गाजियाबाद में फिर हुई पुलिस और बदमाशों के बीच मुठभेड़, अलग-अलग घटनाओं में 2 लुटेरे गिरफ्तार
Ghaziabad Encounter: गाजियाबाद पुलिस द्वारा स्नैचिंग और लूट की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के दौरान दो अलग-अलग थाना क्षेत्रों में बदमाशों के साथ मुठभेड़ हो गई. दोनों मामलों में बदमाशों ने पुलिस पर फायरिंग की, जिसके जवाब में पुलिस ने आत्मरक्षा में गोली चलाई. दोनों ही घटनाओं में एक-एक बदमाश घायल हो गया, जिन्हें पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. जबकि एक बदमाश भागने में सफल रहा. दोनों मामलों में अवैध तमंचा, कारतूस और स्नैचिंग में प्रयुक्त मोटरसाइकिल बरामद की गई है.
इन्दिरापुरम इलाके में हुई पहली घटना
थाना इन्दिरापुरम क्षेत्र में हाल ही में हुई स्नैचिंग और लूट की घटनाओं को लेकर उच्चाधिकारियों के निर्देश पर SWAT टीम ट्रांसहिंडन और थाना इन्दिरापुरम की संयुक्त टीम ने गुरुवार की रात सेक्टर-1 वसुंधरा टी-पॉइंट पर चेकिंग अभियान चलाया. चेकिंग के दौरान एक मोटरसाइकिल सवार व्यक्ति को आते देख पुलिस ने रुकने का इशारा किया. लेकिन व्यक्ति ने पुलिस की बात नहीं मानी और मोटरसाइकिल तेजी से मोड़कर सेक्टर 2ए ग्राउंड की ओर भागने लगा. पुलिस ने पीछा किया तो भागते हुए बदमाश की मोटरसाइकिल ग्राउंड में मौजूद गड्ढे और बारिश के पानी के कारण फिसल गई.
पुलिस को देख बदमाश ने चला दी गोली
खुद को पुलिस से घिरा देख बदमाश ने पुलिस पार्टी पर जानलेवा हमला करते हुए तमंचे से फायरिंग कर दी. जिसमें पुलिस वाले बाल-बाल बचे. आत्मरक्षा में पुलिस टीम ने जवाबी फायरिंग की, जिसमें बदमाश के पैर में गोली लग गई. उसके बाद पुलिस ने बदमाश को गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तार बदमाश जाबिर उर्फ जावेद हसन पुत्र साबिर, निवासी ग्राम लखौरी जलालपुर, थाना नखासा, जिला संभल (उत्तर प्रदेश), उम्र करीब 25 वर्ष बताई गई है. उसके पास से 1 अवैध तमंचा, 1 खोखा कारतूस, 1 जिंदा कारतूस, स्नैचिंग में प्रयुक्त मोटरसाइकिल बरामद की गई है.
बदमाश पर दर्ज हैं कई मुकदमे
पूछताछ के दौरान जाबिर ने बताया कि 22 अप्रैल 2026 को उसने अपने साथी के साथ वसुंधरा में एक व्यक्ति के गले से चैन छीनी थी, जिसे बाद में मेरठ में बेच दिया गया था. वह उसी मोटरसाइकिल पर फिर से स्नैचिंग करने आया था. अभियुक्त का आपराधिक इतिहास काफी लंबा है. गाजियाबाद में स्नैचिंग, चोरी और NDPS एक्ट, आर्म्स एक्ट के तहत उसके विरुद्ध 4 मुकदमे दर्ज हैं, जबकि संभल में 2 अन्य मुकदमे भी दर्ज हैं. घायल बदमाश को अस्पताल में भर्ती कराया गया है और आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है.
शालीमार गार्डन इलाके में हुई दूसरी घटना
थाना शालीमार गार्डन की पुलिस टीम लूट और स्नैचिंग के मामलों में वांछित बदमाशों की तलाश में डीएवी कट पर देर रात संदिग्ध वाहनों की चेकिंग कर रही थी. चेकिंग के दौरान दो संदिग्ध व्यक्ति एक मोटरसाइकिल पर डीएलएफ की ओर से आते दिखे. पुलिस ने रुकने का इशारा किया तो दोनों ने मोटरसाइकिल मोड़कर प्रेम गली के सुनसान रास्ते की ओर भागना शुरू कर दिया. हड़बड़ी में मोटरसाइकिल अनियंत्रित होकर फिसल गई. दोनों बदमाश मोटरसाइकिल छोड़कर भागने लगे. एक बदमाश भागने में सफल रहा, जबकि दूसरे ने पुलिस पर जान से मारने की नीयत से फायरिंग शुरू कर दी. पुलिस टीम ने आत्मरक्षा में जवाबी फायरिंग की, जिसमें बदमाश के दाहिने पैर में गोली लग गई.
तमंचा, कारतूस के साथ चोरी की बाइक बरामद
इस घटना में पुलिस ने गौरव उर्फ कुवैर (22) पुत्र दिलीप, निवासी गरिमा गार्डन, एयरपोर्ट वाली गली, शिव मंदिर के पास, पसौड़ा, थाना टीला मोड़, जिला गाजियाबाद को गिरफ्तार किया है. जबकि उसका साथी पप्पू, निवासी गरिमा गार्डन, थाना टीला मोड़, गाजियाबाद फरार हो गया. गिरफ्तार बदमाश के पास से 1 देशी तमंचा .315 बोर, 1 खोखा कारतूस .315 बोर, 1 जिंदा कारतूस .315 बोर, चोरी की हुई होंडा शाइन मोटरसाइकिल (नीला रंग) बरामद की गई है. बाइक थाना शालीमार गार्डन के मुकदमा संख्या 142/2026 (धारा 303(2) BNS) से संबंधित है.
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पूछताछ में गौरव उर्फ कुवैर ने बताया कि वह और उसका साथी पप्पू शालीमार गार्डन, साहिबाबाद, लिंक रोड और दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में सुबह मॉर्निंग वॉक करने वालों को निशाना बनाकर स्नैचिंग और लूट की घटनाएं करते हैं. वे चोरी की स्कूटी/मोटरसाइकिल का इस्तेमाल करते हैं और लोगों को डराने के लिए अवैध हथियार रखते हैं. 15 अप्रैल 2026 को शालीमार गार्डन एक्सप्रेसवे इलाके में हुई चोरी की घटना में भी दोनों शामिल थे. अभियुक्त का आपराधिक इतिहास रहा है. गौरव पर पहले से ही कई गंभीर मुकदमे दर्ज हैं, जिनमें स्नैचिंग, लूट, चोरी, आर्म्स एक्ट और आबकारी अधिनियम के मामले शामिल हैं.
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म्यांमार की नेता आंग सान सू की जेल से रिहा, घर में नजरबंद
संयुक्त राष्ट्र, 1 मई (आईएएनएस)। म्यांमार की नेता आंग सान सू की को जेल से रिहा कर दिया गया है। उन्हें नजरबंदी (हाउस अरेस्ट) में भेज दिया गया है। यह कदम सैन्य शासन वाले देश में लोकतंत्र का आभास देने के लिए उठाया गया माना जा रहा है, खासकर तब जब सैन्य नेता मिन आंग ह्लाइंग को राष्ट्रपति चुना गया है।
म्यांमार के सूचना मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि राष्ट्रपति ने “नै पि ताव जेल में सजा काट रहीं दाउ आंग सान सू की की बाकी सजा को नजरबंदी में बदलने का फैसला किया है।”
सू की पहले राज्य परामर्शदाता (स्टेट काउंसलर) और लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई नागरिक सरकार की वास्तविक प्रमुख थीं, सरकार को 2021 में सेना ने तख्तापलट करके हटा दिया था।
तख्तापलट का नेतृत्व करने वाले वरिष्ठ जनरल मिन आंग ह्लाइंग, जो अब तक जुंटा प्रमुख थे, 3 अप्रैल को संसद द्वारा राष्ट्रपति चुने गए। यह संसद दिसंबर से जनवरी के बीच हुए चुनावों के बाद, जिसमें सू की की पार्टी नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी (एनएलडी) ने भाग नहीं लिया, क्योंकि 2021 के तख्तापलट के बाद उसे प्रतिबंधित कर दिया गया था।
राष्ट्रपति बनने के बाद, अंतरराष्ट्रीय मान्यता पाने की कोशिश में ह्लाइंग ने सामाजिक सुलह के लिए आम माफी (एमनेस्टी) देने का वादा किया था।
म्यांमार को अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता की जरूरत है क्योंकि उसकी अर्थव्यवस्था कमजोर हो चुकी है, पिछले साल आए विनाशकारी भूकंप से भी हालात बिगड़े हैं, और देश कई जातीय विद्रोहों का सामना कर रहा है।
पूर्व राष्ट्रपति विन म्यिंट को 17 अप्रैल को 4,300 से अधिक राजनीतिक कैदियों के साथ रिहा किया गया था। जुंटा ने इसे म्यांमार के नववर्ष के अवसर पर उठाया गया कदम बताया।
निर्वासित राष्ट्रीय एकता सरकार (एनयूजी), जो पिछली सरकार का प्रतिनिधित्व करती है, ने कहा कि वह “कुछ राजनीतिक कैदियों — जिनमें हमारे राष्ट्रपति यू विन म्यिंट भी शामिल हैं — की रिहाई से संतुष्ट है, जिन्हें सैन्य तानाशाही ने अन्यायपूर्ण तरीके से गिरफ्तार किया था।”
सूचना मंत्रालय ने कहा कि 80 वर्षीय और शारीरिक रूप से कमजोर सू की को नजरबंदी में भेजने का फैसला “राज्य की उदारता और सद्भावना” को दर्शाता है।
यह फैसला “कसोन पूर्णिमा” के अवसर पर भी लिया गया, जो म्यांमार के बौद्धों के लिए पवित्र दिन है और भगवान बुद्ध के जन्म, ज्ञान प्राप्ति और निर्वाण की स्मृति में मनाया जाता है।
सैन्य शासन के दौरान सू की पर वॉकी-टॉकी रखने जैसे मामूली आरोपों से लेकर देशद्रोह और भ्रष्टाचार जैसे गंभीर आरोप लगाए गए और उन्हें कुल 33 साल की सजा सुनाई गई। बाद में इसे घटाकर 22 साल 6 महीने किया गया, और अब इसमें और कटौती की गई है, हालांकि वह नजरबंदी में ही रहेंगी।
दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज से स्नातक सू की, म्यांमार के स्वतंत्रता आंदोलन के नेता आंग सान की बेटी हैं, जिनकी 1948 में आजादी से पहले हत्या कर दी गई थी।
म्यांमार में 1962 के तख्तापलट के बाद से ज्यादातर समय सैन्य शासन रहा है, बीच-बीच में थोड़े समय के लिए लोकतंत्र का राज रहा है।
सू की 1988 में म्यांमार लौटीं और एलएलडी की नेता बनीं। इसके बाद से वह कई बार जेल गईं और नजरबंदी में रही हैं।
उनकी शादी एक ब्रिटिश नागरिक से हुई थी, और इसी आधार पर सेना ने उन्हें राष्ट्रपति बनने से रोक दिया। इसके बाद एनएलडी ने उन्हें “स्टेट काउंसलर” बनाया, जिससे वह सरकार में प्रमुख भूमिका निभा सकीं।
--आईएएनएस
केआर/
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