मुकेश खन्ना बोले- रणवीर सिंह के चेहरे पर नेगेटिविटी है:वो शक्तिमान के रोल के लिए सही नहीं; किलविश का रोल कर सकते हैं
एक्टर मुकेश खन्ना ने रणवीर सिंह को एक बार फिर ‘शक्तिमान’ के रोल के लिए सही नहीं बताया। उन्होंने कहा कि रणवीर के चेहरे पर “नेगेटिविटी” दिखती है, इसलिए वे उन्हें इस किरदार में नहीं देखना चाहते, हालांकि उनकी एक्टिंग की तारीफ की। ‘धुरंधर’ और ‘धुरंधर 2’ में रोल के लिए रणवीर सिंह को इन दिनों काफी सराहना मिल रही है। दोनों ही फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया। वहीं हिंदुस्तान टाइम्स के साथ बातचीत में जब मुकेश खन्ना से पूछा गया कि ‘धुरंधर’ देखने के बाद रणवीर सिंह को लेकर क्या उनकी राय बदली है, तो उन्होंने कहा, “सब लोग मुझे मनाने में लगे हैं कि फिल्म चल गई, अब रणवीर बहुत बड़े एक्टर बन गए हैं, लेकिन मैं शक्तिमान के लिए बड़ा स्टार नहीं चाहता। मुझे उस रोल के लिए एक खास इमेज चाहिए, जो मुझे रणवीर में नहीं दिखती। इसलिए मैंने इसका विरोध किया। मैं उनकी एक्टिंग के खिलाफ नहीं हूं।” किलविश के रोल के लिए सही बताया अपने विरोध की वजह बताते हुए खन्ना ने कहा, “वो (रणवीर सिंह) अलाउद्दीन खिलजी जैसा किरदार कर सकता है, ‘गली बॉय’ कर चुका है, ‘धुरंधर’ भी बहुत अच्छा किया है, मैंने उसकी तारीफ भी की, लेकिन मेरे लिए शक्तिमान बनने के लिए सिर्फ अच्छा एक्टर होना काफी नहीं है, एक खास चेहरा भी चाहिए। वो चेहरा शक्तिमान पर सूट करना चाहिए। मेरा विरोध सिर्फ इतना है कि उसकी आंखों में शक्तिमान दिखना चाहिए। जब वो खड़ा हो, तो उसमें कोई चालाकी नहीं दिखनी चाहिए। मैं रणवीर को किलविश (विलेन) के रोल में साइन कर सकता हूं, लेकिन शक्तिमान के लिए नहीं। उसके चेहरे पर नेगेटिविटी दिखती है, पॉजिटिविटी नहीं।” वहीं शक्तिमान पर फिल्म बनने को लेकर उन्होंने कहा, “फिल्म आनी चाहिए, जरूर आनी चाहिए। रुकावट के लिए खेद है। सब जानते हैं कि दिक्कत क्या है और मेरा विरोध क्या है।”
यूपी चुनाव से पहले बड़ी साजिश में जुटी आईएसआई, जासूसी गतिविधियों पर एजेंसियों की नजर
नई दिल्ली, 30 अप्रैल (आईएएनएस)। खुफिया एजेंसियों के अनुसार पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले बड़ी साजिश रचने में जुटी है। अधिकारियों का कहना है कि आईएसआई लंबी रणनीति के तहत काम कर रही है और बड़े हमले की तैयारी से पहले ध्यान भटकाने, निगरानी और प्रचार तंत्र के जरिए माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रही है।
अधिकारियों के मुताबिक यूपी चुनाव बड़ा राजनीतिक आयोजन है और इसके मद्देनजर आईएसआई कई हमलों की साजिश रच सकती है। इसके लिए उसके समर्थित तत्व सीसीटीवी कैमरे लगाने, जासूसी गतिविधियों में शामिल होने और संवेदनशील स्थानों की जानकारी जुटाने जैसे काम कर रहे हैं।
एक खुफिया अधिकारी ने बताया कि अचानक बढ़ी ऐसी गतिविधियों का मकसद भारतीय एजेंसियों को अलग-अलग मामलों में उलझाए रखना है, ताकि बड़े हमले की साजिश को अंजाम दिया जा सके।
अधिकारियों ने कहा कि इन तत्वों का मकसद सिर्फ हमला करना नहीं, बल्कि सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ना भी है। कई इंटरसेप्ट्स में संकेत मिले हैं कि प्रचार चैनलों को शांति और सद्भाव बिगाड़ने के लिए सक्रिय किया गया है।
सूत्रों के मुताबिक आईएसआई की नजर सिर्फ यूपी के बड़े शहरों पर नहीं, बल्कि दूसरे दर्जे के शहरों और गांवों पर भी है। मकसद एजेंसियों को भ्रमित करना और अचानक हमला करना है।
हाल ही में गाजियाबाद पुलिस ने एक ऐसे मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया था, जो रेलवे स्टेशनों और अन्य संवेदनशील स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगा रहा था। सोलर पावर कैमरों के जरिए लाइव फीड पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स तक पहुंचाई जा रही थी। इसके बाद देशभर में सीसीटीवी ऑडिट कराया गया।
एजेंसियों को आशंका है कि बड़ी संख्या में कैमरे पहले से ही जुटाए जा चुके हैं। अधिकारियों का कहना है कि यूपी चुनाव से पहले इसी रणनीति को दोहराया जा सकता है।
सूत्रों के मुताबिक सड़क किनारे ढाबों और दुकानों पर कैमरे लगाकर चुनाव प्रचार के दौरान बड़े नेताओं के रूट पर नजर रखने की योजना हो सकती है।
अधिकारियों ने यह भी कहा कि आईएसआई उत्तर प्रदेश में पहले से मौजूद नेटवर्क का इस्तेमाल कम कर सकती है। शक से बचने के लिए दूसरे राज्यों के लोगों का इस्तेमाल किया जा सकता है, जिनका स्थानीय पुलिस रिकॉर्ड में नाम नहीं हो।
खुफिया एजेंसियों का मानना है कि अलग-अलग राज्यों में जासूसी और आतंकी मॉड्यूल पकड़े जाने के बावजूद अन्य क्षेत्रों में हो रही गतिविधियों पर भी करीबी नजर रखना जरूरी है। लगातार पैदा किया जा रहा ध्यान भटकाव किसी बड़ी योजना का हिस्सा हो सकता है।
सूत्रों के अनुसार भारत द्वारा पाकिस्तान से जुड़े हर आतंकी हमले को युद्ध जैसी कार्रवाई मानने की नीति के बाद आईएसआई ने अपनी रणनीति बदली है। अब वह ऐसे हमले करवाना चाहती है, जो पूरी तरह घरेलू नेटवर्क की करतूत लगें और जिनका सीधा संबंध पाकिस्तान से न जुड़ सके।
अधिकारियों ने कहा कि आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान पर एफएटीएफ की नजर भी है। ऐसे में वह दोबारा ग्रे लिस्ट में नहीं जाना चाहता, इसलिए आतंकी फंडिंग और गतिविधियों को छिपाने के नए तरीके अपनाए जा रहे हैं।
--आईएएनएस
डीएससी
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