Manipur के Kangpokpi जिले में उपद्रवियों ने जलाए घर, छात्र संगठन ने जताया विरोध
मणिपुर के कांगपोकपी जिले में सोमवार दोपहर हथियारबंद बदमाशों ने कुछ घरों को आग लगा दी। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कुकी बहुल जिले में हुई इस घटना से जुड़ीं परिस्थितियों का पता नहीं चल पाया है।
उन्होंने कहा कि नुकसान कितना हुआ है, इसकी जानकारी अभी नहीं मिली है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा बल इलाके में पहुंच गए हैं। इस बीच, कांगपोकपी जिला कुकी छात्र संगठन सदर हिल्स ने हथियारबंद समूहों द्वारा आम लोगों के घर जलाए जाने की कड़ी निंदा की।
छात्र संगठन ने एक बयान में कहा, यह कृत्य शांति को नुकसान पहुंचाने और निर्दोष ग्रामीणों में डर फैलाने का प्रत्यक्ष प्रयास है। संगठन ने कानून प्रवर्तन एजेंसियों से दोषियों को गिरफ्तार करने की अपील की। मणिपुर में जातीय हिंसा में 3 मई 2023 से अब तक 200 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं, सैकड़ों अन्य घायल हुए हैं और हजारों लोग विस्थापित हुए हैं।
लगातार जातीय हिंसा और मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद राज्य में 13 फरवरी, 2025 को राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया था। करीब एक साल बाद चार फरवरी को इसे हटा दिया गया।
TGCSB ने Delhi में फर्जी कॉल सेंटर नेटवर्क का पर्दाफाश कर 22 को गिरफ्तार किया
तेलंगाना साइबर सुरक्षा ब्यूरो (टीजीसीएसबी) ने नयी दिल्ली में फर्जी कॉल सेंटर के जरिए चलाए जा रहे एक साइबर अपराध नेटवर्क का भंडाफोड़ करके 21 तेलुगु भाषी महिलाओं और एक बैंक खाता धारक को गिरफ्तार कर लिया। एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी। अधिकारी के अनुसार, अभियान के तहत ब्यूरो के अधिकारियों ने साइबर अपराध से जुड़े तीन कॉल सेंटरों पर समन्वित तरीके से छापेमारी की।
तेलंगाना साइबर सुरक्षा ब्यूरो निदेशक शिखा गोयल ने एक बयान में बताया कि जांच के दौरान तीन मुख्य संचालकों की पहचान हुई, जो इन कॉल सेंटरों का स्वामित्व और संचालन करते थे। उन्होंने बताया कि तीनों फिलहाल फरार हैं। अधिकारी ने बताया कि तीनों कॉल सेंटर दिल्ली के शिवा मार्केट में अलग-अलग टीमों के माध्यम से संचालित किए जा रहे थे।
उन्होंने बताया कि इन टीमों का नेतृत्व ललित सिंह, कुलदीप सिंह और अनिल कर रहे थे, जो सभी फिलहाल फरार हैं। गिरफ्तार आरोपियों में 21 टेली-कॉलर और एक बैंक खाता धारक शामिल हैं। गोयल ने बताया कि यह कॉल सेंटर नेटवर्क करीब डेढ़ साल से जारी था।
अधिकारी ने बताया, ‘‘जालसाज 25 से 40 वर्ष की तेलुगु भाषी महिलाओं को टेली-कॉलर के रूप में इस्तेमाल करते थे। ये महिलाएं पीड़ितों का विश्वास जीतकर तेलंगाना में लोगों को निशाना बनाती थीं और खुद को एक गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) का प्रतिनिधि बताकर आकर्षक ऋण मंजूरी का प्रस्ताव देती थीं। इसके बाद ठगी को अंजाम दिया जाता था।
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