बंगाल में M फैक्टर का कमाल, दीदी को पछाड़ ऐसे आगे निकल गया कमल
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के रुझानों ने राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव संकेतित किया है. शुरुआती आंकड़ों में भारतीय जनता पार्टी दो-तिहाई बहुमत की ओर बढ़ती नजर आ रही है, जबकि तृणमूल कांग्रेस अपेक्षा से कम सीटों पर सिमटती दिख रही है. इस संभावित जीत के पीछे छह बड़े “M फैक्टर” बताए जा रहे हैं, जिन्होंने चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल दिए.
M1: मोदी मैजिक
इस चुनाव में सबसे बड़ा प्रभाव नरेंद्र मोदी की आक्रामक प्रचार शैली का रहा. उन्होंने अपनी रैलियों में भ्रष्टाचार, विकास और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया. उनके ‘परिवर्तन’ के संदेश ने खासकर युवाओं और महिलाओं को प्रभावित किया। साथ ही, स्थानीय स्तर पर आम लोगों से जुड़ने की उनकी शैली जैसे झालमुड़ी वाला प्रसंग ने भी सकारात्मक माहौल बनाया.
M2: ममता के खिलाफ माहौल
ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार को कई मुद्दों पर घिरते देखा गया. आरजी कर जैसे मामलों ने महिला सुरक्षा पर सवाल खड़े किए, जबकि भर्ती घोटालों और प्रशासनिक विवादों ने सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाया. कल्याणकारी योजनाएं होने के बावजूद बेरोजगारी और विकास की कमी विपक्ष के लिए बड़ा हथियार बन गई.
M3: माइग्रेंट्स और घुसपैठ का मुद्दा
चुनाव में घुसपैठ और प्रवासी मजदूरों का मुद्दा भी केंद्र में रहा. बीजेपी ने इसे सुरक्षा और पहचान से जोड़ा, जबकि टीएमसी ने इसे मताधिकार से संबंधित चिंता के रूप में पेश किया. इस टकराव ने चुनावी बहस को तेज किया और कई सीमावर्ती इलाकों में वोटिंग पैटर्न को प्रभावित किया.
M4: मतुआ समुदाय का झुकाव
बंगाल की राजनीति में मतुआ समुदाय की अहम भूमिका रही है. नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर किए गए वादों ने इस समुदाय के एक हिस्से को बीजेपी की ओर आकर्षित किया. उत्तर 24 परगना और नदिया जैसे क्षेत्रों में इस समुदाय का असर चुनावी नतीजों में निर्णायक माना जा रहा है.
M5: महिला मतदाताओं की भूमिका
इस बार रिकॉर्ड मतदान में महिलाओं की भागीदारी सबसे ज्यादा रही. बीजेपी ने महिलाओं के लिए आर्थिक सहायता, सुरक्षा और आरक्षण जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी. इससे महिला वोट बैंक में सेंध लगाने में पार्टी को मदद मिली. महिला सुरक्षा से जुड़े मामलों को भी चुनावी मुद्दा बनाकर विपक्ष को घेरा गया.
M6: मुस्लिम वोटों का समीकरण
बंगाल में मुस्लिम वोट हमेशा निर्णायक रहे हैं, लेकिन इस बार समीकरण कुछ बदले हुए नजर आए. ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन की एंट्री और विभिन्न मुद्दों ने वोटों का बंटवारा किया. इससे कई सीटों पर सीधा असर पड़ा और मुकाबले का परिणाम बदल गया.
जश्न और सियासी संदेश
रुझानों के बाद बीजेपी कार्यकर्ताओं में उत्साह देखने को मिल रहा है. जगह-जगह जश्न मनाया जा रहा है, जो इस बदलाव की बानगी पेश करता है. यदि ये रुझान नतीजों में बदलते हैं, तो यह बंगाल की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत हो सकती है.
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फ्रांस ने अमेरिका के प्रोजेक्ट फ्रीडम में भागीदारी से किया इनकार, होर्मुज खोलने की अपील
पेरिस, 4 मई (आईएएनएस)। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सोमवार को कहा कि यूरोप अपना सिक्योरिटी सॉल्यूशन बना रहा है और होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने के ऑपरेशन में हिस्सा नहीं लेगा। फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने इसे अस्पष्ट फ्रेमवर्क बताया और बातचीत के जरिए स्ट्रेट को फिर से खोलने की मांग दोहराई।
इमैनुएल मैक्रों ने येरेवन, आर्मेनिया में सोमवार से शुरू हुई यूरोपीय पॉलिटिकल कम्युनिटी की 8वीं बैठक में कहा, यूरोपीय संघ हमारे सिक्योरिटी सॉल्यूशन बना रहा है। यूरोपीय संघ अपनी किस्मत अपने हाथों में ले रहा है, रक्षा व सुरक्षा पर खर्च बढ़ा रहा है और कॉमन सॉल्यूशन बना रहा है।
फ्रांस के राष्ट्रपति ने सोमवार को येरेवन, आर्मेनिया में यूरोपीय राजनीतिक समुदाय समिट में बोलते हुए ईरान और अमेरिका के बीच होर्मुज स्ट्रेट को मिलकर फिर से खोलने की बात कही।
मैक्रों ने प्रोजेक्ट फ्रीडम में फ्रांस के शामिल होने से मना कर दिया। यह प्रोजेक्ट राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट से नेविगेशन फिर से शुरू करने के लिए शुरू किया था। फ्रांस के प्रेसिडेंट ने कहा, हम ऐसी किसी चीज में हिस्सा नहीं लेंगे जो साफ नहीं है।
उन्होंने कहा कि यूरोपीय सुरक्षा नीति 2022 से यूरोपियन पॉलिटिकल कम्युनिटी, कोएलिशन ऑफ द विलिंग कंट्रीज के जरिए यूक्रेन का समर्थन और होर्मुज स्ट्रेट से जुड़ी कोशिश जैसी पहल के जरिए बनाई गई है।
उन्होंने कहा कि फ्रांस स्ट्रेट को फिर से खोलने का समर्थन करता है लेकिन इस बात पर जोर दिया कि वह एक साफ फ्रेमवर्क के बाहर किसी भी फोर्स-बेस्ड ऑपरेशन में हिस्सा नहीं लेगा।
उन्होंने कहा, “अगर अमेरिका होर्मुज को फिर से खोलने के लिए तैयार है, तो यह बहुत अच्छा है। हम शुरू से यही मांग कर रहे हैं।” मैक्रों ने कहा कि फ्रांस ईरान और अमेरिका के बीच कोऑर्डिनेटेड रीओपनिंग के पक्ष में है। यह बिना किसी रोक और बिना टोल के फ्री नेविगेशन सुनिश्चित करने का एकमात्र सस्टेनेबल सॉल्यूशन है।
उन्होंने लेबनान में सीजफायर का सम्मान करने की अहमियत पर भी जोर दिया और सभी पार्टियों से अपने वादे निभाने की अपील की। 28 फरवरी से इस इलाके में तनाव बढ़ गया है। अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले शुरू किए, जिसके बाद तेहरान ने भी इजरायली ठिकानों और खाड़ी में अमेरिका के एयरबेस और संपत्ति पर जवाबी हमले किए।
--आईएएनएस
केके/पीएम
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