दिल्ली एक वैश्विक पर्यटन स्थल के रूप में उभरेगी: मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता
नई दिल्ली, 2 मई (आईएएनएस)। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शनिवार को राष्ट्रीय राजधानी को महज पारगमन स्थल के रूप में देखे जाने से आगे बढ़कर एक प्रमुख वैश्विक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के अपने दृष्टिकोण को साझा किया।
पर्यटन हितधारकों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि अब समय आ गया है कि हम दिल्ली को केवल एक पड़ाव के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे गंतव्य शहर के रूप में स्थापित करें जहां पर्यटक अधिक समय तक ठहरें, अनुभवों में डूब जाएं, और बार-बार वापस आएं।
इस कार्यक्रम में उन्होंने पर्यटन और आतिथ्य से लेकर विरासत, आध्यात्मिक, डिजिटल, चिकित्सा और स्वास्थ्य पर्यटन, साथ ही रात्रि पर्यटन जैसे विभिन्न मुद्दों पर हितधारकों के साथ बातचीत की और दिल्ली की ब्रांड स्थिति पर चर्चा की।
इस सम्मेलन में दिल्ली के कला, संस्कृति और पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा, दिल्ली पर्यटन एवं परिवहन विकास निगम (डीटीटीडीसी) के प्रबंध निदेशक और पर्यटन एवं संबद्ध क्षेत्रों के कई विशेषज्ञ उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री गुप्ता ने कहा कि उद्योग जगत के हितधारकों, नीति निर्माताओं और संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों की सक्रिय भागीदारी से कई ठोस और व्यावहारिक सुझाव प्राप्त हुए हैं।
उन्होंने कहा कि इन सुझावों और प्रतिक्रियाओं को आगामी नीतियों और योजनाओं में शामिल किया जाएगा ताकि दिल्ली के पर्यटन क्षेत्र को एक नई दिशा दी जा सके और इसे अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
राष्ट्रीय राजधानी के रूप में दिल्ली के वैश्विक महत्व को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि शहर में भारत आने वाले अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण बनने की क्षमता है।
शहर की पर्यटन संबंधी खूबियों पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने संसद भवन, राष्ट्रपति भवन, इंडिया गेट और प्रधानमंत्री संग्रहालय जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं के साथ-साथ लाल किला और कुतुब मीनार जैसी समृद्ध ऐतिहासिक विरासत का उल्लेख किया।
उन्होंने दिल्ली की विविध संस्कृति और खान-पान पर भी बल दिया, जो मिलकर एक संपूर्ण और अनूठा पर्यटन अनुभव प्रदान करते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार दिल्ली की सकारात्मक छवि बनाने पर विशेष जोर दे रही है, जिसका उद्देश्य इसे न केवल एक पर्यटन केंद्र के रूप में, बल्कि चिकित्सा और शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्टता के केंद्र के रूप में विकसित करना है।
--आईएएनएस
एमएस/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
लोम्बोक स्ट्रेट में चीनी पनडुब्बी ड्रोन की गतिविधियों से सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता: रिपोर्ट
नेपीडॉ, 2 मई (आईएएनएस)। चीन की हाल की पनडुब्बी ड्रोन गतिविधियां इंडोनेशिया के लोम्बोक स्ट्रेट में सिर्फ एक तकनीकी जिज्ञासा नहीं हैं, बल्कि यह छिपी हुई महत्वाकांक्षा का संकेत हैं।
एक रिपोर्ट के अनुसार, चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) की लगातार निगरानी और नियंत्रण बढ़ाने की कोशिशें इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को अस्थिर कर सकती हैं, जिससे पड़ोसी देशों के बीच भरोसा कम होगा और रणनीतिक समुद्री इलाकों में तनाव बढ़ सकता है।
म्यांमार के मीडिया आउटलेट ‘मिजिमा न्यूज’ के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इन गतिविधियों को सोची-समझी चाल के रूप में देखना चाहिए, जिसका मकसद प्रभाव बढ़ाना है, वो भी संप्रभुता, भरोसे और शांति की कीमत पर।
रिपोर्ट में कहा गया है कि लोम्बोक स्ट्रेट में चीन का अंडरवॉटर ड्रोन मिलना या पकड़ा जाना कोई अकेली घटना नहीं है, बल्कि यह समुद्र के नीचे चल रही गुप्त निगरानी की एक बड़ी श्रृंखला का हिस्सा है।
लोम्बोक स्ट्रेट प्रशांत महासागर और हिंद महासागर को जोड़ने वाले कुछ गहरे समुद्री रास्तों में से एक है। यह जहाजों के व्यापार और पनडुब्बी संचालन के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे संवेदनशील इलाके में अंडरवॉटर ड्रोन भेजकर चीन यह संकेत दे रहा है कि वह समुद्री रास्तों की निगरानी, नक्शा तैयार करने और जरूरत पड़ने पर उन पर नियंत्रण तक की क्षमता और इरादा रखता है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चीनी सरकार एक बहु-स्तरीय रणनीति के तहत अपना दबदबा बढ़ाने की कोशिश कर रही है। इन ड्रोन का मकसद समुद्री जानकारी इकट्ठा करना है, जैसे समुद्र की गहराई का डेटा, नौसेना की गतिविधियों पर नजर रखना और पड़ोसी देशों की रक्षा कमजोरियों को समझना।
रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसे गुप्त तरीके से दूसरे देशों के समुद्री क्षेत्र में निगरानी करना अंतरराष्ट्रीय नियमों और संप्रभुता का उल्लंघन है। इसे रक्षात्मक नहीं बल्कि आक्रामक कदम बताया गया है, जिसका उद्देश्य बिना खुले टकराव के डर और दबाव बनाना है।
यह भी आरोप लगाया गया है कि चीन कई बार इन गतिविधियों से इनकार करता है, भले ही कुछ मामलों में इसके संबंध राज्य-स्वामित्व वाली कंपनियों से जुड़े पाए जाते हैं, जैसे चाइना शिपबिल्डिंग इंडस्ट्री कॉर्पोरेशन। इससे भरोसा और भी कमजोर होता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि यह एक बड़ी रणनीति का हिस्सा है, जहां चीन चुपचाप अपनी पकड़ मजबूत करता है और बाद में कूटनीतिक विरोधों को पीछे छोड़ देता है। चाहे दक्षिण चीन सागर में कृत्रिम द्वीप बनाना हो या इंडोनेशिया के जलक्षेत्र में ड्रोन भेजना, यह तरीका पहले हकीकत बना लेने और फिर बातचीत होने देने जैसा है।
--आईएएनएस
एवाई/डीकेपी
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