Bank Holiday: क्या 1 मई को बैंक बंद रहेंगे? घर से निकलने से पहले जरूर कर लें चेक
Bank Holiday on 1st May 2026: कल यानी 1 मई शुक्रवार को बैंक बंद रहने वाले हैं. कल से नए महीने का आगाज हो रहा है और इस दिन छुट्टी है. ऐसे में अगर आप लोग कल के दिन बैंक जाकर कोई काम करवाना चाह रहे हैं तो एकबार अपनी ब्रांच के बारे में जरूर चेक कर लें. आप बैंक की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर चेक कर सकते हैं बैंक खुला है या नहीं. 1 मई को सिर्फ बैंक नहीं बल्कि शेयर बाजार भी बंद रहने वाला है. ऐसे में कल ट्रेडिंग भी बंद रहेगी. जानिए RBI ने क्यों दी है 1 मई की छुट्टी.
शुक्रवार को बैंक बंद रहेंगे
शुक्रवार 1 मई 2026 को बुद्ध पूर्णिमा और लेबर डे के कारण बैंक बंद रहने वाले हैं. देश के सभी राज्यों में लगभग बैंक बंद ही रहने वाले हैं. प्राइवेट सेक्टर से लेकर सरकारी बैंकों की भी कल छुट्टी रहेगी. ऐसे में कल बैंकिंग सुविधा नहीं मिलेगी. मगर ऑनलाइन सुविधाएं मौजूद रहेंगी. ग्राहकों को UPI, मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट बैंकिंग और ATM सुविधा मिलती रहेगी.
क्यों बंद हैं बैंक?
बैंक हॉलिडे की गैजेटेड लिस्ट में कल दो-दो छुट्टियां हैं. 1 मई को बुद्ध पूर्णिमा का पर्व मनाया जा रहा है. भगवान बुद्ध को गौतम बुद्ध के जन्म, ज्ञान प्राप्ति और निर्वाण का दिन माना जाता है. वहीं, मजदूर दिवस (Labour Day) का दिन दुनियाभर में काम करने वाले कामगारों को सम्मान देने के लिए मनाया जाता है.
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महाराष्ट्र में 1 मई को महाराष्ट्र दिवस मनाया जाता है. इस दिन की शुरुआत वर्ष 1960 में बॉम्बे राज्य के विभाजन के बाद महाराष्ट्र राज्य के गठन की याद में हर साल मनाया जाता है. इस दिन पर पंडित रघुनाख मुर्मू जयंती भी मनाई जाती है. उन्हें संताली भाषा का जनक माना जाता है. इस कारण इस दिन ग्रामीण इलाकों में भी कई सरकारी दफ्तर बंद रहते हैं.
मई 2026 में बैंक की छुट्टियों की पूरी लिस्ट
- 1 मई, शुक्रवार- महाराष्ट्र दिवस, बुद्ध पूर्णिमा और लेबर डे.
- 3 मई, रविवार- पूरे देश में छुट्टी
- 9 मई, शनिवार- दूसरा शनिवार + रविंद्रनाथ टैगोर जयंती है.
- 10 मई, रविवार- साप्ताहिक छुट्टी
- 16 मई, शनिवार- कुछ राज्यों में स्टेट डे
- 17 मई, रविवार- पूरे देश में छुट्टी
- 23 मई, शनिवार- चौथा शनिवार
- पूरे देश में बैंक बंद.
- 24 मई, रविवार- वीकली हॉलिडे
- 26 मई, मंगलवार- काजी नजरुल इस्लाम जयंती, कुछ राज्यों में बैंक बंद.
- 27 मई, बुधवार- बकरीद (ईद-उल-अजहा) ज्यादातर राज्यों में बैंक बंद.
- 28 मई, गुरुवार- बकरीद (कुछ राज्यों में)
- 31 मई, रविवार- पूरे देश में छुट्टी
ऑनलाइन बैंकिंग रहेगी चालू
बैंक की छुट्टियों के दौरान चेक क्लियरेंस, कैश जमा करना या निकालने जैसे काम नहीं किए जा सकेंगे. इसके अलावा, पासबुक भी अपडेट नहीं होगा. मगर इसके अलावा, बाकी कई काम ऑनलाइन और मोबाइल बैंकिंग के जरिए आसानी से घर बैठे किए जा सकते हैं. अगर आपको बैंक से जुड़ा कोई जरूरी काम करना है, तो इन छुट्टियों को ध्यान में रखते हुए पहले ही उन्हें निपटा लें.
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निक्सन से ओबामा तक चुनौती में रहा 'वॉर पावर्स एक्ट': ट्रंप ने दी 1 मई की डेडलाइन, आखिर अहम क्यों
वाशिंगटन/नई दिल्ली, 30 अप्रैल (आईएएनएस)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई क्या 1 मई 2026 के बाद जारी रहेगी? सवाल यह है कि क्या 1 मई के बाद भी अमेरिका यह कार्रवाई जारी रख सकता है या उसे रुकना होगा!
अमेरिका ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ सैन्य हमला शुरू किया था, लेकिन इसकी अमेरिकी संसद को इसकी औपचारिक जानकारी 2 मार्च को दी गई। यही तारीख इस पूरे मामले में निर्णायक बनती है, क्योंकि इस आधार पर 60 दिन की समयसीमा तय होती है। यह समयसीमा अमेरिकी कानून वॉर पावर रेजोल्यूशन के तहत आती है।
1973 में लागू इस कानून का उद्देश्य राष्ट्रपति की युद्ध संबंधी शक्तियों को सीमित करना और कांग्रेस की भूमिका को मजबूत करना था। इसके अनुसार, यदि राष्ट्रपति बिना संसद की मंजूरी के सेना का इस्तेमाल करते हैं, तो उन्हें 60 दिनों के भीतर कांग्रेस से इसकी अनुमति लेनी होती है। इस मामले में 2 मार्च से गिनती करने पर 1 मई वह अंतिम तारीख बनती है, जिसके भीतर ट्रंप प्रशासन को संसद की मंजूरी हासिल करनी होगी। अगर ऐसा नहीं होता, तो कानून के मुताबिक सैन्य कार्रवाई समाप्त करनी चाहिए।
मंजूरी हासिल करने के लिए अमेरिकी संसद—यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट—दोनों में साधारण बहुमत आवश्यक होता है। लेकिन, अब तक इस कार्रवाई को लेकर कोई औपचारिक मंजूरी नहीं मिली है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप की अपनी पार्टी के कम से कम 10 सांसद इस युद्ध के खिलाफ हैं, जिससे बहुमत जुटाना कठिन हो सकता है।
हालांकि कानून स्पष्ट रूप से 60 दिन की सीमा तय करता है, लेकिन व्यवहार में स्थिति इतनी सीधी नहीं रही है। कई अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने अतीत में वॉर पावल रेजोल्यूशन के प्रावधानों को पूरी तरह नहीं माना है। इनमें निक्सन, रोनाल्ड रीगन, जॉर्ज डब्ल्यू बुश, बिल क्लिंटन, ओबामा और खुद ट्रंप रहे हैं। उनका तर्क रहा है कि यह कानून राष्ट्रपति की संवैधानिक शक्तियों में हस्तक्षेप करता है, खासकर जब बात राष्ट्रीय सुरक्षा और त्वरित सैन्य कार्रवाई की हो।
यदि कांग्रेस से मंजूरी नहीं मिलती, तो भी राष्ट्रपति किसी न किसी कानूनी व्याख्या या राष्ट्रीय सुरक्षा के तर्क के आधार पर सैन्य कार्रवाई जारी रखने की कोशिश कर सकते हैं। इससे कार्यपालिका और विधायिका के बीच टकराव की स्थिति भी बन सकती है।
1 मई की समयसीमा केवल कानूनी नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी बेहद अहम बन गई है। जिसमें ये देखना वाकई दिलचस्प होगा कि ट्रंप प्रशासन कांग्रेस से समर्थन हासिल करने में कामयाब रहता है या नहीं—और अगर नहीं, तो क्या वह कानून का पालन करेगा या फिर पहले की तरह परंपरा को चुनौती देने में यकीन रखेगा। क्या इस बार कांग्रेस और व्हाइट हाउस के बीच सहमति बनती है या फिर एक नया संवैधानिक विवाद खड़ा हो जाएगा?
--आईएएनएस
केआर/
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