'हम बचपन से रहे, अब बहुत अकेलापन होता है महसूस', उषा मंगेशकर बहन आशा भोसले को यादकर हुईं इमोशनल
Usha Mangeshkar gets emotional after remembering sister Asha Bhosle: लीजेंडरी सिंगर आशा भोसले (Asha Bhosle) के निधन को आज पूरे 20 दिन हो गए हैं. पिछले महीने 12 अप्रैल को मुंबई में उनका 92 साल की उम्र में बीमारी के चलते निधन हो गया था. इस खबर ने देश-दुनिया झकझोर दिया था थे क्योंकि इतनी बड़ी गायिका का जाना किसी नुकसान से कम नहीं है. आशा भोसले के जाने के बाद उनके परिवार में एक खालीपन और अकेलापन का सन्नाटा छा गया है. उनके जाने का गम अभी भी परिवार भुला नहीं पाया है. इस पर सिंगर की छोटी बहन उषा मंगेशकर (Usha Mangeshkar) ने अपने दिल के दर्द को शेयर किया है.
उषा मंगेशकर ने अपनी बड़ी बहन आशा भोसले को याद करते हुए जो बातें कहीं, उसने हर किसी को भावुक कर दिया. उनके शब्दों में एक ऐसा खालीपन झलकता है, जिसे सिर्फ वही समझ सकता है जिसने अपने सबसे करीब के इंसान को खोया हो या उससे दूर हुआ हो.
उषा मंगेशकर ने शेयर किया अपना दर्द
एक इंटरव्यू के दौरान ऊषा मंगेशकर ने अपनी भावनाओं को खुलकर शेयर किया. उन्होंने कहा, 'मेरी बड़ी बहन गुजर गईं. पिछले आठ सालों में मैंने अपनी दो बड़ी बहनों को खो दिया है. यह मेरे लिए बहुत बड़ा झटका है और पूरे इंडिया के लिए भी, क्योंकि उन्होंने एक महान गायिका को खो दिया.' उनके इस बयान ने लोगों को भावुक कर दिया है.
बचपन की यादें आज भी देती हैं सहारा
उषा ने अपनी बहन के साथ बिताए पलों को याद करते हुए कहा, 'मेरे साथ बहुत सारी यादें हैं. हम बचपन से साथ थे. अब घर पर बहुत लोनलीनेस और उदासी महसूस होती है.' उनके ये साफ बताते हैं कि उनके लिए यह सिर्फ बहन को खोने का दर्द नहीं बल्कि जिंदगी का बड़ा हिस्सा था. उनके बचपन से लेकर करियर तक, हर मोड़ पर साथ रहने वाली बहन की कमी आज उनकी लाइफ में एक खालीपन छोड़ गई है.
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दुख के बीच खुद को संभालने की कोशिश
वहीं, आशा के जाने के बाद परिवार खुद को संभालने की कोशिश कर रहा है. उन्होंने बताया कि वह घर में बंद रहकर दुख को ज्यादा बढ़ाना नहीं चाहतीं. इसलिए उन्होंने तय किया कि वह बाहर जाकर लोगों से मिलेंगी और अपने मन को थोड़ा हल्का करेंगी. यह दिखाता है कि वह अपने दर्द से भाग नहीं रहीं, बल्कि उसे एक्सेप्ट कर आगे बढ़ने की कोशिश कर रही हैं.
फैंस भी हुए भावुक यादकर
सोशल मीडिया पर जैसे ही यह इंटरव्यू सामने आया, फैंस भी भावुक हो गए. कई लोगों ने मंगेशकर परिवार के योगदान को याद किया और ऊषा मंगेशकर के हौसले की तारीफ की. कई लोगों का कहना है कि इस फैमिली ने इंडियन म्यूजिक को जो दिया है, वह कभी भुलाया नहीं जा सकता. ऐसे में उनकी भावनाएं हर किसी के दिल को छू रही हैं.
कुल मिलाकर उषा मंगेशकर का यह बयान सिर्फ एक बहन की याद नहीं है, बल्कि उन अटूट रिश्तों की स्टोरी है जो समय के साथ और भी गहरे हो जाते हैं. उनके शब्द यह बताते हैं कि भले ही वक्त आगे बढ़ जाता है, लेकिन अपने लोगों की कमी हमेशा दिल में बनी रहती है.
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भारत का मेडिकल टूरिज्म बाजार 2030 तक दोगुना होकर 16.2 अरब तक पहुंचने की उम्मीद: सरकार
नई दिल्ली, 2 मई (आईएएनएस)। सरकार ने शनिवार को कहा कि भारत मेडिकल वैल्यू ट्रैवल (एमवीटी) यानी मेडिकल टूरिज्म का एक बड़ा केंद्र बनकर उभर रहा है, और मेडिकल टूरिज्म बाजार 2025 में लगभग 8.7 अरब डॉलर से बढ़कर 2030 तक करीब 16.2 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
वैश्विक स्तर पर एमवीटी बाजार 2022 में करीब 115.6 अरब डॉलर का था, जो 2030 तक लगभग 286.1 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जिसमें सालाना करीब 10.8 प्रतिशत की वृद्धि दर (सीएजीआर) रहने की संभावना है।
एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि दुनिया भर में बढ़ती स्वास्थ्य सेवाओं की लागत, लंबा इंतजार और लाइफस्टाइल बीमारियों के बढ़ते बोझ के कारण लोग इलाज के लिए विदेशों का रुख कर रहे हैं।
भारत में एमवीटी (मैच्योर व्हीकल थेरेपी) का उदय आयुष जैसी पारंपरिक स्वास्थ्य प्रणालियों के साथ उन्नत चिकित्सा अवसंरचना के एकीकरण से प्रेरित है। इसके अलावा मजबूत नीतिगत समर्थन, डिजिटल सुविधाओं और आयुष वीजा व क्षेत्रीय चिकित्सा केंद्रों जैसी पहल से इस सेक्टर को मजबूती मिल रही है।
भारत का एमवीटी सिस्टम दो हिस्सों में काम करता है—एक, गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए मेडिकल टूरिज्म और दूसरा, योग और आयुर्वेद जैसी आयुष पद्धतियों पर आधारित वेलनेस टूरिज्म।
यह दोनों मिलकर उन्नत इलाज और बढ़ती रोकथाम (प्रिवेंटिव हेल्थकेयर) की जरूरतों को पूरा करते हैं।
2025 में भारत में 9.15 मिलियन विदेशी पर्यटक आए, जिनमें से 5,07,244 लोग इलाज के लिए आए थे। यानी कुल विदेशी पर्यटकों में मेडिकल टूरिज्म की हिस्सेदारी लगभग 5.5 प्रतिशत रही।
वर्ष 2025 में मेडिकल टूरिज्म के लिए भारत आने वाले प्रमुख देशों में बांग्लादेश (325,127), इराक (30,989), उज्बेकिस्तान (13,699), सोमालिया (11,506), तुर्कमेनिस्तान (10,231), ओमान (9738) और केन्या (9,357) शामिल रहे।
मेडिकल टूरिज्म इंडेक्स 2020-21 के अनुसार, भारत दुनिया के 46 प्रमुख मेडिकल टूरिज्म देशों में 10वें स्थान पर रहा, जबकि एशिया-प्रशांत क्षेत्र के टॉप 10 वेलनेस डेस्टिनेशन में पांचवें स्थान पर है।
भारत की स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत गुणवत्ता मानकों और अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त प्रमाणन प्रणाली से समर्थित हैं। देश भर के अस्पताल और स्वास्थ्य सेवा प्रदाता राष्ट्रीय अस्पताल और स्वास्थ्य सेवा प्रदाता प्रत्यायन बोर्ड (एनएबीएच) से मान्यता प्राप्त करते हैं, जो मरीजों की सुरक्षा और इलाज की गुणवत्ता सुनिश्चित करता है।
आगे की योजना के तहत, सरकार ने बजट 2026-27 में पांच रीजनल मेडिकल हब बनाने का प्रस्ताव रखा है। इन हब में मेडिकल, शिक्षा और रिसर्च सुविधाएं होंगी, साथ ही आयुष सेंटर और एमवीटी सुविधा केंद्र भी शामिल होंगे।
--आईएएनएस
डीबीपी
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