नेपाल के गृह मंत्री सुदन गुरुंग का इस्तीफा:मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपी से संबंधों पर विवाद, एक महीने में दो मंत्री सरकार से बाहर
नेपाल के गृह मंत्री सुदन गुरुंग ने बुधवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन पर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपी और कारोबारी दीपक भट्ट से संबंध का आरोप है। इसके अलावा निवेश और वित्तीय लेनदेन को लेकर भी सवाल उठे हैं। नेपाल के अखबार कांतिपुर की रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने निष्पक्ष जांच और हितों के टकराव से बचने के लिए पद छोड़ने की बात कही। गुरुंग ने फेसबुक पोस्ट में लिखा, ‘मैंने अपने खिलाफ उठे सवालों को गंभीरता से लिया है। मेरे लिए नैतिकता किसी भी पद से बड़ी है और जनता का भरोसा सबसे बड़ी ताकत है।’ यह नेपाल की नई सरकार में एक महीने के भीतर दूसरा मामला है, जब किसी मंत्री को पद छोड़ना पड़ा है। इससे पहले 9 अप्रैल को श्रम, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा मंत्री दीपक कुमार साह को अनुशासनहीनता के आरोप में हटाया गया था। दीपक भट्ट की गिरफ्तारी के बाद गुरुंग पर सवाल उठे स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गुरुंग के कारोबारी दीपक भट्ट से संबंधों को लेकर विवाद हुआ। दीपक भट्ट को मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया गया है और मामले की जांच जारी है। भट्ट की गिरफ्तारी के बाद गुरुंग की वित्तीय गतिविधियों, निवेश और शेयर को लेकर सवाल उठने लगे थे। मीडिया में उनके कथित संबंध और असामान्य ट्रांजैक्शन पर लगातार रिपोर्ट्स आईं। कांतिपुर को मिले बैंक रिकॉर्ड के अनुसार, गुरुंग के निजी खाते, उनकी संस्था ‘हामी नेपाल’ और कंपनियों के बीच बड़े पैमाने पर लेनदेन हुए। इनमें कई ट्रांजैक्शन ऐसे हैं, जिनका सोर्स और उद्देश्य साफ नहीं हैं। रिकॉर्ड बताते हैं कि ‘हामी नेपाल’ के खाते हिमालयन बैंक और नबिल बैंक में थे। फरवरी 2025 में हिमालयन बैंक का खाता बंद किया गया, जिसमें 53.4 लाख रुपए थे। इसमें से 30.9 लाख रुपये नबिल बैंक में ट्रांसफर किए गए। नबिल बैंक खाते में जुलाई 2021 से अगस्त 2025 के बीच 2.28 करोड़ रुपये जमा हुए। इनमें 2015 में मनीता देवकोटा नाम के व्यक्ति ने 4.40 लाख रुपये ट्रांसफर किए, जिनकी पहचान सार्वजनिक नहीं है। निजी खाते में कोविड फंड और कैश जमा रिकॉर्ड के मुताबिक, 2021 में गुरुंग के निजी खाते में करीब 60 लाख रुपये आए, जो कोविड सहायता के तौर पर जुटाए गए थे। इनमें से 25.9 लाख रुपये बाद में संस्था के खाते में ट्रांसफर किए गए। इससे यह सवाल उठता है कि सहायता राशि पहले निजी खाते में क्यों आई। इसके अलावा अलग-अलग लोगों ने उनके खाते में बड़ी रकम जमा की। 9 मई 2023 को चांग अग्रवाल और विजय कुमार श्रेष्ठ ने 22.5 लाख और 37.5 लाख रुपए जमा किए। अगले दिन 10 मई को गुरुंग ने 25-25 लाख रुपये लिबर्टी माइक्रो लाइफ इंश्योरेंस और स्टार माइक्रो इंश्योरेंस में ट्रांसफर किए। रिकॉर्ड के अनुसार, उनके पास इन दोनों कंपनियों में 25-25 हजार शेयर हैं। हालांकि गुरुंग का कहना है कि उन्होंने ये शेयर लोन लेकर खरीदे, लेकिन जमा करने वालों और लोन देने वाले के बीच संबंध साफ नहीं है। नेपाल में Gen Z आंदोलन का प्रमुख चेहरा थे गुरुंग गुरुंग सितंबर 2025 में हुए Gen Z आंदोलन के प्रमुख चेहरों में रहे थे। उनकी उम्र 36 साल है, जिस पर यह सवाल भी उठा कि वे Gen Z का हिस्सा नहीं हैं। उन्हें 27 मार्च को बालेंद्र शाह के नेतृत्व में बनी राष्ट्रिय स्वतंत्र पार्टी की सरकार में गृहमंत्री बनाया गया। नियुक्ति के अगले ही दिन उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक की गिरफ्तारी के आदेश दिए थे। दोनों नेताओं को 28 मार्च की सुबह गिरफ्तार किया गया था। पुलिस के मुताबिक, यह कार्रवाई 8 सितंबर को Gen Z प्रदर्शनों के पहले दिन हुई लापरवाही से हुई मौतों के मामले में जांच आयोग की सिफारिश पर हुई थी। हालांकि बाद में दोनों को रिहा कर दिया गया। बालेन शाह सरकार के विवादित फैसले भारत से आने वाले सामान पर सख्ती- नई सरकार ने 100 रुपये से ज्यादा कीमत वाले सामान पर अनिवार्य शुल्क लगा रही है। सीमा के लोग और व्यापारी का कहना है कि, यह फैसला आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ है। छात्र राजनीति पर रोक- सरकार ने कॉलेजों में छात्र संघों और राजनीतिक गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। छात्रों का कहना है कि यह उनके लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है। पूर्व नेताओं पर कार्रवाई- सत्ता में आते ही उन्होंने भ्रष्टाचार और पुरानी मौतों के मामलों में पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और अन्य बड़े नेताओं के खिलाफ जांच और गिरफ्तारी के आदेश दिए, जिसे कुछ लोग बदले की राजनीति बता रहे हैं। शिक्षा में बदलाव- कक्षा 5 तक पारंपरिक परीक्षाएं खत्म करने का फैसला भी विवाद में रहा। ----------------------------- ये खबर भी पढ़ें… नेपाल में भ्रष्टाचार के खिलाफ सबसे बड़ी जांच शुरू: 7 पूर्व PM, 3 राष्ट्रपति, राजा की संपत्ति की जांच, 100 मंत्री अधिकारी भी दायरे में नेपाल में भ्रष्टाचार के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई शुरू हो गई है। प्रधानमंत्री बालेन शाह की सरकार ने 5 सदस्यीय न्यायिक पैनल बनाया है, जो 2006 से लेकर 2025-26 तक सार्वजनिक पदों पर रहे लोगों की संपत्ति की जांच करेगा। जांच के दायरे में 2005-06 के बाद के सभी 7 प्रधानमंत्रियों को भी शामिल किया गया है। इनमें सुशील कोईराला, पुष्प कमल दहल, माधव कुमार नेपाल, झलनाथ खनाल, बाबूराम भट्टराई, केपी शर्मा ओली और शेर बहादुर देउबा शामिल हैं। इसके साथ ही दो अंतरिम सरकारों के प्रमुख खिलराज रेग्मी और सुशीला कार्की भी जांच के दायरे में आएंगे। पूरी खबर पढ़ें…
जर्मन एयरलाइन लुफ्थांसा ने 20 हजार फ्लाइट्स रद्द कीं:ईरान जंग से ईंधन महंगा; यूरोप में सिर्फ 6 हफ्ते का जेट फ्यूल बाकी
जर्मनी की एयरलाइन लुफ्थांसा ने मई से अक्टूबर तक 20 हजार शॉर्ट-हॉल फ्लाइट्स रद्द करने का फैसला लिया है। ईरान जंग के कारण यूरोप में जेट फ्यूल की कीमतें लगभग दोगुनी हो चुकी हैं। कंपनी के मुताबिक इससे करीब 40 हजार टन जेट फ्यूल की बचत होगी। कंपनी ने सोमवार से रोजाना करीब 120 उड़ानें घटाई हैं। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद रहने से तेल सप्लाई प्रभावित हुई और यूरोप में जेट फ्यूल सप्लाई की चिंता बढ़ी है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने चेतावनी दी है कि यूरोप के पास केवल 6 हफ्तों का जेट फ्यूल बचा है। नेटवर्क में बड़े बदलाव, घाटे वाले रूट बंद लुफ्थांसा ने मंगलवार को कहा कि वह अपने छोटे रूट के नेटवर्क में बदलाव करके गर्मियों का फ्लाइट शेड्यूल स्थिर रखेगी। कंपनी अप्रैल के आखिर या मई की शुरुआत में पूरी योजना जारी करेगी। कंपनी ने अपने नेटवर्क में बड़े बदलाव किए हैं। फ्रैंकफर्ट और म्यूनिख से घाटे वाले रूट बंद किए जा रहे हैं, जबकि ज्यूरिख, ब्रसेल्स और वियना से उड़ानें बढ़ाई जाएंगी। इससे यात्रियों को लंबी दूरी की उड़ानों से बेहतर कनेक्शन मिलेगा। गर्मियों के अंत तक लंबी दूरी की उड़ानों की क्षमता थोड़ी कम की जाएगी। 6 बड़े विमान हटाए जाएंगे, 2 बोइंग 747 सर्दियों में नहीं उड़ेंगे और 4 एयरबस A340-600 विमान अक्टूबर में हमेशा के लिए बंद कर दिए जाएंगे। खर्च कम करने के लिए कंपनी अपने सिटीलाइन बेड़े के 27 विमान भी बंद कर रही है। इसके पीछे महंगा ईंधन और कर्मचारियों से जुड़े विवाद मुख्य वजह बताए गए हैं। यूरोप में जेट फ्यूल की किल्लत ईरान जंग के कारण होर्मुज स्ट्रेट पर शुरुआत से तनाव बना हुआ है। इससे ईंधन और गैस सप्लाई प्रभावित हुआ है। हालांकि, यूरोप के ट्रांसपोर्ट मंत्री जेट फ्यूल की कमी से निपटने के उपायों पर चर्चा कर रहे हैं। यूरोपीय संघ (EU) वैकल्पिक अमेरिकी जेट फ्यूल और बाहर से ज्यादा फ्यूल भरने की अनुमति जैसे विकल्पों पर विचार कर रहा है। यूरोप की रयानएयर एयरलाइन के प्रमुख माइकल ओ लेरी ने चेतावनी दी कि अगर होर्मुज स्ट्रेट बंद रहा तो मई से सप्लाई बाधित हो सकती है। दुनिया भर की एयरलाइंस पर असर, टिकट महंगे दुनिया भर की एयरलाइंस पर इसका असर दिख रहा है। अमेरिका की डेल्टा एयरलाइंस ने करीब 3.5% नेटवर्क में कटौती कर 1 बिलियन डॉलर बचाने की योजना बनाई है। हांगकांग की कैथे पैसिफिक, मलेशिया की एयर एशिया X और न्यूजीलैंड की एयर न्यूजीलैंड जैसी एयरलाइंस भी रूट कम कर रही हैं। कई एयरलाइंस ने टिकट महंगे किए हैं या फ्यूल सरचार्ज लगाया है। यूरोप की ईजीजेट ने ईंधन महंगा होने से ज्यादा घाटे की चेतावनी दी है। जबकि ब्रिटिश एयरलाइन वर्जिन अटलांटिक ने कहा कि कीमतें बढ़ाने के बावजूद इस साल मुनाफा मुश्किल रहेगा। जेट फ्यूल महंगाई से यात्रियों पर असर जेट फ्यूल महंगा होने का सीधा असर यात्रियों की जेब पर पड़ रहा है। एयरलाइंस की कुल लागत में फ्यूल का हिस्सा 25% से 40% तक होता है। फ्यूल कीमतें बढ़ते ही कंपनियां टिकट महंगे करती हैं या फ्लाइट्स घटाती हैं। रूट नेटवर्क में बदलाव का मतलब है कि कई डायरेक्ट फ्लाइट्स बंद हो सकती हैं। यात्रियों को कनेक्टिंग फ्लाइट्स लेनी पड़ सकती हैं, जिससे यात्रा का समय और ट्रांजिट का झंझट बढ़ेगा। ------------------------------ ये खबर भी पढ़ें… ईरान युद्ध के कारण यूरोप में जेट फ्यूल का संकट:6 हफ्ते का स्टॉक बचा; दुनियाभर में रद्द हो सकती हैं फ्लाइट्स, हवाई सफर महंगा होगा ईरान युद्ध और होर्मुज रूट बंद होने से यूरोप और एशिया में जेट फ्यूल की भारी कमी होने वाली है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के मुताबिक, यूरोप के पास अब सिर्फ 6 हफ्ते का तेल बचा है। अगर सप्लाई जल्द शुरू नहीं हुई, तो गर्मियों की छुट्टियों के सीजन में फ्लाइट्स रद्द होंगी और टिकट के दाम बढ़ेंगे। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के डायरेक्टर फातिह बिरोल ने एक इंटरव्यू में बताया कि ग्लोबल इकोनॉमी अब तक के सबसे बड़े ऊर्जा संकट का सामना कर रही है। यूरोप के कुछ देशों के पास आमतौर पर कई महीनों का जेट फ्यूल स्टॉक होता है, लेकिन युद्ध की वजह से अब यह तेजी से घट रहा है। पूरी खबर पढ़ें…
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