विश्व थैलेसीमिया दिवस: थकान, कमजोरी और खून की कमी, जेनेटिक डिसऑर्डर की समय पर पहचान जरूरी
नई दिल्ली, 7 मई (आईएएनएस)। बार-बार थकान महसूस होना, कमजोरी आना और शरीर में खून की कमी जैसे लक्षण कई बार गंभीर रक्त संबंधित बीमारी का संकेत हो सकते हैं। इन लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है। रक्त संबंधित आनुवंशिक विकार थैलेसीमिया की समय पर पहचान और जागरूकता बेहद जरूरी है। हर साल 8 मई को विश्व थैलेसीमिया दिवस मनाया जाता है।
इस दिन थैलेसीमिया रोग के बारे में जागरूकता फैलाने, मरीजों को सहयोग देने और उनके दैनिक संघर्षों को सम्मान देने का प्रयास किया जाता है। नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) के अनुसार, थैलेसीमिया एक आनुवंशिक रक्त विकार है, जिसमें शरीर पर्याप्त मात्रा में हीमोग्लोबिन नहीं बना पाता। इससे व्यक्ति को लगातार खून की कमी, थकान और कमजोरी का सामना करना पड़ता है।
थैलेसीमिया मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है- थैलेसीमिया माइनर जिसमें व्यक्ति रोग का वाहक होता है, लेकिन आमतौर पर सामान्य जीवन जी सकता है। अक्सर इसके लक्षण हल्के होते हैं या दिखाई नहीं देते। वहीं, थैलेसीमिया मेजर रोग का गंभीर रूप है। इसमें मरीज को बार-बार ब्लड ट्रांसफ्यूजन की जरूरत पड़ती है। नियमित चिकित्सकीय देखभाल, दवाओं और विशेष उपचार के बिना जीवन मुश्किल हो जाता है।
विश्व थैलेसीमिया दिवस का मुख्य उद्देश्य युवाओं को शादी से पहले थैलेसीमिया जांच कराने के लिए प्रेरित करना है। अगर दोनों पार्टनर थैलेसीमिया माइनर के वाहक हैं तो उनके बच्चे को थैलेसीमिया मेजर होने की संभावना बढ़ जाती है। समय पर जांच से इस समस्या को रोका जा सकता है।
ऐसे में एक्सपर्ट अपील करते हैं कि थकान, कमजोरी, पीली त्वचा, भूख न लगना या बार-बार बीमार पड़ना जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से जांच कराएं। समय पर सही जानकारी और जागरूकता से थैलेसीमिया के प्रभावों और जटिलताओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
थैलेसीमिया मेजर के मरीजों को नियमित ब्लड ट्रांसफ्यूजन की जरूरत होती है, इसलिए स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा देना भी इस दिवस का महत्वपूर्ण उद्देश्य है। एक यूनिट रक्त कई मरीजों की जिंदगी बचाने में मदद कर सकता है। जागरूकता ही समाधान है।
थैलेसीमिया पूरी तरह ठीक नहीं हो सकता, लेकिन सही समय पर पहचान, नियमित उपचार और उचित देखभाल से मरीज सामान्य जीवन जी सकते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि परिवारों को खासकर शादी योग्य उम्र के युवाओं को इस बीमारी के बारे में जानकारी होनी चाहिए।
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डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
विदेश मंत्री जयशंकर ने सूरीनाम में भारत की मदद से बनी फल प्रसंस्करण इकाई का उद्घाटन किया
पारामारिबो, 7 मई (आईएएनएस)। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार को सूरीनाम के राजधानी शहर परामारिबो में एक फल प्रसंस्करण (फ्रूट प्रोसेसिंग) सुविधा का उद्घाटन किया। यह सुविधा भारत की वित्तीय मदद से बनाई गई है।
भारत ने सूरीनाम को फल प्रसंस्करण मशीनें दी हैं, जिसे 2025 में विदेश मंत्री जयशंकर की ओर से घोषित 10 लाख डॉलर के छोटे और मध्यम उद्यम अनुदान के तहत फंड किया गया था। उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट इस बात का भी संदेश देता है कि भारत, सूरीनाम और ग्लोबल साउथ का एक साझेदार है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत का ‘वसुधैव कुटुंबकम’ यानी “पूरा विश्व एक परिवार है” का विचार सिर्फ शब्दों में नहीं है, बल्कि इसे असली प्रोजेक्ट्स और कामों के जरिए दिखाया जा रहा है। यह उसका एक अच्छा उदाहरण है।
उन्होंने आगे कहा कि आने वाले समय में जब सूरीनाम विकास और समृद्धि की ओर बढ़ेगा, भारत हमेशा उसका भरोसेमंद साथी रहेगा।
इस कार्यक्रम में सूरीनाम के विदेश मंत्री मेल्विन बोवा और कृषि मंत्री निके नूरसालिम भी मौजूद थे।
जयशंकर ने कहा कि भारत की मदद से बना यह प्रोजेक्ट वैल्यू एडिशन और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक कदम है। यह दिखाता है कि भारत, सूरीनाम का एक भरोसेमंद विकास साझेदार है।
उन्होंने सूरीनाम की नेशनल असेंबली के अध्यक्ष माइकल अश्विन अधीन से भी मुलाकात की। उन्होंने कहा कि हमने भारत और सूरीनाम के बीच कई क्षेत्रों में सहयोग पर अच्छी और उपयोगी बातचीत की। हमने दोनों लोकतंत्रों के बीच संसदीय आदान-प्रदान के महत्व को भी माना।
गुरुवार को ही उन्होंने लाला रूख म्यूजियम भी देखा, जो भारत से गए सूरीनामी लोगों की विरासत को दिखाता है।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “गिरमिटिया लोगों का साहस और संघर्ष आज भी आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता है और हमारी मजबूत दोस्ती की नींव है।”
--आईएएनएस
एवाई/एबीएम
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