Assam Assembly Election 2026 LIVE: असम में 'हैट्रिक' या 'महाजोत' का प्रहार? मतगणना शुरू
4 मई 2026 की सुबह असम की राजनीति के लिए बेहद ऐतिहासिक है। राज्य की 126 विधानसभा सीटों के भविष्य का फैसला होने जा रहा है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की साख और कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन की चुनौती के बीच, गुवाहाटी से लेकर डिब्रूगढ़ तक हर जगह धड़कनें तेज हैं।
विधानसभा सीटों का गणित
असम विधानसभा में कुल 126 सीटें हैं। सरकार बनाने के लिए जादुई आंकड़ा 64 सीटों का है। 2021 के चुनाव में बीजेपी के नेतृत्व वाले गठबंधन (NDA) ने 75 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत हासिल किया था। इस बार देखना दिलचस्प होगा कि क्या एनडीए अपनी संख्या बढ़ा पाता है या विपक्षी गठबंधन सेंध लगाने में सफल होता है।
प्रमुख पार्टियां और गठबंधन
असम का मुकाबला मुख्य रूप से दो शक्तिशाली गुटों और कुछ क्षेत्रीय ताकतों के बीच है:
- NDA (नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस): इसका नेतृत्व बीजेपी (BJP) कर रही है। इसके साथ असोम गण परिषद (AGP), बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (BPF) और राभा हासोंग संयुक्त मंच जैसे दल शामिल हैं।
- असोम (ASOM - विपक्षी गठबंधन): इसका नेतृत्व कांग्रेस (INC) कर रही है। इसमें रायजोर दल (अखिल गोगोई), असम जातीय परिषद (लुरिनज्योति गोगोई) और वामपंथी दल (CPIM) शामिल हैं।
- अन्य: बदरुद्दीन अजमल की AIUDF और तृणमूल कांग्रेस (TMC) भी कुछ क्षेत्रों में निर्णायक भूमिका निभा रही हैं।
| पार्टी | बढ़त |
| कुल | |
| बीजेपी+ | 35 | |||
| कांग्रेस+ | 10 | |||
| अन्य | 00 |
सबसे हॉट सीटें (High-Profile Seats)
इन सीटों के नतीजे राज्य की बड़ी तस्वीर साफ करेंगे:-
- जालुकबारी (Jalukbari): मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की अपनी सीट, जहाँ से वे जीत की हैट्रिक से आगे निकलने की तैयारी में हैं।
- जोरहाट (Jorhat): प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई की सीट, जो विपक्ष के लिए सबसे बड़ी प्रतिष्ठा का सवाल है।
- शिवसागर (Sivasagar): फायरब्रांड नेता अखिल गोगोई की सीट, जहाँ कड़ा मुकाबला देखा जा रहा है।
- नाजिरा (Nazira): विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष देवव्रत सैकिया का गढ़।
- तिताबोर (Titabor): पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई की विरासत वाली इस सीट पर भी सबकी नज़रें हैं।
किसकी साख दांव पर लगी है?
- हिमंता बिस्वा सरमा (CM): उनके नेतृत्व में बीजेपी लगातार तीसरी बार सरकार बनाने का दावा कर रही है। यह उनके 'नॉर्थ ईस्ट विजन' की सबसे बड़ी परीक्षा है।
- गौरव गोगोई: गोगोई परिवार की विरासत को बचाने और कांग्रेस को पुनर्जीवित करने का दारोमदार उनके कंधों पर है।
- अतुल बोरा और हाग्रामा मोहिलरी: क्षेत्रीय दलों के इन दिग्गजों के लिए किंगमेकर की भूमिका निभाने की साख दांव पर है।
मुख्य मुद्दे और मतदान प्रतिशत
इस बार असम में 85.38% का बंपर मतदान हुआ है, जो पिछले चुनाव से अधिक है। जहाँ बीजेपी ने विकास, सुरक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर को अपना मुख्य हथियार बनाया, वहीं विपक्ष ने महंगाई, बेरोजगारी और सीएए (CAA) जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरा है।
Kerala Election Results 2026 LIVE: विजयन की 'हैट्रिक' या परंपरा की जीत? केरल में वोटों की गिनती जारी
आज 4 मई 2026 की सुबह से ही केरल के लिए सस्पेंस और उत्साह से भरी है। राज्य की सभी 140 विधानसभा सीटों के लिए किस्मत ईवीएम में कैद है और अब सबकी नज़रें मतगणना केंद्रों पर टिकी हैं। चुनावी समर में उतरे दिग्गजों के भाग्य का फैसला होने में अब कुछ ही पलों का इंतज़ार बाकी है।
यहाँ पढ़ें केरल चुनाव नतीजों से जुड़ी हर ताज़ा अपडेट:
तैयारियां पूरी: स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर समर्थकों का जमावड़ा
केरल के 14 जिलों में बनाए गए मतगणना केंद्रों पर सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं। निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुसार, त्रि-स्तरीय सुरक्षा घेरे के बीच काउंटिंग की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर राजनीतिक दलों के एजेंट और समर्थकों की भारी भीड़ जुटने लगी है। हर किसी की धड़कनें तेज हैं कि क्या वामपंथी गठबंधन (LDF) अपनी सत्ता बचा पाएगा या कांग्रेस नीत UDF बाजी मारेगा।
केरल का 'सियासी रिवाज' बनाम विजयन की 'हैट्रिक'
केरल की राजनीति में दशकों से यह परंपरा रही है कि यहाँ हर 5 साल में सत्ता बदल जाती है। हालांकि, 2021 में मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने इस रिवाज को तोड़कर दोबारा सरकार बनाई थी। अब 2026 के ये नतीजे तय करेंगे कि क्या वामपंथी किला और मजबूत होगा या फिर जनता 'बदलाव' के पुराने रास्ते पर लौटेगी। एग्जिट पोल्स के मिले-जुले संकेतों ने मुकाबले को और भी रोमांचक बना दिया है।
| पार्टी | बढ़त | जीत | कुल |
| LDF | 03 | ||
| UDF | 09 | ||
| NDA | 01 |
धर्मडम से लेकर पलक्कड़ तक: इन हॉट सीटों पर रहेगी नज़र
- धर्मडम: मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की अपनी सीट, जहाँ उनकी साख दांव पर है।
- पुथुपल्ली और पालक्काड़: इन सीटों पर कड़े त्रिकोणीय मुकाबले की उम्मीद है, जहाँ भाजपा भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश में है।
- वायनाड क्षेत्र: यहां कांग्रेस नीत UDF को भारी बढ़त की उम्मीद है, जबकि मध्य केरल में LDF की पकड़ की परीक्षा होगी।
सुरक्षा और पारदर्शिता पर आयोग का जोर
निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतगणना की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रहेगी। सीसीटीवी कैमरों की निगरानी और भारी पुलिस बल की मौजूदगी में वोटों की गिनती की जाएगी। आयोग ने विजय जुलूसों और कानून-व्यवस्था को लेकर भी सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।
विधानसभा सीटों का गणित
केरल विधानसभा में कुल 140 सीटें हैं। सरकार बनाने के लिए किसी भी गठबंधन या दल को 71 सीटों के बहुमत के आंकड़े को पार करना होगा। 2021 के चुनावों में वामपंथी गठबंधन (LDF) ने 99 सीटें जीतकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी, जबकि कांग्रेस नीत UDF को 41 सीटें मिली थीं।
प्रमुख पार्टियां और गठबंधन
केरल का चुनाव मुख्य रूप से दो बड़े गठबंधनों के इर्द-गिर्द घूमता है, जिसमें इस बार भाजपा के नेतृत्व वाला तीसरा मोर्चा भी पूरी ताकत से मैदान में है-:
LDF (लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट): इसका नेतृत्व CPIM (भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी) कर रही है। इसमें भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI), केरल कांग्रेस (M) और अन्य छोटे वामपंथी दल शामिल हैं।
UDF (यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट): इसका नेतृत्व कांग्रेस (INC) कर रही है। इसमें इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML), केरल कांग्रेस (J) और रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (RSP) जैसे दल शामिल हैं।
NDA (नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस): इसका नेतृत्व भाजपा (BJP) कर रही है। इसमें बीडीजेएस (BDJS) और अन्य स्थानीय सहयोगी दल शामिल हैं।
किसकी साख दांव पर लगी है?
- पिनाराई विजयन (मुख्यमंत्री): उनके लिए यह चुनाव 'हैट्रिक' बनाने का मौका है। अगर वे जीतते हैं, तो वे केरल के इतिहास में लगातार तीन बार सत्ता संभालने वाले पहले नेता बन सकते हैं।
- वी.डी. सतीशन और के. सुधाकरण: कांग्रेस के इन शीर्ष नेताओं पर पार्टी को वापस सत्ता में लाने और केरल के 'सत्ता परिवर्तन' वाले रिवाज को कायम रखने की बड़ी जिम्मेदारी है।
- के. सुरेंद्रन (भाजपा अध्यक्ष): भाजपा के लिए केरल में अपना खाता मजबूती से खोलना और वोट शेयर बढ़ाना साख का सवाल है।
क्या है मुख्य मुद्दा?
जहा एक ओर LDF सरकार अपने कल्याणकारी कार्यों और विकास योजनाओं के दम पर वोट मांग रही है, वहीं UDF ने 'सत्ता परिवर्तन' के पारंपरिक रिवाज और भ्रष्टाचार के मुद्दों को हथियार बनाया है। भाजपा ने 'सबका साथ-सबका विकास' और सबरीमाला जैसे सांस्कृतिक मुद्दों को केंद्र में रखा है।
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