भारत के समर्थन में खुलकर उतरा इटली, FCRA बिल के समर्थन में कहा- विदेशी फंडिंग पर सरकार की निगरानी जरूरी
भारत सरकार द्वारा प्रस्तावित FCRA बिल 2026 इन दिनों दुनिया भर में चर्चा का विषय बना हुआ है. देश से लेकर विदेश तक इस बिल पर रार मची हुई है. इस बीच, इटली भारत के समर्थन में उतर गया है. FCRA बिल 2026 का उसने समर्थन किया है. इटली का कहना है कि इंटरनेशनल फंडिंद पर सरकार की निगरानी आवश्यक है.
कांग्रेस सरकार भी लेकर आई थी FCRA बिल- लोंबार्डी
भारत-इटली संबंधों के सलाहकार और वरिष्ठ विश्लेषक कार्लो लोंबार्डी का कहना है कि भारत में विदेश फंडिंग पर नियम कोई नई घटना नहीं है. विदेशी योगदान विनियमन अधिनियम यानी FCRA पहली बार साल 1976 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के समय पर लागू किया गया था. उस वक्त देश में आपातकाल लगा हुआ है. इसके बाद कांग्रेस की ही मनमोहन सिंह सरकार में इस कानून को और सख्त कर दिया गया था.
#WATCH | Verona, Italy: On FCRA Bill, Analyst and Advisor, India-Italy relations, Carlo Lombardi says, "...The first FCRA was passed by the Indian Parliament in 1976. It was done by Mrs Indira Gandhi. It was then overhauled in 2010 by Mr Manmohan Singh's government, and it was… pic.twitter.com/S4JlqbogXe
— ANI (@ANI) August 12, 2026
पॉलिटिकल असर डालना आज बहुत आसान- लोंबार्डी
लोंबार्डी ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि गैर-सरकारी संगठन यानी एनजीओ मानवीय कार्यों के लिए पॉजिटिवली काम कर रही है. हालांकि, वह अक्सर विदेश नीति के साधन के तौर पर भी काम कर सकते हैं, जिस वजह से इंटरनेशनल फंडिंग पर सरकार की निगरानी आवश्यक है. उन्होंने आगे कहा कि हमें यह भी ध्यान रखना होगा कि जिस तरह से दुनिया भर में तकनीक फैल रही है, इस वजह से इस प्रकार से असर डालना बहुत आसान हो गया है. आर्थिक खुलापन कई चैनलों के माध्यम से फंड ट्रांसफर करने की सुविधा देता है, जो पहले मौजूद नहीं था. ऐतिहासिक नजरिए से देखें तो इसमें असल में कुछ भी नया नहीं है.
लोंबार्डी- विदेशी फंडिंग से राजनीतिक एजेंडे को बढ़ावा न दिया जाए
लोंबार्डी ने विदेश फंडिंग में ट्रांसपेरेंसी पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि संप्रभु सरकारों को ये सुनिश्चित करना होगा कि विदेशी धन का इस्तेमाल सिर्फ एनजीओ के घोषित उद्देश्यों के लिए ही किया जाए न कि किसी राजनीतिक एजेंडे को इस फंडिंग से बढ़ावा दिया जाए. सरकार को पता होना चाहिए कि कौन, किसे और किस मकसद से फंड दिया जा रहा है. सरकार को ये भी सुनिश्चित करना होगा कि विदेशी पैसों का गलत इस्तेमाल न किया जाए.
अमेरिकी सांसद ने की थी टिप्पणी
बता दें, हाल में अमेरिका के सासंद राइली मूर ने भारत में विदेशी चंदे और दान से जुड़े कानूनों में प्रस्तावित संशोधनों पर टिप्पणी की थी. मूर ने एक्स पर एक पोस्ट किया था और भारत को धमकी दी थी. एक्स पर उन्होंने कहा कि…
भारत में ईसाई समुदाय का एक लंबा इतिहास रहा है, जिसकी शुरुआत प्रभु यीशु मसीह के पुनरुत्थान के कुछ ही दशकों बाद सेंट थॉमस द एपोसल के मालाबार तट आगमन के साथ हुई थी.
हालांकि, इस प्राचीन इतिहास के बावजूद, भारतीय संसद द्वारा 'फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) एक्ट' (FCRA) में प्रस्तावित संशोधनों पर विचार किया जा रहा है. आलोचकों का मानना है कि इन बदलावों से सरकार को चर्चों और धार्मिक चैरिटी संस्थाओं के संचालन पर अधिक नियंत्रण प्राप्त हो सकता है.
इस कदम को ईसाई समुदाय के अधिकारों के प्रति एक गंभीर विषय के रूप में देखा जा रहा है. अगर यह विधेयक अपने वर्तमान स्वरूप में आगे बढ़ता है, तो यह भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों में एक प्रमुख चिंता का कारण बन सकता है.
Christians have been in India since St. Thomas the Apostle traveled to the Malabar Coast just decades after the resurrection of our Lord Jesus Christ.
— Rep. Riley M. Moore (@RepRileyMoore) August 4, 2026
But despite this long Christian history, India’s Parliament is considering amending Foreign Contribution Regulation Amendment…
लेह-लद्दाख में सुबह सुबह आया भूकंप, 5.5 की तीव्रता से कांपी धरती
Leh Earthquake: लद्दाख के लेह में गुरुवार सुबह सुबह भूकंप आया. सुबह करीब 6 बजकर 5 मिनट पर तेज झटके महसूस किए गए. नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के मुताबिक, भूकंप की तीव्रता 5.5 मापी गई. हालांकि अभी तक कोई जानमाल के नुकसान की खबर नहीं है.
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के मुताबिक, गुरुवार सुबह लद्दाख के लेह में 5.5 तीव्रता का भूकंप आया। यह भूकंप सुबह 6:05 बजे जमीन से 10 किलोमीटर नीचे आया। भूकंप का केंद्र लेह से जुड़े 36.881° उत्तरी अक्षांश और 74.402° पूर्वी देशांतर पर था. भूकंप के झटके लगते ही लोग घरों से बाहर निकल आए. हालांकि गनीमत है कि अभी तक लेह-लद्दाख में भूकंप से नुकसान की कोई खबर सामने नहीं आई है. इससे पहले इसी साल19 जनवरी को लद्दाख में 5.7 तीव्रता का एक बड़ा भूकंप आया था. इसके अलावा गत 29 अप्रैल को भी लेह-लद्दाख क्षेत्र में 4.1 तीव्रता का मामूली भूकंप आया था.
An earthquake of magnitude 5.5 on the Richter scale struck Leh, Ladakh, at 6:05 am today: National Centre for Seismology. pic.twitter.com/Y0SQ3mdhQE
— ANI (@ANI) August 13, 2026
क्यों आता है भूंकप?
धरती के अंदर मौजूद टेक्टोनिक प्लेटें लगातार धीरे-धीरे खिसकती रहती हैं। कई जगहों पर इन प्लेटों के बीच टकराव और घर्षण के कारण दबाव बढ़ता जाता है। जब यह दबाव बहुत ज्यादा हो जाता है, तो चट्टानों में अचानक टूट-फूट या हलचल होती है और अंदर जमा ऊर्जा तेजी से बाहर निकलती है। इसी ऊर्जा से धरती की सतह पर कंपन पैदा होता है, जिसे हम भूकंप के झटकों के रूप में महसूस करते हैं।
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कितना भयावह हो सकता है भूकंप?
भूकंप धरती की सतह से लेकर करीब 700 किलोमीटर की गहराई तक कहीं भी आ सकता है. वैज्ञानिकों के मुताबिक, भूकंप की गहराई को आमतौर पर उथले, मध्यम और गहरे तीन स्तरों में बांटा जाता है. इनमें उथले भूकंप ज्यादा खतरनाक माने जाते हैं, क्योंकि इनसे निकलने वाली भूकंपीय तरंगों को जमीन की सतह तक पहुंचने के लिए कम दूरी तय करनी पड़ती है. इससे सतह पर ज्यादा तेज कंपन होता है और इमारतों को नुकसान पहुंचने के साथ जान-माल के नुकसान का खतरा भी बढ़ जाता है.
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