सूर्यदेव के मेष राशि में प्रवेश करने पर बैसाखी मनाई जाती है। इसे मेष संक्रांति और वैशाख संक्रांति के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन सूर्य देवता की स्तुति और दान का खास महत्व होता है। वहीं किसान बैसाखी फसलों की कटाई की खुशी में मनाते हैं। पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि बैसाखी के त्योहार तक रबी की फसल पककर तैयार हो जाती है। ऐसे में किसान फसलों कि कटाई की खुशी में बैसाखी धूमधाम से मनाते हैं। वहीं, इस दिन सूर्य मेष राशि में प्रवेश करते हैं जिसके चलते यह दिन सूर्यदेव की स्तुति करने के लिए बेहद विशेष माना जाता है। बैसाखी को वैशाख संक्रांति और मेष संक्रांति के नाम से भी जाना जाता है। सूर्य देवता को ग्रहों का राजा बताया गया है। ऐसे में जब वो अपनी राशि बदलते हैं, तो इसका प्रभाव हर किसी पर देखने को मिलता है। यही कारण है कि बैसाखी को नया साल भी माना जाता है।
ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि इसे फसल का पर्व भी माना जाता है और ऐसा कहा जाता है कि जब फसल पककर तैयार हो जाती है तब ख़ुशी मनाने के रूप में बैसाखी मनाई जाती है। मुख्य रूप से यह पर्व पंजाब और हरियाणा में मनाया जाता है। इस दौरान एक खास रबी की फसल पककर तैयार होती है और उसी की खुशी मनाने के लिए लोग बैसाखी में नाचते, गाते हैं और खुशियां मनाते हैं। अगर हम सूर्य पंचांग की बात करें तो बैसाखी को सिख नववर्ष के रूप में भी मनाया जाता है। बैसाखी सिख समुदाय का सबसे महत्वपूर्ण त्योहार माना जाता है। इसका धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व भी बहुत ज्यादा है। यह दिन आने वाले साल के लिए नए मौसम और नई शुरुआत का प्रतीक होता है। इस दिन लोग एक साथ इकठ्ठा होते हैं और अच्छी फसल के साथ अच्छी फसल की कामना करते हुए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं।
ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि बैसाखी का पर्व नए सौर वर्ष की शुरुआत के रूप में मनाया जाता है। हर साल 13 या 14 अप्रैल को सूर्य मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करता है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार इस दिन को मेष संक्रांति कहा जाता है। इसी दिन बैसाखी का त्योहार भी मनाया जाता है। इस साल 14 अप्रैल को सूर्य मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करेंगे और इसी दिन सिखों का पर्व बैसाखी भी मनाया जाएगा।
बैसाखी 2026
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि पंचांग के अनुसार इस साल बैसाखी का त्योहार 14 अप्रैल, मंगलवार के दिन मनाया जाएगा। इस दिन वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि लग रही है। 14 अप्रैल को सुबह 9:31 मिनट पर सूर्यदेव मेष राशि में प्रवेश करेंगे। ऐसे में बैसाखी का त्योहार 14 तारीख को ही मनाया जाएगा। इस दिन पुण्य काल की तिथि सूर्योदय से लेकर शाम को 3 बजकर 55 मिनट तक रहेगी।
बैसाखी, मेष संक्रांति- मंगलवार 14 अप्रैल
सूर्य गोचर मेष राशि में- 14 अप्रैल को सुबह 9:31 मिनट पर।
मेष संक्रांति का प्रभाव
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि वारानुसार और नक्षत्रानुसार यह महोदरी नामक संक्रांति होगी। ऐसे में सोना और चांदी की कीमतें बढ़ती हुई देखने को मिल सकती हैं। साथ ही, मंगलवारी संक्रांति होने के चलते तेल, घी, वनस्पति और दैनिक उपयोग की वस्तुएं भी महंगी होने की आशंका है। इसके चलते सामान्य लोगों की परेशानियों में वृद्धि हो सकती है। इसके अलावा, कुछ राज्यों में राजनीति के क्षेत्र में उठा-पटक देखी जा सकती है।
वैशाख संक्रांति का महत्व
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि इस दिन सूर्य देवता की पूजा की जाती है। साथ ही, किसान फसलों की कटाई की खुशी में बैसाखी का त्योहार मनाते हैं। वैशाख संक्रांति पर स्नान-दान का भी खास महत्व होता है। मान्यता है कि इससे शुभ फल प्राप्त होता है। सूर्य देवता को ज्योतिषशास्त्र में ग्रहों का राजा माना गया है। ऐसे में सूर्य के राशि परिवर्तन करने से इसका प्रभाव सभी पर देखने को मिलता है। बैसाखी को इसीलिए नए साल के रूप में भी मनाया जाता है। किसान मकर संक्रांति से फसलों की कटाई शुरू कर देते हैं। इस दिन सूर्य देव की पूजा करना बहुत शुभ फलदायी माना जाता है। इस दिन दिवाली के प्रकार ही लोग अपने घर की सफाई करते हैं और आंगन में रंगोली बनाते हैं। बैसाखी के त्योहार पर कई प्रकार के पकवान भी बनाए जाते हैं और सिख समुदाय के लोग सुबह के समय गुरुद्वारे जाते हैं। इस दिन कई स्थानों पर मेला भी लगता है और अपने घरों को लाइटों से सजा दिया जाता है।
- डा. अनीष व्यास
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक
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हिंदू धर्म में गंगा सप्तमी तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन मां गंगा का धरती पर अवतरण हुआ था। वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि गंगा जयंती मनाई जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन गंगा स्नान और दान करने से व्यक्ति के सात जन्मों के पाप धुल जाते हैं। इस बार गंगा सप्तमी 23 अप्रैल 2026, गुरुवार को मनाई जाएगी।
आपको बता दें कि, गंगा सप्तमी के दिन केवल स्नान ही काफी नहीं है, इस दिन कुछ विशेष पवित्र चीजों को अपने घर लेकर आना, बेहद शुभ माना जाता है। इससे मां गंगा प्रसन्न होती है और इसके साथ ही महादेव की कृपा बनीं रहती है। आइए आपको बताते हैं कि वे कौन सी चीजें है, जो घर पर लाने से आपका सोया हुआ भाग्य जाग जाएगा।
चांदी या तांबे के पात्र में गंगाजल
गंगा सप्तमी के अवसर पर सबसे शुभ माना जाता है कि आप पवित्र गंगाजल को अपने घर लाएं। यदि यह संभव न हो, तो पहले से उपलब्ध गंगाजल को तांबे या चांदी के स्वच्छ पात्र में भरकर घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में स्थापित करें। ऐसा करने से घर की नकारात्मकता दूर होती है और सुख-शांति व समृद्धि का आगमन होता है।
दक्षिणवर्ती शंख
धार्मिक मान्यता के अनुसार, शंख को साक्षात मां लक्ष्मी का भाई माना जाता है। इसलिए गंगा सप्तमी के दिन दक्षिणवर्ती शंख खरीदकर घर लेकर आना और उसे पूजा के स्थान पर स्थापित करना बहुत शुभ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि जिस घर में शंख की ध्वनि होती है और इसकी पूजा होती है, वहां दरिद्रता कभी कदम नहीं रखती है।
कमल या हाथी की प्रतिमा
गंगा सप्तमी के दिन कमल का फूल और चांदी का हाथी पर जरुर लाएं। मां गंगा को कमल का फूल अधिक प्रिय है और हाथी को ऐश्वर्य का प्रतीक माना जाता है। ऐसा करने से करियर और व्यापार में सफलता मिलती है। इसके साथ ही सौभाग्य के द्वार भी खुल जाते है। आप चाहे तो किसी और धाकु की प्रतिमा का हाथी ले सकते हैं।
रुद्राक्ष
मान्यता है कि मां गंगा भगवान शिव की जटाओं में निवास करती हैं, इसलिए गंगा सप्तमी के दिन रुद्राक्ष को घर लाना, धारण करना या पूजास्थल में स्थापित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। ऐसा करने से मन का तनाव घटता है और व्यक्ति को आंतरिक शांति का अनुभव होता है।
गंगा सप्तमी पूजा मंत्र
- ॐ गंगे नमः॥
- गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती।
नर्मदे सिन्धु कावेरी जलस्मिन् सन्निधिं कुरु॥
- नमो गंगायै विश्वरूपिण्यै नारायण्यै नमो नमः॥
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