दक्षिण गुजरात आर्थिक छलांग के लिए तैयार: जेपी नड्डा
सूरत, 2 मई (आईएएनएस)। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने शनिवार को कहा कि दक्षिण गुजरात का विनिर्माण केंद्र के रूप में उभरना राज्य की व्यापक आर्थिक शक्ति और चुनौतियों को अवसरों में बदलने की क्षमता को दर्शाता है।
वे सूरत के ऑरो विश्वविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस (वीजीआरसी) के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन ने आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र के लिए एक बड़ी आर्थिक छलांग लगाने की नींव रखी है।
क्षेत्रीय शक्तियों पर प्रकाश डालते हुए नड्डा ने कहा कि सूरत के हीरा और वस्त्र उद्योग, साथ ही भरूच, दहेज और अंकलेश्वर के रसायन और उर्वरक क्लस्टर वैश्विक केंद्रों के रूप में विकसित हुए हैं।
उन्होंने कहा कि वस्त्र उद्योग अब आदिवासी क्षेत्रों से जुड़ रहा है, जिससे स्थानीय समुदायों के लिए विकास के नए द्वार खुलेंगे और यह क्षेत्र और राज्य दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
गुजरात के आर्थिक प्रदर्शन की प्रशंसा करते हुए नड्डा ने कहा कि राज्य भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में लगभग 8 प्रतिशत, विनिर्माण उत्पादन में 17 प्रतिशत, माल निर्यात में 27 प्रतिशत और कुल माल ढुलाई में 40 प्रतिशत का योगदान देता है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, गुजरात एक वैश्विक स्तर पर जुड़ा हुआ और प्रतिस्पर्धी आर्थिक इंजन के रूप में विकसित हुआ है।
नीतिगत बदलावों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि 2003 से पहले उद्योगपतियों और सरकार के बीच एक खाई थी, लेकिन तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई वाइब्रेंट गुजरात पहल ने संवाद और सहयोग की संस्कृति को जन्म दिया।
उन्होंने कहा कि यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए एक उदाहरण बन गया है, और ऐसे प्रयासों ने भारत को वैश्विक स्तर पर निवेश के लिए सबसे भरोसेमंद गंतव्यों में से एक के रूप में उभरने में मदद की है।
वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच विनिर्माण क्षमता को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए नड्डा ने कहा कि गुजरात ने स्टैच्यू ऑफ यूनिटी, गिफ्ट सिटी और हाई-स्पीड रेल जैसी परियोजनाओं के माध्यम से यह दिखाया है कि कैसे विपरीत परिस्थितियों को अवसर में बदला जा सकता है।
--आईएएनएस
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Assam VIP Seat: हिमंत बिस्व सरमा सहित प्रदेश में और कितने बड़े चेहरे? किस पार्टी ने झोंकी कितनी ताकत? जानिए
Assam VIP Seat: असम की राजनीति के लिए 4 अप्रैल का दिन बेहद महत्वपूर्ण होने वाला है. इस दिन ही फैसला होगा कि प्रदेश की कमान किसे मिलेगी. राज्य की 126 विधानसभा सीटों पर मतदान हो चुके हैं. इस चुनाव में कुल 722 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें कई दिग्गज चेहरों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है. इस चुनावी रण में सबसे बड़ा चेहरा मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा हैं. सरमा अपनी पारंपरिक सीट जालुकबाड़ी से चुनाव लड़ रहे हैं.
हिमंत बिस्व सरमा के खिलाफ कौन?
दिलचस्प बात यह है कि इस सीट पर उनके खिलाफ दो महिलाएं चुनाव लड़ रही हैं. कांग्रेस ने यहां से बिदिशा नियोग को मैदान में उतारा है, जबकि दीपिका दास निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर ताल ठोक रही हैं. वहीं दूसरी ओर, कांग्रेस के कद्दावर नेता गौरव गोगोई जोरहाट सीट से अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. गौरव गोगोई वर्तमान में सांसद हैं, लेकिन पार्टी ने उन्हें विधानसभा चुनाव में उतारकर मुकाबले को रोचक बना दिया है. जोरहाट में उनका मुकाबला भाजपा के हितेंद्र नाथ गोस्वामी से है.
गठबंधन और राजनीतिक समीकरण
इस बार का चुनाव मुख्य रूप से दो बड़े गुटों के बीच सिमटा हुआ है. एक तरफ सत्ताधारी भाजपा गठबंधन है, जिसमें असम गण परिषद और यूपीपीएल जैसे दल शामिल हैं. दूसरी तरफ कांग्रेस के नेतृत्व वाला विपक्षी गठबंधन 'असम सम्मिलित मोर्चा' है. बदरुद्दीन अजमल की पार्टी एआईयूडीएफ भी अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में है. अजमल इस बार बिन्नाकांडी सीट से चुनावी मैदान में हैं. उनके खिलाफ भाजपा ने यह सीट अपने सहयोगी दल एजीपी के लिए छोड़ी है. इसके अलावा सिबसागर सीट से अखिल गोगोई और खोवांग सीट से लुरिनज्योति गोगोई भी विपक्षी गठबंधन की ताकत बढ़ा रहे हैं.
किस पार्टी ने झोंकी कितनी ताकत?
उम्मीदवारों की संख्या के मामले में कांग्रेस सबसे आगे खड़ी दिखाई दे रही है. कांग्रेस ने 99 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे हैं, जबकि भाजपा 90 सीटों पर चुनाव लड़ रही है. अन्य दलों की बात करें तो एआईयूडीएफ 30, एजीपी 26 और बीपीएफ 11 सीटों पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं. आम आदमी पार्टी ने भी 18 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए हैं. इनके अलावा 258 निर्दलीय उम्मीदवार भी मैदान में हैं, जो कई सीटों पर बड़े उलटफेर करने की क्षमता रखते हैं. छोटे दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों की सक्रियता ने कई सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला बना दिया है.
परिसीमन के बाद पहला बड़ा चुनाव
यह चुनाव इसलिए भी खास है क्योंकि 2023 में हुए परिसीमन के बाद कई विधानसभा क्षेत्रों की सीमाएं और नाम बदल गए हैं. जैसे खोवांग विधानसभा सीट, जो पहले मोरन के नाम से जानी जाती थी. परिसीमन के बाद बदले हुए समीकरणों में यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता किस पर भरोसा जताती है. राज्य के विभिन्न हिस्सों से मिल रही खबरों के अनुसार, विकास, पहचान और स्थानीय मुद्दे इस चुनाव में हावी नजर आ रहे हैं. सरकार और विपक्ष दोनों ही अपनी-अपनी जीत के दावे कर रहे हैं, लेकिन अंतिम फैसला जनता के हाथों में है.
असम का सियासी समीकरण क्या कहता है?
असम की सत्ता पर काबिज होने के लिए बहुमत का आंकड़ा 64 है. सत्तारूढ़ बीजेपी ने इस बार भी अपनी पकड़ मजबूत रखने के लिए एनडीए के साथियों के साथ मिलकर चुनाव लड़ा है. वहीं, कांग्रेस ने राज्य में छह दलों का एक मजबूत मोर्चा तैयार किया था ताकि विपक्षी वोटों का बंटवारा रोका जा सके. अब 4 मई को यह साफ हो जाएगा कि जनता ने बीजेपी के विकास के दावों पर मुहर लगाई है या कांग्रेस के बदलाव के वादे पर. फिलहाल, गुवाहाटी के होटलों में बढ़ती हलचल यह बता रही है कि असम की राजनीति में आने वाले कुछ दिन काफी गहमागहमी भरे रहने वाले हैं.
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