रक्षा मंत्री राजनाथ प्रयागराज में 4 मई को करेंगे उत्तर प्रौद्योगिकी संगोष्ठी का उद्घाटन, अरैल घाट नो फ्लाइंग जोन घोषित
नई दिल्ली, 3 मई (आईएएनएस)। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 4 मई को उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में ‘रक्षा त्रिवेणी संगम-प्रौद्योगिकी, उद्योग और सैनिक क्षमता का संगम होता है’ विषय पर आधारित उत्तर प्रौद्योगिकी संगोष्ठी का उद्घाटन करेंगे। तीन दिवसीय यह कार्यक्रम भारतीय सेना की उत्तरी कमान और केंद्रीय कमान तथा सोसायटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स (एसआईडीएम) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया जा रहा है।
यह संगोष्ठी परिचालन संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए अत्याधुनिक स्वदेशी प्रौद्योगिकियों को प्रदर्शित करने और एकीकृत करने के लिए एक जीवंत मंच के रूप में कार्य करेगी। प्रदर्शनी में देशभर से लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई), निजी रक्षा प्रौद्योगिकी फर्मों, स्टार्टअप्स और सैन्य कर्मियों सहित विभिन्न प्रतिभागी शामिल होंगे।
284 कंपनियां अपने नवीनतम नवाचारों और प्रौद्योगिकियों को प्रदर्शित करने के लिए स्टॉल लगा रही हैं। इस आयोजन का उद्देश्य क्षेत्र में तैनाती, रखरखाव प्रक्रियाओं के लिए उपयुक्त प्रौद्योगिकियों की पहचान करना और खरीद प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करना है, जिससे भारतीय सेना के लिए एक स्थायी और आत्मनिर्भर रक्षा प्रणाली को बढ़ावा दिया जा सके।
भारतीय सेना अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी की परिचालन प्रासंगिकता और सुरक्षा संबंधी बदलती चुनौतियों से निपटने के लिए निरंतर नवाचार की आवश्यकता पर जोर देती रही है। 6 मई 2026 को समाप्त होने वाली यह संगोष्ठी रक्षा बलों, वैज्ञानिकों, उद्योग जगत के नेताओं और शैक्षणिक समुदाय के बीच एक सेतु का काम करेगी, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा और तकनीकी उत्कृष्टता को मजबूत करने के उद्देश्य से सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।
बताया जा रहा है कि इस कार्यक्रम में ड्रोन, ऑल-टेरेन वाहन, सर्विलांस सिस्टम और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी तकनीकों को दिखाया जाएगा। इसके अलावा कार्यक्रम के दौरान रक्षा नवाचार, सैन्य निर्माण और नई तकनीकों पर सेमिनार आयोजित किए जाएंगे।
विशेषज्ञ बताएंगे कि भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कैसे आगे बढ़ रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के आगमन के मद्देनजर अरैल घाट पर कड़ा सुरक्षा पहरा है। पुलिस के साथ ही अन्य जवान भी तैनात किए गए हैं। पुलिस की ओर से सुरक्षा के मद्देनजर अरैल घाट को नो फ्लाइंग जोन घोषित कर दिया गया है।
--आईएएनएस
ओपी/वीसी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
चीन पत्रकारों के लिए सबसे बड़ा जेल, आरएसएफ रिपोर्ट में गंभीर खुलासे
बीजिंग, 3 मई (आईएएनएस)। वैश्विक स्तर पर पत्रकारिता और सूचना के अधिकार के खिलाफ सरकार के दमनकारी अभियान की वजह से चीन पत्रकारों के लिए दुनिया का सबसे बड़ा जेल बन गया है। पेरिस स्थित रिपोर्टर्स विथाउट बॉर्डर्स (आरएसएफ) की ताजा वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान में चीन में 110 पत्रकार और तीन मीडिया कर्मी हिरासत में हैं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि चीनी सरकार निगरानी, दबाव, धमकी और डराने-धमकाने जैसे तरीकों का इस्तेमाल करके स्वतंत्र पत्रकारों को उन मुद्दों पर रिपोर्टिंग करने से रोकती है, जिन्हें वह संवेदनशील मानती है।
वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में चीन 180 देशों में 178वें स्थान पर है। यानी वह नीचे से तीसरे नंबर पर है। उससे नीचे सिर्फ नॉर्थ कोरिया (179) और इरिट्रिया (180) हैं। पिछले साल चीन की रैंकिंग 176 थी।
अलग-अलग पैमानों पर भी चीन की स्थिति काफी खराब है। राजनीतिक और कानूनी मामलों में उसे 179वां स्थान मिला है। सामाजिक मामलों में 177वां और आर्थिक मामलों में 173वां। इससे साफ दिखता है कि वहां हर स्तर पर पत्रकारिता पर दबाव है।
मार्च में आरएसएफ ने चीनी अधिकारियों की कड़ी आलोचना की थी, क्योंकि उन्होंने पत्रकार झांग झान को वकील से मिलने नहीं दिया और उन्हें पूरी तरह बाहरी दुनिया से अलग कर दिया। आरएसएफ ने दुनियाभर से चीन पर दबाव बढ़ाने की अपील की।
रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2025 में झांग झान को दूसरी बार झूठे आरोपों में सजा दी गई। उन्हें वकील तक पहुंच नहीं दी गई, जिससे वे अपने केस के खिलाफ सही तरीके से अपील भी नहीं कर पा रही हैं।
आरएसएफ की एशिया-पैसिफिक एडवोकेसी मैनेजर एलेक्जेंड्रा बिएलाकोव्स्का ने कहा कि चीनी सरकार झांग झान को डराने और चुप कराने की पूरी कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि झान ने दुनिया को एक बड़े स्वास्थ्य संकट के बारे में जानकारी दी थी, इसलिए उन्हें जेल में डालने के बजाय एक बहादुर पत्रकार के रूप में देखा जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चीन पर दबाव बढ़ाना चाहिए ताकि झांग झान को रिहा किया जाए, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और उन्हें सही मेडिकल सुविधा मिले।
19 सितंबर 2025 को एक बंद कमरे में हुई सुनवाई के बाद झांग झान को झगड़ा करने और परेशानी खड़ी करने जैसे आरोप में चार साल की सजा सुनाई गई।
संगठन ने बताया कि सुनवाई के दौरान कम से कम सात देशों के राजनयिक और पांच एक्टिविस्ट अंदर जाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उन्हें रोक दिया गया। कुछ लोगों को थोड़ी देर के लिए हिरासत में भी लिया गया। झांग के वकीलों को उनसे मिलने की इजाजत नहीं दी जा रही है और उनके कानूनी प्रतिनिधियों को भी परेशान किया जा रहा है।
आरएसएफ ने यह भी बताया कि झांग झान को 28 अगस्त 2024 को गिरफ्तार किया गया था और फिलहाल उन्हें शंघाई के पुडोंग डिटेंशन सेंटर में रखा गया है। यह उनका दूसरा जेल कार्यकाल है।
पहली बार उन्हें मई 2020 में गिरफ्तार किया गया था, जब उन्होंने वुहान से कोविड-19 महामारी के दौरान रिपोर्टिंग की थी। उन्होंने उस समय 100 से ज्यादा वीडियो ऑनलाइन पोस्ट किए थे।
--आईएएनएस
एवाई/वीसी
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