'हर विचार की अभिव्यक्ति का हक', 'धुरंधर' फिल्म और बंगाल चुनाव पर Javed Akhtar के बेबाक बोल
मशहूर गीतकार और लेखक जावेद अख्तर ने रविवार को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सिनेमाई दृष्टिकोण पर अपनी महत्वपूर्ण राय साझा की। कोलकाता के एक प्रतिष्ठित आभूषण ब्रांड द्वारा विशेष सम्मान से नवाजे जाने के बाद, अख्तर ने फिल्म 'धुरंधर' को लेकर चल रहे विवादों और पश्चिम बंगाल के राजनीतिक परिदृश्य पर पत्रकारों से खुलकर बात की। उनसे हाल में आई ‘धुरंधर’ जैसी कुछ फिल्मों को ‘दुष्प्रचार’ वाली फिल्म करार दिए जाने से जुड़ा सवाल किया गया तो गीतकार ने कहा कि सभी को अपने विचार व्यक्त करने का अधिकार है।
इसे भी पढ़ें: Kailash Mansarovar Yatra से फिर गरमाया India-Nepal Border Dispute, लिपुलेख पर दावे को भारत ने बताया 'मनगढ़ंत'
अख्तर ने कहा, ‘‘मुझे नहीं पता कि ‘दुष्प्रचार’ वाली फिल्मों से आपका क्या मतलब है। मुझे ‘धुरंधर’ बहुत पसंद आई, जो एक बेहतरीन फिल्म है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हर कहानी किसी न किसी पक्ष को दर्शाती है, लेकिन क्या कोई कहानी सिर्फ इसलिए दुष्प्रचार बन जाती है क्योंकि उसका कथानक दर्शकों के एक वर्ग के लिए उपयुक्त नहीं है? हर किसी को अपने विचारों को व्यक्त करने का अधिकार है।’’ अख्तर ने कहा कि हर फिल्म निर्माता का काम सच को दिखाना है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के आने वाले परिणाम के बारे में पूछे जाने पर अख्तर ने कहा, ‘‘सरकारें आती-जाती रहती हैं; समाज चलाने के लिए सरकार की आवश्यकता होती है। लेकिन बंगाल सरकारों के लिए नहीं जाना जाता। बंगाल अपने इतिहास और साहित्य के लिए जाना जाता है, जिसका किसी भी राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं है।’’
इसे भी पढ़ें: Assembly Election Result 2026 | चुनावी महासंग्राम! बंगाल से केरल तक किसका होगा राजतिलक? आज सुबह 8 बजे से फैसला
वर्ष 2014 में, केंद्र में भाजपा के सत्ता में आने के मुद्दे पर टिप्पणी करने का आग्रह किये जाने पर, अख्तर ने कहा कि वहां बदलाव होना तय था। उन्होंने कहा, ‘‘कभी-कभी बदलाव अवांछनीय होते हैं और कभी-कभी वांछनीय। मेरा मानना है कि युवा पीढ़ी मेरी पीढ़ी से बेहतर है। वे इस समाज को कहीं बेहतर बनाएंगे।
जावेद अख्तर का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में कला और राजनीति के मेल पर तीखी बहस छिड़ी हुई है। उनकी टिप्पणियां न केवल अभिव्यक्ति की आजादी का समर्थन करती हैं, बल्कि समाज को चुनावी शोर से ऊपर उठकर सांस्कृतिक मूल्यों पर ध्यान देने का संदेश भी देती हैं।
MP में ‘तेंदुआ डेथ कॉरिडोर’ का डर! अंतरराष्ट्रीय तेंदुआ दिवस पर एक दिन में 2 मौतें
अंतरराष्ट्रीय तेंदुआ दिवस, जो पूरी दुनिया में वन्यजीव संरक्षण का संदेश देने के लिए मनाया जाता है, इस बार मध्य प्रदेश के लिए बेहद दुखद साबित हुआ। जहां एक ओर लोग तेंदुओं को बचाने की बात कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर सतना और मैहर से आई खबरों ने पूरे माहौल को गमगीन कर दिया।
एक ही दिन में दो तेंदुओं की मौत की घटनाएं सामने आईं। ये सिर्फ हादसे नहीं हैं, बल्कि एक बड़ी चेतावनी हैं। जंगलों के राजा माने जाने वाले ये खूबसूरत जीव अब अपने ही रास्तों पर सुरक्षित नहीं हैं। सवाल यह उठता है कि क्या विकास की रफ्तार ने जंगलों के इन बाशिंदों के लिए रास्ते बंद कर दिए हैं?
सतना में रेलवे ट्रैक बना मौत का जाल
सतना जिले के उचेहरा वन परिक्षेत्र में जो तस्वीर सामने आई, उसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया। रेलवे ट्रैक के पास एक ढाई साल की मादा तेंदुए का शव पड़ा मिला। आसपास खून फैला हुआ था और शरीर पर गंभीर चोटों के निशान साफ दिखाई दे रहे थे।
तेंदुआ शायद भोजन की तलाश में भटकते हुए रेलवे ट्रैक तक पहुंच गया होगा। लेकिन यहां सवाल यह है कि क्या ऐसे संवेदनशील इलाकों में वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं? रेलवे ट्रैक अब सिर्फ इंसानों के लिए नहीं, बल्कि वन्यजीवों के लिए भी ‘डेथ कॉरिडोर’ बनते जा रहे हैं। सतना की यह घटना उसी का एक उदाहरण है।
मैहर में हाईवे बना खतरनाक ‘डेथ कॉरिडोर’
इसी दिन मैहर वनमंडल से भी एक और दिल दहला देने वाली खबर आई। मैहर-कटनी नेशनल हाईवे पर एक डेढ़ साल की मादा तेंदुआ मृत पाई गई। उसका शव सड़क के किनारे पड़ा था, जिससे साफ है कि यह एक सड़क दुर्घटना का मामला है।
तेंदुए अक्सर रात के समय सड़क पार करते हैं और तेज रफ्तार वाहनों के कारण हादसे का शिकार हो जाते हैं। मैहर की यह घटना बताती है कि कैसे विकास के नाम पर बनाए गए हाईवे अब वन्यजीवों के लिए खतरनाक साबित हो रहे हैं।
इन दोनों घटनाओं के बीच एक और अहम बात सामने आई है। मैहर के शारदा माता मंदिर क्षेत्र में तेंदुए और उसके शावकों के पगमार्क मिले हैं। यह संकेत है कि तेंदुए अब जंगलों से निकलकर इंसानी बस्तियों की ओर बढ़ रहे हैं।




Mp Breaking News










.jpg)






