ताइवान का चीन पर बड़ा आरोप, वियतनाम के रास्ते सब्जियां भेज रहा बीजिंग
ताइपे, 1 मई (आईएएनएस)। ताइवान ने चीन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि बीजिंग वियतनाम के रास्ते सब्जियां भेजकर आयात प्रतिबंधों से बचने की कोशिश कर रहा है। ताइवान सरकार ने इस प्रक्रिया को “ओरिजिन वॉशिंग” यानी मूल स्रोत छिपाने की साजिश बताया है और इसके खिलाफ सख्त कार्रवाई का ऐलान किया है।
ताइवान ने चीन के 1,000 से अधिक कृषि और मत्स्य उत्पादों के आयात पर रोक लगा रखी है। अधिकारियों के मुताबिक, चीन इन प्रतिबंधों से बचने के लिए नापा पत्तागोभी और शीटाके मशरूम जैसी सब्जियों को पहले वियतनाम भेजता है। वहां इन्हें दोबारा पैक कर वियतनामी उत्पाद बताकर ताइवान भेज दिया जाता है।
ताइवान के कृषि मंत्री चेन जुनने-जिह ने संसद में कहा कि उनकी मंत्रालय इस “मूल स्रोत की धांधली” को रोकने के लिए कड़े कदम उठा रहा है। नियम तोड़ने वालों पर सख्त दंड लगाया जाएगा।
उन्होंने बताया कि मंत्रालय वियतनाम में हवाई सर्वेक्षण भी कराएगा, ताकि यह पता लगाया जा सके कि किन इलाकों से वास्तव में कितनी उपज संभव है। यदि ताइवान को निर्यात की मात्रा उस क्षमता से अधिक पाई गई, तो उस पर कार्रवाई के लिए तंत्र बनाया जाएगा।
डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (डीपीपी) की सांसद चिउ यी-यिंग ने आरोप लगाया कि करीब 13,000 न्यू ताइवानी डॉलर (लगभग 410 अमेरिकी डॉलर) देकर फर्जी वियतनामी मूल प्रमाणपत्र खरीदा जा सकता है। इसके जरिए आयातक एक कंटेनर पर 2 लाख से 5 लाख न्यू ताइवानी डॉलर तक मुनाफा कमा सकते हैं। उन्होंने सरकार से तीसरे पक्ष द्वारा आइसोटोप टेस्टिंग कराने की मांग की, ताकि उत्पाद की असली उत्पत्ति का पता लगाया जा सके।
गौरतलब है कि चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और “पुनर्एकीकरण” के लिए बल प्रयोग से भी इनकार नहीं करता। पिछले कुछ वर्षों में चीन ने ताइवान पर सैन्य, राजनीतिक और आर्थिक दबाव बढ़ाया है।
2021 में चीन ने कीट नियंत्रण संबंधी चिंताओं का हवाला देकर ताइवानी अनानास के आयात पर रोक लगा दी थी, जिसे ताइवान ने राजनीतिक कदम बताया था। वहीं 2024 में ताइवान ने चीन पर विश्व व्यापार संगठन के नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया था, जब बीजिंग ने कई ताइवानी फल, सब्जियों और समुद्री उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया था।
ताइवान ने इसे “आर्थिक दबाव” करार देते हुए कहा था कि इससे ताइवान जलडमरूमध्य के दोनों ओर किसानों के हित प्रभावित होते हैं। दूसरी ओर चीन ने ताइवान पर 2010 के मुक्त व्यापार समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाया था।
--आईएएनएस
डीएससी
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यूएस से तनाव के बीच ईरान में फूट, आरघची की जा सकती है कुर्सी, IRGC की बात मानना पड़ा भारी
अमेरिका के साथ जारी तनाव के बीच ईरान में फूट की खबरें सामने आ रही हैं. एक ओर ईरान के राष्ट्रपति पेजेशकियान और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ हैं. वहीं दूसरी ओर विदेश मंत्री अब्बास आरघची हैं. इस मामले में ईरानी सरकार ओर से किसी तरह की प्रतिक्रिया नहीं सामने आई है. मगर इस विवाद के कारण हलचल तेज हो चुकी है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, आरघची पर कई आरोप लगाए गए हैं. आरघची को लेकर कहा जा रहा है कि विदेश मंत्रालय को स्वतंत्र रूप से चला रहे हैं. ऐसा बताया जा रहा है कि मंत्री कैबिनेट नीतियों के बजाय रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) के निर्देश को मान रहे हैं.
'राष्ट्रपति को बिना बताए फैसले ले रहे विदेश मंत्री'
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति पेजेशकियान का मानना है कि जरूरी डिप्लोमेटिक चर्चाओं के दौरान विदेश मंत्री आराघची ने सरकार के बजाय सेना (IRGC) का साथ दिया. शांति वार्ता के दौरान उन्होंने सेना की बात को सामने रखी. पेजेशकियान ने साफ किया कि अगर ऐसे हालात रहे तो वे अराघची को पद से हटा देंगे. दावा किया जा रहा है कि अराघची रिवोल्यूशनरी गार्ड के कमांडर अहमद वाहिदी के 'सहयोगी' के रूप में काम कर रहे हैं. उन्होंने राष्ट्रपति को किसी सूचना के रणनीतियों को लागू कर दिया है.
ऐसा दावा किया गया कि अराघची विदेश मंत्रालय को राष्ट्रपति ऑफिस के प्रति जवाबदेह बनाने के बजाय स्वतंत्र रूप से इसे चला रहे हैं. मीडिया रिपोर्ट की मानें तो राष्ट्रपति से जंग में मारे गए सरकारी अफसरों की जगह नई नियुक्तियां करने का अवसर भी छीन लिया गया है.
प्रस्ताव को पूरी तरह से खारिज कर दिया
ईरान इंटरनेशनल मीडिया के मुताबिक, संसद में यह विरोध तब से शुरू हुआ, जब संसद अध्यक्ष (स्पीकर) गालिबाफ ने बातचीत करने वाली टीम के प्रमुख के पद से अपना इस्तीफा दे दिया. उन्होंने यह कदम इसलिए उठाया क्योंकि बातचीत में परमाणु ऊर्जा के केस को शामिल करने का प्रयास करने पर उन्हें फटकार लगाई गई थी.' स्पीकर के हटने के बाद विदेश मंत्री अरागची खुद अकेले इस्लामाबाद गए और एक प्रस्ताव दिया. मगर अमेरिकी राष्ट्रपति ने उस प्रस्ताव को पूरी तरह से खारिज कर दिया.
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