने वाली विदेश मंत्रियों की बैठक से पहले यह गतिरोध भारत के लिए एक बड़ी चुनौती है, लेकिन भारत ने साफ कर दिया है कि वह अपनी कूटनीतिक प्राथमिकताओं से समझौता नहीं करेगा।
फलस्तीन की संप्रभुता और UN सदस्यता का समर्थन
भारत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फलस्तीन के प्रति अपनी नीति को फिर से परिभाषित किया है। सरकार का मानना है कि शांति का एकमात्र रास्ता एक स्वतंत्र और संप्रभु फलस्तीन राष्ट्र की स्थापना है, जो सुरक्षित सीमाओं के भीतर इजरायल के साथ सह-अस्तित्व में रह सके।
हाल ही में 26 जनवरी को अरब लीग के साथ किए गए समझौते का हवाला देते हुए भारत ने संयुक्त राष्ट्र (UN) में फलस्तीन की पूर्ण सदस्यता के लिए अपना समर्थन एक बार फिर दोहराया है।
मानवीय मदद का सिलसिला जारी: गाजा के साथ खड़ा भारत
युद्ध और तबाही के बीच भारत ने गाजा के नागरिकों के लिए मदद का हाथ और फैला दिया है। अब तक भारत की ओर से 70 मीट्रिक टन मानवीय सहायता भेजी जा चुकी है, जिसमें जीवन रक्षक दवाएं और मेडिकल उपकरण शामिल हैं।
इसके अलावा, भारत ने 'संयुक्त राष्ट्र राहत और कार्य एजेंसी' (UNRWA) को 5 मिलियन डॉलर की वित्तीय सहायता भी प्रदान की है। यह मदद इस बात का प्रमाण है कि भारत इस संकट में केवल कूटनीति ही नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं को भी प्राथमिकता दे रहा है।
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