Delhi के Uttam Nagar में मांझे से बाइक सवार युवक की गर्दन कटी, FIR दर्ज
दिल्ली के उत्तमनगर में मोटरसाइकिल चलाते समय कथित तौर पर मांझे की चपेट में आने से 32 वर्षीय एक व्यक्ति की गर्दन पर गंभीर रूप से चोट आ गई। पुलिस ने सोमवार को यह जानकारी दी। घटना पांच अगस्त को हुई जब विकास नगर निवासी धीरज कुमार ओझा अपनी मोटरसाइकिल पर उत्तमनगर से मुंडका की ओर जा रहे थे।
पुलिस ने बताया कि जब ओझा उत्तमनगर के पास नाला रोड पर पहुंचे, तो अचानक मांझे से उनकी गर्दर कट गई और गंभीर घाव हो गया। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि ओझा को तुरंत दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी चोट का इलाज किया गया। ओझा ने अपनी शिकायत में पुलिस को बताया कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने लापरवाही से खतरनाक मांझे का उपयोग करके पतंग उड़ाई, जिससे वह घायल हो गया।
अधिकारी ने कहा कि मेडिकल जांच रिपोर्ट और घायल व्यक्ति के बयान के आधार पर, पुलिस ने उत्तमनगर थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 125 (जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालने वाला कार्य), 118 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना) और 223 (ए) (लोक सेवक के आदेश की अवज्ञा) के तहत एक प्राथमिकी दर्ज की और जांच शुरू की। उन्होंने बताया कि पुलिस मांझे के स्रोत का पता लगाने और पतंग उड़ाने वाले व्यक्ति की पहचान करने का प्रयास कर रही है। यह घटना राष्ट्रीय राजधानी में प्रतिबंधित चीनी मांझे के उपयोग, बिक्री और भंडारण के खिलाफ दिल्ली पुलिस की जारी कार्रवाई के बीच हुई है।
विभिन्न जिलों में पुलिस दलों ने प्रतिबंधित पतंग मांझे के खिलाफ जांच और प्रवर्तन तेज कर दिया है, जिससे पैदल चलने वालों और दोपहिया वाहन सवारों को गंभीर चोट लग सकती है। पुलिस ने विभिन्न पुलिस जिलों में की गई अलग-अलग कार्रवाइयों में चीनी मांझा की 2,000 से अधिक चरखियां जब्त की हैं।
CAG report: Delhi में स्थानीय निकायों का 94% तक बजट दैनिक खर्चों में गया
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने कहा है कि पिछले एक दशक में दिल्ली सरकार द्वारा स्थानीय निकायों और अन्य संस्थानों को दी गई वित्तीय सहायता का बहुत छोटा हिस्सा ही पूंजीगत परिसंपत्तियों के निर्माण में खर्च हुआ जबकि अधिकांश राशि रोजमर्रा के खर्चों में चली गई। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार को वित्त वर्ष 2024-25 के लिए राज्य वित्त पर कैग की यह रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट कहती है कि वर्ष 2015-16 से 2024-25 के दौरान कुल वित्तीय सहायता में से केवल छह प्रतिशत से लेकर 27 प्रतिशत ही पूंजीगत परिसंपत्तियों के निर्माण के लिए उपयोग किया गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस अवधि में स्थानीय निकायों एवं अन्य संस्थानों को दी गई 73 से 94 प्रतिशत वित्तीय सहायता वेतन, रखरखाव और अन्य दैनिक खर्चों में खर्च हुई, जिससे बुनियादी ढांचे और दीर्घकालिक परिसंपत्तियों के निर्माण पर कम ध्यान दिया गया। कैग रिपोर्ट कहती है कि वित्त वर्ष 2024-25 में नगर निगम एवं अन्य निकायों को दी गई कुल वित्तीय सहायता 16,449 करोड़ रुपये रही, जो एक साल पहले के 17,047 करोड़ रुपये की तुलना में 3.5 प्रतिशत कम है। यह कमी मुख्य रूप से नगर निगमों को दिए जाने वाले पूंजीगत अनुदानों में गिरावट के कारण आई, जो 2023-24 के 649 करोड़ रुपये से घटकर 2024-25 में 499 करोड़ रुपये रह गए।
नगर निगम सबसे बड़े लाभार्थी बने रहे और उन्हें 2024-25 में 9,282 करोड़ रुपये मिले, जो पिछले वर्ष के 8,596 करोड़ रुपये से अधिक है। अन्य संस्थानों में दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) को 2,620 करोड़ रुपये, दिल्ली जल बोर्ड को 633 करोड़ रुपये और दिल्ली शहरी शेल्टर सुधार बोर्ड को 162 करोड़ रुपये की सहायता दी गई। रिपोर्ट के मुताबिक, पूंजीगत परिसंपत्तियों के निर्माण के लिए कुल अनुदान 2024-25 में घटकर 1,110 करोड़ रुपये रह गया, जो कुल सहायता का मात्र 6.75 प्रतिशत है और पिछले दशक के सबसे निचले स्तर में से एक है।
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