साउथ कोरिया की शिप में धमाके के बाद आग, सोल बोला- जांच जारी, ट्रंप के दावे पर भी पूरा ध्यान
सोल, 5 मई (आईएएनएस)। होर्मुज जलडमरूमध्य में दक्षिण कोरिया के एक मालवाहक जहाज में धमाके के बाद आग लगने की घटना सामने आई है। इस घटना को लेकर शुरुआती स्तर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आई हैं, जबकि वास्तविक कारण का पता लगाने के लिए जांच जारी है।
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि यह हमला ईरान की ओर से किया गया है। उन्होंने कहा कि समुद्री मार्गों पर चलने वाले जहाजों की सुरक्षा और उनकी स्वतंत्र आवाजाही अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत सुनिश्चित की जानी चाहिए।
समाचार एजेंसी योनहाप ने दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रालय के हवाले से बताया कि आग लगने के कारणों का अभी पता नहीं चला है और जांच पूरी होने के बाद ही सच्चाई सामने आएगी। राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से भी कहा गया कि इस घटना को गंभीरता से लिया जा रहा है और सभी संभावित पहलुओं की जांच की जा रही है।
यह जहाज दक्षिण कोरियाई शिपिंग कंपनी एचएमएम का बल्क कैरियर “एचएमएम नामू” है, जो संयुक्त अरब अमीरात के पानी में लंगर डाले हुए था। सोमवार रात करीब 8:40 बजे (कोरियाई समय) जहाज के इंजन रूम में धमाके के बाद आग लग गई। क्रू मेंबर्स ने लगभग चार घंटे तक कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग कर आग पर काबू पाया।
कंपनी के अनुसार, जहाज पर कुल 24 क्रू सदस्य सवार थे, जिनमें छह दक्षिण कोरियाई और 18 विदेशी नागरिक शामिल थे। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी के घायल होने की खबर नहीं है।
दक्षिण कोरियाई सरकार ने बताया कि जहाज को एक टगबोट की मदद से नजदीकी बंदरगाह तक ले जाया जाएगा, जहां कोरिया मैरीटाइम सेफ्टी ट्रिब्यूनल और नेशनल फायर एजेंसी के जांचकर्ता विस्तृत जांच करेंगे।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि यह हादसा किसी बाहरी हमले का परिणाम है या तकनीकी खराबी के कारण हुआ। कंपनी ने कहा है कि इंजन रूम की जांच के बाद ही नुकसान और कारणों का सही आकलन हो सकेगा।
इस बीच, दक्षिण कोरिया अमेरिका, ईरान और खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के सदस्य देशों — जैसे सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात — के साथ जरूरी सूचनाएं साझा कर रहा है।
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका ने “प्रोजेक्ट फ्रीडम” नामक एक अभियान शुरू किया है, जिसका उद्देश्य क्षेत्र में फंसे वाणिज्यिक जहाजों को सुरक्षित निकालना है। दक्षिण कोरिया इस प्रस्ताव की समीक्षा कर रहा है और क्षेत्रीय सुरक्षा तथा अपने घरेलू कानूनी ढांचे को ध्यान में रखते हुए आगे का निर्णय लेगा।
सरकार ने यह भी कहा कि वह वैश्विक समुद्री लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को स्थिर और सामान्य बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में सक्रिय रूप से भाग ले रही है।
--आईएएनएस
केआर/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
नवजात शिशु को नहलाते समय न करें ये गलतियां, जानिए सही तरीका
नई दिल्ली, 5 मई (आईएएनएस)। नवजात शिशु की देखभाल अपने आप में बहुत नाजुक और जिम्मेदारी का काम होता है। ऐसे बच्चे का शरीर पूरी तरह विकसित नहीं होता, उनकी त्वचा बहुत कोमल होती है और इम्यूनिटी भी कमजोर होती है। इसलिए उन्हें नहलाते समय थोड़ी सी भी गलती उनके लिए परेशानी बन सकती है।
प्रीमैच्योर बच्चे के लिए पानी हमेशा हल्का गुनगुना होना चाहिए। ज्यादा गर्म पानी से त्वचा जल सकती है और ज्यादा ठंडे पानी से बच्चे को सर्दी-जुकाम का खतरा हो सकता है।
दूसरी गलती होती है बच्चे को ज्यादा देर तक पानी में रखना। ऐसे बच्चों को बहुत देर तक नहलाना ठीक नहीं होता। उनका स्नान बहुत ही जल्दी और धीरे-धीरे होना चाहिए, ताकि उन्हें ठंड न लगे और वे आरामदायक महसूस करें।
तीसरी गलती यह है कि लोग जल्दी-जल्दी या जोर से बच्चे को रगड़ देते हैं। प्रीमैच्योर बच्चे की त्वचा बहुत नाजुक होती है, इसलिए उसे हमेशा बहुत हल्के हाथों से साफ करना चाहिए। रगड़ने से उनकी त्वचा पर लालपन या जलन हो सकती है।
एक और आम गलती है गलत साबुन या केमिकल वाले प्रोडक्ट का इस्तेमाल। ऐसे बच्चों के लिए मजबूत खुशबू वाले साबुन या बॉडी वॉश नुकसानदायक हो सकते हैं। बेहतर है कि डॉक्टर की सलाह से ही कोई हल्का और सुरक्षित क्लीनिंग एजेंट इस्तेमाल किया जाए या फिर सिर्फ पानी और मुलायम कपड़े से सफाई की जाए।
इसके अलावा, कई लोग बच्चे को नहलाते समय कमरे के तापमान का ध्यान नहीं रखते। ठंडी हवा या एसी वाले कमरे में नहलाने से बच्चा जल्दी ठंड से प्रभावित हो सकता है। इसलिए हमेशा ऐसा कमरा चुनें जहां तापमान सामान्य और आरामदायक हो।
सबसे जरूरी बात यह है कि प्रीमैच्योर बच्चे को हर दिन सीधे नहलाना हमेशा जरूरी नहीं होता। कई बार डॉक्टर ऐसे बच्चों को स्पंजिंग यानी हल्के गीले कपड़े से साफ करने की सलाह देते हैं। इससे बच्चा साफ भी रहता है और उसे ठंड लगने या शरीर का तापमान गिरने का खतरा भी नहीं रहता।
--आईएएनएस
पीआईएम/एबीएम
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