सलमान खान ने गाए हैं ये 6 गाने, अल्का याग्निक, श्रेया घोषाल ने दिया साथ, आपका कौनसा फेवरेट है?
सलमान खान ने अपनी इन फिल्मों में एक्टिंग के साथ गाने भी गाए हैं। कुछ गाने हिट हुए तो कुछ कब आए अब चले गए पता भी नहीं चला। सलमान खान की आवाज में थे फिल्मों के ये गाने।
Direct vs Regular Funds: डायरेक्ट या रेगुलर...दोनों म्यूचुअल फंड में क्या अंतर? किसमें करें निवेश?
Direct vs Regular Funds: म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले ज्यादातर निवेशकों के सामने एक आम सवाल होता है कि डायरेक्ट या रेगुलर में से कौन सा प्लान चुनें? पहली नजर में दोनों एक जैसे लगते हैं, क्योंकि पोर्टफोलियो, फंड मैनेजर और निवेश रणनीति एक ही होती, लेकिन असली फर्क लागत और निवेश के तरीके में छिपा होता है, जो लंबे समय में आपके रिटर्न को प्रभावित करता।
डायरेक्ट फंड वह होते हैं जिन्हें आप सीधे म्यूचुअल फंड कंपनी की वेबसाइट या बिना किसी बिचौलिए के प्लेटफॉर्म के जरिए खरीदते। वहीं रेगुलर फंड में निवेश किसी एजेंट, डिस्ट्रीब्यूटर या फाइनेंशियल एडवाइजर के जरिए किया जाता है। यही बिचौलिया लागत बढ़ाता है, क्योंकि उसे कमीशन दिया जाता है।
डायरेक्ट फंड में रिटर्न क्यों ज्यादा दिखता?
डायरेक्ट प्लान का एक्सपेंस रेशियो कम होता है, क्योंकि इसमें डिस्ट्रीब्यूटर कमीशन शामिल नहीं होता। यह अंतर छोटा लग सकता है, लेकिन लंबे समय में यह आपके निवेश पर अच्छा असर डालता। इसी वजह से डायरेक्ट फंड में रिटर्न थोड़ा ज्यादा नजर आता। यहां फंड की परफॉर्मेंस अलग नहीं होती, बस खर्च कम होने से निवेशक के पास ज्यादा पैसा बचता है।
फिर रेगुलर फंड की जरूरत क्यों?
रेगुलर फंड सिर्फ निवेश का माध्यम नहीं, बल्कि मार्गदर्शन भी देते। एक अच्छा सलाहकार आपकी जरूरत के हिसाब से सही फंड चुनने में मदद करता है, बाजार में गिरावट के समय घबराहट से बचाता है और आपको अनुशासन में रखता है। खासकर नए निवेशकों या उन लोगों के लिए, जो बाजार को लेकर आत्मविश्वास नहीं रखते, यह मदद काफी अहम हो सकती है।
फैसला आपकी समझ और व्यवहार पर निर्भर
अगर आप खुद रिसर्च कर सकते, बाजार के उतार-चढ़ाव को समझते और लंबे समय तक निवेश बनाए रख सकते हैं, तो डायरेक्ट फंड आपके लिए बेहतर विकल्प हो सकते हैं। इससे लागत बचेगी और रिटर्न थोड़ा बेहतर मिलेगा, लेकिन अगर आपको मार्गदर्शन की जरूरत है, या बाजार गिरने पर घबराने की संभावना रहती है, तो रेगुलर फंड ज्यादा सुरक्षित विकल्प हो सकत। कई बार गलत समय पर निवेश निकालना या बार-बार फंड बदलना, अतिरिक्त फीस से कहीं ज्यादा नुकसान कर देता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि निवेश में सफलता सिर्फ सही फंड चुनने से नहीं, बल्कि सही व्यवहार से भी तय होती है। अगर आप हर गिरावट में घबरा जाते हैं या हाल के रिटर्न देखकर फैसले लेते हैं, तो डायरेक्ट फंड का फायदा भी कम हो सकता है।
डायरेक्ट फंड सस्ते हैं और लंबे समय में बेहतर रिटर्न दे सकते हैं, जबकि रेगुलर फंड थोड़े महंगे होते हैं लेकिन मार्गदर्शन का फायदा देते हैं। सही विकल्प वही है जिसे आप बिना तनाव के लंबे समय तक जारी रख सकें।
(प्रियंका कुमारी)
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