महाराष्ट्र दिवस के चलते शेयर बाजार बंद, नहीं होगी खरीद-बिक्री
मुंबई, 1 मई (आईएएनएस)। भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार को महाराष्ट्र दिवस के चलते बंद रहेगा। इस दौरान दोनों मुख्य स्टॉक एक्सचेंज- बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) पर शेयरों की खरीद-बिक्री नहीं होगी।
अवकाश के चलते इक्विटी, डेरिवेटिव्स और एसएलबी सेगमेंट तीनों में कारोबार बंद रहेगा। सामान्य ट्रेडिंग अलगे सत्र यानी सोमवार, 4 मई को होगी।
कमोडिटी मार्केट आंशिक रूप से छुट्टी रहेगी। सुबह के सत्र (9 बजे से लेकर 5 बजे तक) में ट्रेडिंग बंद रहेगी, लेकिन शाम के सत्र (5 बजे से लेकर रात 11:55 तक) में कारोबार सामान्य रहेगा।
इसके अतिरिक्त, देश का प्रमुख कृषि-वस्तु बाजार, नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज लिमिटेड (एनसीडीईएक्स), सुबह और शाम दोनों सत्रों के लिए बंद रहेगा।
महाराष्ट्र दिवस के साथ-साथ आज अंतरराष्ट्रीय लेबर डे भी है, जिसके कारण एशिया के करीब सभी शेयर बाजार बंद हैं, जिसमें चीन, हांगकांग, इंडोनेशिया, सिंगापुर, थाईलैंड, मॉरीशस, मलेशिया, वियतनाम, ताइवान, पाकिस्तान और श्रीलंका का नाम शामिल हैं।
यूरोप में फ्रांस, जर्मनी, ग्रीस, इटली, पोलैंड और अन्य देशों के बाजार भी आज अंतरराष्ट्रीय लेबर डे के कारण बंद रहेंगे।
इसके अतिरिक्त, वैश्विक अस्थिरता और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण भारतीय शेयर बाजार गुरुवार को लाल निशान में बंद हुआ। इस दौरान सेंसेक्स 582.86 अंक या 0.75 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,913.50 और निफ्टी 180.10 अंक या 0.74 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 23,997.55 पर था।
लार्जकैप के साथ स्मॉलकैप और मिडकैप में भी कमजोरी देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 592.05 अंक या 0.98 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 59,784.85 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 86 अंक या 0.48 प्रतिशत की मजबूती के साथ 18,007.15 पर बंद हुआ।
इस दौरान सेंसेक्स पैक में सन फार्मा, इन्फोसिस, अदाणी पोर्ट्स, टेक महिंद्रा, बजाज फाइनेंस, कोटक महिंद्रा, मारुति सुजुकी और टीसीएस गेनर्स थे। इटरनल, एचयूएल, टाटा स्टील, एलएंडटी, ट्रेंट, अल्ट्राटेक सीमेंट, एमएंडएम, एसबीआई, एक्सिस बैंक, बीईएल, आईसीआईसीआई बैंक, टाइटन, इंडिगो, बजाज फिनसर्व, एचडीएफसी बैंक और पावर ग्रिड लूजर्स थे।
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ईरान संघर्ष और बजट को लेकर हेगसेथ से सांसदों ने पूछे तीखे सवाल
वाशिंगटन, 1 मई (आईएएनएस)। सीनेट में ईरान संघर्ष पर सुनवाई के दौरान अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और सांसदों के बीच तीखी बहस हुई। ईरान संघर्ष के अलावा बढ़ते खर्च और प्रस्तावित 1.5 ट्रिलियन डॉलर के रक्षा बजट को लेकर मतभेद बढ़ा।
अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने ईरान संघर्ष के बाद पहली बार संसद में डेमोक्रेटिक सांसदों के सवालों का सीधा सामना किया। लगभग छह घंटे की सुनवाई के दौरान हेगसेथ ने शपथ के तहत सवालों का सामना करते हुए डेमोक्रेटिक सांसदों के साथ बहस की।
वो हाउस आर्म्ड सर्विसेज कमेटी के सामने पेश हुए थे। जहां डेमोक्रेटिक और कुछ निर्दलीय सांसदों ने ईरान में प्रशासनिक सफलता के दावों को चुनौती दी और मिलिट्री खर्च के स्केल पर सवाल उठाए।
उनके साथ ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डेन केन और रक्षा मंत्रालय के मुख्य वित्त अधिकारी जूल्स हर्स्ट भी मौजूद थे।
रैंकिंग मेंबर जैक रीड ने पीट से सवाल पूछने की शुरुआत की। आरोप लगाया कि प्रशासन ने बिना किसी रणनीति के एक गलत लड़ाई में उतरने का आरोप लगाया।
रीड ने कहा, आज, हमारा देश युद्ध की रणनीतिक स्थिति में है। उन्होंने हताहतों की संख्या, बुनियादी ढांचों को पहुंचे नुकसान और आर्थिक नतीजों की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक जीत के दावे खतरनाक रूप से बढ़ा-चढ़ाकर किए गए थे।
इस आरोप को हेगसेथ ने सिरे से खारिज कर दिया, यह दावा करते हुए कि अभियान असरदार रहा। उन्होंने कहा, हमारी सेना ने जो हासिल किया वह अभूतपूर्व रहा, और तर्क दिया कि ईरान की रक्षा क्षमताएं काफी हद तक कम हो गई हैं।
इस बातचीत ने एक तीखी बहस का रूप ले लिया। जिसमें सीनेटरों ने बार-बार डिफेंस चीफ पर लागत और नतीजों को लेकर आरोप लगाए और सवाल पूछते रहे।
सीनेटर कर्स्टन गिलिब्रैंड ने कहा कि अमेरिकी नागरिक युद्ध के आर्थिक असर को लेकर गुस्से में थे, उन्होंने बढ़ते ईंधन रेट और खाने-पीने की बढ़ती कीमतों का हवाला दिया।
उन्होंने सवाल किया कि, आखिर हम अमेरिकी नागरिकों से इस युद्ध के लिए और कितना भुगतान चाहते हैं? हेगसेथ ने इसका विरोध करते हुए कहा कि ईरान के न्यूक्लियर इरादों का मुकाबला करने के लिए यह मिशन जरूरी था।
जिसके जवाब में गिलिब्रैंड बोले, न्यूक्लियर हथियारों से लैस ईरान की कीमत आखिर क्या है?
सीनेटर मार्क केली ने मिलिट्री ऑपरेशन के स्तर और अमेरिकी हथियारों के स्टॉक पर पड़ने वाले दबाव के बारे में चिंता जताई।
केली ने कहा, यह जंग रुकी हुई है, होर्मुज स्ट्रेट बंद है और यह साफ नहीं है... कि इस जंग का मकसद क्या है।
हेगसेथ ने कहा कि मिलिट्री ने अपने मकसद हासिल कर लिए हैं और तेजी से अपनी क्षमता फिर से बना रही है।
आम लोगों के मारे जाने और लड़ाई के नियमों को लेकर भी तनाव बढ़ गया। सीनेटर गिलिब्रैंड ने स्कूलों और अस्पतालों पर हमलों की रिपोर्ट पर सवाल उठाए, और आम लोगों की सुरक्षा के लिए जरूरी उपायों के बारे में पूछा।
हेगसेथ ने कहा कि यूएस मिलिट्री कभी भी आम लोगों को टारगेट नहीं करती और नुकसान को कम करने के लिए बड़े कदम उठाती है।
सीनेटर टिम केन ने लड़ाई के बारे में कानूनी चिंताएं जताईं, वॉर पावर्स रेजोल्यूशन का जिक्र किया और पूछा कि क्या प्रशासन कांग्रेस से मंजूरी मांगेगा।
हेगसेथ ने कहा कि सीजफायर का मतलब है “60-दिन की घड़ी का रुकना।”
बजट के मुद्दों ने टकराव को और बढ़ा दिया। सीनेटर केली ने सवाल किया कि क्या 1.5 ट्रिलियन डॉलर का आंकड़ा सही था; उन्होंने तल्ख लहजे में कहा कि कभी-कभी लगता है कि ये हवाई था।
हेगसेथ ने जवाब दिया कि यह संख्या एक “बहुत सख्त प्रक्रिया” का नतीजा थी जो ग्लोबल खतरों और वर्षों के अल्प निवेश को दिखाती है।
सांसदों ने युद्ध की लागत के बारे में पेंटागन पर भी दबाव डाला। डिफेंस कंट्रोलर जूल्स हर्स्ट ने 25 बिलियन डॉलर के शुरुआती अनुमान की पुष्टि की, हालांकि कई सीनेटरों ने तर्क दिया कि असली आंकड़ा इससे कहीं ज्यादा हो सकता है।
पूरी सुनवाई के दौरान, जॉइंट चीफ्स के चेयरमैन डैन केन ने अधिकतर राजनीतिक विवादों से परहेज किया, और बिना किसी पार्टी के मिलिट्री सलाह” देने में अपनी भूमिका पर ही बल दिया।
इस बहस ने यूएस मिलिट्री स्ट्रैटेजी, ईरान संघर्ष और डिफेंस खर्च के पैमाने को लेकर वाशिंगटन में बढ़ते मतभेदों को उजागर किया।
--आईएएनएस
केआर/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
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