MPESB Recruitment 2026: 1200 पदों पर भर्ती, 7 मई से आवेदन, सैलरी 49,000 तक, जानें आयु-सीमा और योग्यता डिटेल्स
मध्य प्रदेश में मेडिकल के क्षेत्र में सरकारी नौकरी पाने का सुनहरा मौका है। कर्मचारी चयन बोर्ड (MPESB) ने अस्पताल सहायक पद के लिए भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया है। यह भर्ती लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग, मध्य प्रदेश के अंतर्गत की जा रही है। यह पद चतुर्थ श्रेणी (Class-IV) और गैर-कार्यपालिक (Non-Executive) श्रेणी के अंतर्गत आते हैं। आवेदन की प्रक्रिया 7 मई 2026 से शुरू होगी। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट www.esb.mp.gov.in पर जाकर 21 मई 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
MPESB Recruitment Hospital Assistant 2026
कुल पद: 1200
पदों का विवरण:
- अनारक्षित (General): 324 पद
- ओबीसी (OBC): 324 पद
- अनुसूचित जनजाति (ST): 240 पद
- अनुसूचित जाति (SC): 192 पद
- ईडब्ल्यूएस (EWS): 120 पद
- (इनमें 72 पद दिव्यांगजनों के लिए आरक्षित हैं)
शैक्षणिक योग्यता: किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से न्यूनतम 10वीं कक्षा (हाई स्कूल) उत्तीर्ण होना अनिवार्य है।
आयु सीमा : न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु 40 वर्ष रखी गई है। आयु की गणना 1 जनवरी 2026 के अनुसार की जाएगी। एससी/एसटी/ओबीसी/ईडब्ल्यूएस (मध्य प्रदेश निवासी) और महिला उम्मीदवारों के लिए अधिकतम आयु सीमा 45 वर्ष रखी गई है, जिसमें 5 वर्ष की छूट दी गई है।
चयन प्रक्रिया: लिखित परीक्षा (CBT) के आधार पर किया जाएगा
परीक्षा पैटर्न:
- कुल प्रश्न: 100 वस्तुनिष्ठ प्रकार के प्रश्न
- कुल अंक: 100 अंक (प्रत्येक प्रश्न 1 अंक का)
- समय: 2 घंटे
- सिलेबस: इसमें 10वीं स्तर के सामान्य ज्ञान, सामान्य हिंदी, सामान्य अंग्रेजी, सामान्य गणित, सामान्य विज्ञान और सामाजिक विज्ञान से संबंधित प्रश्न पूछे जाएंगे।
वेतनमान: चयनित उम्मीदवारों को सातवें वेतनमान के लेवल-1 (₹15,500 – ₹49,000) के अनुसार वेतन दिया जाएगा। भत्तों (DA, HRA आदि) को जोड़कर शुरुआती वेतन लगभग ₹28,000 से ₹31,000 प्रति माह के बीच हो सकता है।
आवेदन शुल्क: अनारक्षित वर्ग के लिए ₹500 और एसटी/एससी/ओबीसी/दिव्यांग (केवल MP के मूल निवासी) के लिए ₹250 आवेदन शुल्क रखा गया है। पोर्टल शुल्क MP Online के माध्यम से भरने पर ₹60 अतिरिक्त देय होगा।
महत्वपूर्ण तिथियां
- नोटिफिकेशन जारी होने की तिथि: 30 अप्रैल 2026
- आवेदन शुरू होने की तिथि: 07 मई 2026
- आवेदन की अंतिम तिथि: 21 मई 2026 (रात 12 बजे तक)
- आवेदन में संशोधन की अवधि: 07 मई से 26 मई 2026 तक
- परीक्षा की तिथि: 24 जून 2026 से (दो पालियों में आयोजित की जाएगी)
उमंग सिंघार ने मध्यप्रदेश के आंगनबाड़ी केंद्रों में अव्यवस्थाओं के आरोप लगाए, बिजली-पानी के अभाव पर सरकार को घेरा
मध्यप्रदेश में आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति को लेकर कांग्रेस प्रदेश सरकार पर हमलावर है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन केंद्रों पर बच्चों के पोषण और माताओं की सेहत की जिम्मेदारी है, वही बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जूझ रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार एक ओर महिला और बाल विकास के नाम पर योजनाओं का प्रचार करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर बच्चों को बुनियादी सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही हैं। उन्होंने सरकार के सुशासन के दावों पर सवाल करते हुए कहा है कि ये बच्चों के भविष्य के साथ अन्याय है।
कांग्रेस ने आंगनबाड़ी केंद्रों की अव्यवस्थाओं पर सरकार को घेरा
उमंग सिंघार ने आरोप लगाया है कि प्रदेश के सैकड़ों आंगनबाड़ी केंद्र आज भी पीने के पानी और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से उन्होंने कहा कि 353 केंद्रों में पेयजल की व्यवस्था नहीं है, जबकि 5996 केंद्रों में बिजली कनेक्शन तक उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा हजारों केंद्रों में शौचालय जैसी जरूरी सुविधाओं का भी अभाव है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि एक ओर सरकार पोषण अभियान और महिला-बाल विकास को लेकर बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर बच्चे प्यासे और केंद्र उपेक्षित नजर आ रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यही सुशासन है, जहां बच्चों के भविष्य के साथ इस तरह की लापरवाही हो रही है।
कई केंद्रों में बिजली पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव
प्रदेश में आंगनबाड़ी केंद्रों को 0 से 6 वर्ष तक के बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। लेकिन हालिया आंकड़े इस व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर करते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, बड़ी संख्या में केंद्र किराए के भवनों में संचालित हो रहे हैं जहां आधारभूत सुविधाओं का अभाव साफ दिखाई देता है। वहीं सैकड़ों केंद्रों में पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है, हजारों केंद्रों में शौचालय नहीं हैं और बड़ी संख्या में केंद्र बिजली कनेक्शन से वंचित हैं। कई जगहों पर हैंडपंप लगे होने के बावजूद पानी नहीं निकलता, जिससे बच्चों और महिलाओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसे लेकर अब कांग्रेस प्रदेश सरकार को घेर रही है।
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