परमवीर ने ‘मर्दानी3’ और ‘धुरंधर’ का ऑफर ठुकरा दिया था:बोले- सही वक्त नहीं था, सीरीज की स्टारकास्ट बोली- सपना टूटना मरने जैसा है
सीरीज ‘सपने वर्सेस एवरीवन’ का दूसरा सीजन सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि संघर्ष, टूटने और फिर खड़े होने की असली जर्नी है। दैनिक भास्कर से बातचीत में लेखक- निर्देशक-एक्टर अंबरीश वर्मा, एक्टर परमवीर सिंह चीमा और विजयंत कोहली ने खुलकर बताया कि कैसे यह शो उनकी जिंदगी के बेहद करीब है। जहां अंबरीश इसे जिम्मेदारी मानते हैं, वहीं परमवीर मानते हैं कि इस शो ने उन्हें अंदर से बदला। बातचीत में रिजेक्शन, बर्नआउट, और सपनों के टूटने का दर्द भी सामने आया, साथ ही ‘धुरंधर’ और ‘मर्दानी 3’ जैसे बड़े प्रोजेक्ट छोड़ने के फैसले पर भी साफ जवाब मिले। पेश है कुछ प्रमुख अंश.. सवाल ‘सपने वर्सेस एवरीवन’ आपके लिए क्या मायने रखता है? सीजन 2 कितना खास है? जवाब/अंबरीश वर्मा: ये मेरे जीवन का सबसे क्लोज शो है। इसकी कहानियां बहुत पर्सनल हैं और ऐसी कहानियां बार-बार नहीं मिलतीं, जो किसी की सोच या जिंदगी बदल सकें। सीजन 2 मेरे लिए सिर्फ करियर का मौका नहीं, एक जिम्मेदारी है- कुछ ऐसा कहने की, जो लोगों पर असर डाले। विजयंत कोहली: सीजन 1 एक हैप्पी एंडिंग पर खत्म हुआ था, इसलिए लोगों के मन में सवाल था कि सीजन 2 आएगा या नहीं। लेकिन जब पहला सीजन इतना पसंद किया गया, तो दूसरा बनाना एक जिम्मेदारी बन गया। इस बार एक्सपेक्टेशन भी ज्यादा है। परमवीर सिंह चीमा: ये शो सिर्फ अच्छा नहीं है, लोगों को मोटिवेट करता है। इसने मुझे भी अंदर से बदला है। मैं आज भी इसे देखकर खुद को याद दिलाता हूं कि अपने असली स्वभाव से मत भटक। सवाल : क्या इस शो ने आपकी सोच बदली? जवाब/परमवीर सिंह चीमा: हां, बहुत। इंडस्ट्री में धीरे-धीरे इंसान थोड़ा शातिर हो जाता है, लेकिन इस शो ने मुझे खुद के मूल्यों पर टिके रहने की याद दिलाई। जब भी नेगेटिव सोच आती है, मैं खुद से कहता हूं- “डर छोड़, आगे बढ़।” सवाल: सपना टूटना मरने जैसा है, क्या आपने ऐसा महसूस किया है? जवाब/परमवीर सिंह चीमा: हर इंसान इस फेज से गुजरता है। कोविड के दौरान मैंने सपने छोड़ भी दिए थे और घर लौट गया था। कई बार इतना बर्नआउट हो जाता है कि लगता है सब खत्म हो गया। लेकिन फिर खुद को टाइम देकर, थोड़ा रुककर, फिर से उठना पड़ता है, यही असली जंग है। सवाल: क्या कभी लगा कि ये जंग छोड़ दें? जवाब/परमवीर सिंह चीमा: हां, कोविड के समय छोड़ दिया था। पैसों की दिक्कत थी, सर्वाइवल मुश्किल था। मैं किसान परिवार से हूं, जानता था घर से पैसे कैसे आ रहे हैं। लेकिन मेरे पिता ने कहा- “मैं तेरे साथ हूं, तू क्यों हार मान रहा है?” वही बात मेरे लिए टर्निंग पॉइंट बनी। सवाल: अंबरीश, आपकी कहानी इतनी रिलेटेबल कैसे बनी? क्या आप खुद टूटे हैं? जवाब/अंबरीश वर्मा: टूटना हर किसी की जिंदगी का हिस्सा है। पहले ये चीजें मुझे बहुत ज्यादा हिट करती थीं और लंबे समय तक असर रहता था। फिर समझ आया कि हम चीजों को जरूरत से ज्यादा महत्व दे देते हैं, इसलिए दर्द ज्यादा होता है। जब पर्सपेक्टिव बदलता है, तो वही चीजें उतनी भारी नहीं लगतीं। सवाल: लाइफ में मंजिल ज्यादा जरूरी है या सफर? जवाब/अंबरीश वर्मा: हम लाइफ को माइलस्टोन्स से जोड़ देते हैं- जैसे प्रमोशन, पैसा, शादी। लेकिन असल लाइफ वो है जो इनके बीच में होती है। जब ये समझ आता है, तो चीजों का असर कम हो जाता है। विजयंत कोहली: हम भागते रहते हैं, लेकिन रुककर जीना भूल जाते हैं। अगर छोटी खुशियां एन्जॉय नहीं कीं, तो ये दौड़ कभी खत्म नहीं होगी। सवाल : सबसे बड़ा चांस क्या मिला जिंदगी में? जवाब/परमवीर सिंह चीमा: इस शो में मुझे नॉन-पंजाबी किरदार मिला, यही मेरे लिए लाइफ-चेंजिंग मौका था। इससे लोगों ने मुझे एक अलग नजर से देखना शुरू किया। अंबरीश वर्मा: नौकरी छोड़कर लिखना शुरू करना सबसे बड़ा चांस था। कुछ भी नहीं था, लेकिन वही रिस्क मेरी जिंदगी बदल गया। विजयंत कोहली: इस शो ने मेरी “सॉफ्ट” इमेज तोड़ी और मुझे एक अलग तरह का किरदार निभाने का मौका दिया। सवाल: सबसे मुश्किल दौर या रिजेक्शन? जवाब/अंबरीश वर्मा: 2019 में नौकरी छोड़ने के बाद कोई काम नहीं था। गिल्ट और डर दोनों थे- क्या कर रहा हूं मैं? वो फेज बहुत भारी था, लेकिन वहीं से रास्ता बना। विजयंत कोहली: एक्टर की जिंदगी में रिजेक्शन रोज होता है। इसे स्वीकार करना ही सबसे बड़ी सीख है। सवाल : क्या कभी लगा कि फैसला गलत था? जवाब/अंबरीश वर्मा: अगर आप किसी से पूछ रहे हो कि छोड़ूं या नहीं , तो आप तैयार नहीं हो। जब आप अंदर से कन्विंस्ड होते हो, तो खुद ही कदम उठाते हो। मैंने भी बिना पूछे नौकरी छोड़ी थी। सवाल: ‘मर्दानी 3’ और ‘धुरंधर’ जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स छोड़ने की खबरें आईं, सच क्या है? जवाब/परमवीर सिंह चीमा: ‘मर्दानी 3’ का मामला सीधा था, उस समय मैं एक ही फिल्म कर सकता था। मेरे पास ऑप्शन था ‘तेरे इश्क में’ और ‘मर्दानी 3’ का। मैंने ‘तेरे इश्क में’ चुनी, क्योंकि मैं आनंद सर के साथ काम करना चाहता था और उस वक्त वही सही लगा। जहां तक ‘धुरंधर’ जैसे रोल की बात है तो हर रोल की एक टाइमिंग होती है। अगर वही रोल मुझे 2 साल पहले मिलता, तो शायद मैं कर लेता। लेकिन अब लगा कि वो मेरे लिए सही फिट नहीं है। मैं मानता हूं कि हर इंसान की अपनी किस्मत और अपनी यात्रा होती है। और एक बात, अगर मैं हर रोल खुद ही करता रहूंगा, तो बाकी लोग क्या करेंगे? सवाल: क्या अब आपको सपने जैसे ही रोल ऑफर होते हैं? जवाब/परमवीर सिंह चीमा: हां, कई बार कॉल आते हैं कि “सपने वाला ही किरदार करना है।” लेकिन मैं साफ कहता हूं, अगर वही करना है, तो किसी और को ले लो। मैं खुद को रिपीट नहीं करना चाहता। विजयंत कोहली: मेरे साथ भी ऐसा होता है। लोग उसी तरह का रोल ऑफर करते हैं। तब हमें कहना पड़ता है,थोड़ा अलग लिखो, कुछ नया दो, तभी मजा आएगा। सवाल : सबसे यादगार मौका या चांस? जवाब/परमवीर सिंह चीमा: जब अंबरीश भाई ने मुझे इस किरदार के लिए चुना, वो मेरे लिए लाइफ-चेंजिंग था। मैं आज भी उन्हें मैसेज करके कहता हूं, आपने मुझे मेरी जिंदगी का बेस्ट किरदार दिया। अंबरीश वर्मा: मेरे लिए भी ये लकी था कि मुझे ऐसे एक्टर्स मिले, जो किरदार में फिट बैठते हैं। इससे मेरा काम आसान हुआ। सवाल: इस शो का असली मैसेज क्या है? जवाब/अंबरीश वर्मा: अगर आपका काम किसी की जिंदगी में थोड़ा भी बदलाव ला सके, तो वही सबसे बड़ी सफलता है। परमवीर सिंह चीमा: ये शो सिखाता है- डर होगा, गिरोगे, लेकिन खुद को मत छोड़ो। विजयंत कोहली: और सबसे जरूरी- सफर को जीना सीखो, सिर्फ मंजिल के पीछे मत भागो।
पुण्यतिथि:ऋषि कपूर को सलमान के पिता ने धमकाया:राज कपूर ने सिगरेट पीने पर पीटा, दाऊद के साथ चाय पी, कभी अमिताभ का अवॉर्ड खरीदा
30 अप्रैल 2020 आज से 6 साल पहले सुबह खबर आई कि ऋषि कपूर अब नहीं रहे। कुछ दिन पहले तक वो गंभीर हालत होने के बावजूद हॉस्पिटल स्टाफ को हंसाते तो कभी गाना सुना रहे थे। दैनिक भास्कर से बात करते हुए ऋषि कपूर की इकलौती बेटी रिद्धिमा कहती हैं, ‘सब अचानक हुआ, वो बहुत डरावना दिन था। अचानक एक खालीपन आ गया। एक सूनापन, उनकी जिंदगी उनकी मौजूदगी लार्जर देन लाइफ थी।’ ऋषि कपूर 3 साल के थे, जब वो पिता राज कपूर की फिल्म ‘श्री 420’ में चॉकलेट की लालच में नजर आए। तब से उनका सिनेमा से ऐसा रिश्ता जुड़ा, जो ताउम्र कायम रहा। 1973 की फिल्म ‘बॉबी’ से फिल्मों में आए ऋषि कपूर उर्फ चिंटू ने ‘रफूचक्कर’, ‘कर्ज’, ‘प्रेम रोग’, ‘चांदनी’ जैसी बेहतरीन फिल्में कीं। बढ़ती उम्र के साथ उन्होंने ‘अग्निपथ’, ‘स्टूडेंट ऑफ द ईयर’, ‘कपूर एंड संस’, ‘नमस्ते लंदन’, 102 नॉट आउट जैसी फिल्में कीं। रिद्धिमा कहती हैं, ‘उनमें सिनेमा के लिए जुनून था। बहुत पैशनेट थे। हम उनकी फिल्मों के सेट पर जाते थे। वो एक कोने में किरदार की तैयारी करते थे।’ जब हमने रिद्धिमा से पूछा कि उन्हें कब पता चला कि उनके पिता इतने बड़े स्टार हैं, तो जवाब में हंसते हुए उन्होंने कहा- ‘स्कूल में। जब टीचर हमें कहती थी कि हमने कल आपके पापा की फिल्म देखी, बड़ा मजा आया। फ्रेंड्स भी बोलते थे कि तुम्हारे पापा और मम्मा कितने फेमस हैं। जब हम खाने बाहर जाते थे तो भी इतने सारे लोग आकर ऑटोग्राफ लेते थे। तो हम सोचते थे कि इतनी सारी भीड़ क्यों इकट्ठा हो रही है? हम पूछते थे कि आप क्या लिख रहे हो, तो वो समझाते थे, हम एक्टर हैं, क्योंकि हम फिल्म में काम करते हैं।’ रिद्धिमा कहती हैं कि ऋषि कपूर भले ही एक स्टार थे, लेकिन परिवार के लिए वो एक बेहतरीन फैमिली मैन थे, जिनके लिए प्रायोरिटी हमेशा परिवार था। रिद्धिमा कहती हैं, ‘वो हमें बहुत वेकेशन पर ले जाते थे, जब शूटिंग करते थे, तो हमारी समर वेकेशन ऐसे प्लान करते थे कि काम भी हो जाए और घूम भी सकें। जो करते थे हमारे अराउंड करते थे। वो हमें सबसे पहले तवज्जो देते थे। उन्होंने परिवार को हमेशा प्रायोरिटी दी।’ ‘हमारी शनिवार को छुट्टी होती थी, वो शाम को बिजी रहते थे, तो हमें दिन में लंच पर ले जाते थे। उन्होंने एक गेम भी बनाया था, रेपिड फायर जैसा। कार में वो आगे और मैं, रणबीर, मम्मा पीछे बैठते थे। वो जल्दी-जल्दी 10 सवाल पूछते थे, सही जवाब देने वाले को ट्रीट मिलती थी।’ ऋषि कपूर का अचानक दुनिया से रुख्सत होना, परिवार के लिए जोरदार धक्का था। इस पर रिद्धिमा कहती हैं, ‘बहुत खालीपन महसूस होता है। इतना कि बता नहीं सकती। वो टाइम बहुत खराब था। मैं मम्मी (नीतू सिंह) के साथ थी। मेरी, रणबीर, आलिया की पहली प्रायोरिटी थी कि मम्मी ठीक हों। हम उनको बिजी रखते थे कि कैसे भी उन्हें बाहर ले जाना है, उन्हें डिस्ट्रैक्ट करना है, क्योंकि ये बहुत अचानक हुआ था। मैं एक्सप्रेस नहीं कर सकती। वो बहुत डरावनी फीलिंग थी। बहुत खालीपन हो गया। बहुत सूनापन। मैं आज भी कभी उन्हें पास्ट टेंस में रिफर नहीं कर पाती। मैं हमेशा बोलती हूं कि वो अभी हैं, हमें गाइड कर रहे हैं, हमें प्यार कर रहे हैं, आशीर्वाद दे रहे हैं।’ ‘मैं उनसे कई बातें करना चाहती हूं। मुझे कहना है कि हम सब आपको बहुत सेलिब्रेट करते हैं पापा। हम हर रोज फैमिली वीडियो कॉल पर आपकी बातें करते हैं कि अगर आप होते तो क्या बोलते, क्या करते। आज तक एक दिन भी ऐसा नहीं गया, जब आपकी बात न हो।’ बेटी रिद्धिमा के मुताबिक, पिता ऋषि कपूर लार्जर देन लाइफ जिंदगी जीते थे। इसका परिणाम वो किस्से हैं, जो उनकी बेबाकी, हाजिरजवाबी, गुस्से और मजेदार व्यक्तित्व को दर्शाते हैं। कभी उन्होंने अमिताभ को दिया जा रहा अवॉर्ड खरीदकर अपने नाम किया, तो कभी सलमान खान के पिता की धमकी का जवाब दिया। डिंपल कपाड़िया से अफेयर भी चर्चा में रहा और अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम से हुई उनकी मुलाकात भी विवाद की वजह बनी। डेथ एनिवर्सरी के मौके पर ऋषि कपूर की जिंदगी से जुड़े कुछ बेहतरीन किस्से भी पढ़िए- किस्सा-1, चॉकलेट की लालच में 3 साल के ऋषि कपूर ने की एक्टिंग 4 सितंबर 1952 बॉम्बे के मटुंगा स्थित राज कपूर बंगलो में कृष्णा कपूर ने बेटे ऋषि को जन्म दिया। वो तीन भाइयों में मंझले थे। रणधीर कपूर (करीना-करिश्मा के पिता) बड़े थे और राजीव कपूर (छोटे)। पिता राज कपूर शोमैन थे। ऋषि महज 3 साल के थे, जब पिता राज कपूर, नरगिस के साथ श्री 420 बना रहे थे। फिल्म के मशहूर गाने प्यार हुआ इकरार हुआ में जब राज कपूर को चाइल्ड आर्टिस्ट की जरूरत पड़ी, तो वो अपने बच्चों को सेट पर ले आए। गहरी आंखें और चबी गाल वाले ऋषि हर किसी का ध्यान खींच लिया करते थे। सेट पर उन्हें दूसरे बच्चों के साथ बारिश में भीगना था, लेकिन नाजुक चिंटू जी के ऊपर जैसे ही बूंदें गिरतीं, वो रोना शुरू कर देते। कई बार शॉट खराब हुए और रील्स बर्बाद होने लगीं। तब नरगिस धीरे से उनके पास आईं और कहा, अगर वो बिना रोए शॉट पूरा करते हैं, तो वो उन्हें ढेर सारी चॉकलेट देंगी। खाने-पीने के शौकीन चिंटू राजी क्यों न होते। और इस तरह ऋषि कपूर ने 1955 की फिल्म श्री 420 से बतौर चाइल्ड एक्टर फिल्मों में एंट्री ली। किस्सा-2, कार में भरकर मुगल-ए-आजम के सेट पर ले जाते थे दादा पृथ्वीराज कपूर 1960 में आई फिल्म मुगल-ए-आजम में ऋषि कपूर के दादाजी पृथ्वीराज कपूर ने बादशाह अकबर का किरदार निभाया था। वो अकसर घर के सभी बच्चों को कार में भरकर सेट पर ले जाते थे। तब ऋषि कपूर 6 साल के थे। सारे बच्चे मधुबाला की खूबसूरती देख रहे थे, लेकिन ऋषि कपूर की नजरें दिलीप कुमार पर टिकी थीं। किस्सा- 3, राज कपूर ने सिगरेट पीते देख कर दी पिटाई करीब 15 साल की उम्र में दोस्तों की वजह से ऋषि कपूर को सिगरेट पीने की लत लग गई। वो मुंबई के चैंपियन स्कूल के बाहर कोकाकोला स्टैंड की दुकान से अहमद नाम के दुकानदार से सिगरेट लिया करते थे। एक समय में दुकान में उनकी 300 रुपए उधारी हो गई। एक दिन गुस्से में अहमद से कहा कि अगर उधारी नहीं चुकाई, तो वो राज कपूर को बता देंगे। एक दिन ऋषि कपूर पिता के मेकअप मैन के साथ सिगरेट के कश लगा रहे थे, तभी राज कपूर पहुंच गए। रंगे हाथों पकड़े जाने के बाद राज कपूर ने ऋषि कपूर को खूब पीटा। बता दें कि स्टार बनने के बाद ऋषि कपूर 300 रुपए उधार चुकाने गए थे, लेकिन तब अहमद ने पैसे नहीं लिए और उन्हें बस गले लगा लिया। किस्सा-4, डिंपल कपाड़िया को दी, गर्लफ्रेंड की दी हुई अंगूठी ऋषि कपूर को स्कूल के दिनों में पारसी यास्मीन नाम की लड़की से पहला प्यार हुआ। उन्होंने ही बॉबी से डेब्यू करने वाले ऋषि कपूर को वजन घटाने में मदद की थी। एक दिन यास्मीन ने ऋषि को एक अंगूठी गिफ्ट की, जो वो हमेशा पहने रखते थे। बॉबी की शूटिंग के समय ऋषि कपूर और डिंपल में गहरी दोस्ती हो गई। डिंपल अक्सर उनकी अंगूठी पहन लिया करती थीं। धीरे-धीरे वो अंगूठी डिंपल की ही हो गई। डिंपल को शादी के लिए प्रपोज करते हुए राजेश खन्ना ने ऋषि कपूर की वो अंगूठी उतरवाकर समुद्र में फेंकी और फिर अपनी अंगूठी पहनाई थी। तब रिपोर्ट्स आईं कि ऋषि ने ही वो अंगूठी डिंपल को पहनाई थी। यही वजह रही कि ऋषि कपूर की गर्लफ्रेंड यास्मीन ने उनसे ब्रेकअप कर लिया। डिंपल कपाड़िया और ऋषि की डेब्यू फिल्म बॉबी (1973) सुपरहिट रही थी। लेकिन फिर डिंपल ने राजेश खन्ना से शादी कर फिल्मों से ब्रेक ले लिया। किस्सा-5, पैसे देकर खरीदा पहला अवॉर्ड, अमिताभ से हुई अनबन फिल्म बॉबी (1973) के लिए ऋषि कपूर को फिल्मफेयर बेस्ट एक्टर अवॉर्ड मिला था। उस साल ऋषि के अलावा अमिताभ बच्चन भी फिल्म जंजीर के लिए नॉमिनेटेड थे। हर तरफ चर्चा थी कि अवॉर्ड अमिताभ को ही मिलेगा, लेकिन ऋषि कपूर ने 30 हजार रुपए में वो अवॉर्ड खरीद लिया। ऐसा उन्होंने पीआरओ तारकनाथ गांधी और अपने सेक्रेटरी घनश्याम के कहने पर लिया। जैसे ही अमिताभ बच्चन को पता चला कि ऋषि ने अवॉर्ड खरीदा है तो दोनों के बीच कोल्डवॉर छिड़ गई। ऋषि कपूर ने अपनी ऑटोबायोग्राफी खुल्लम-खुल्ला में लिखा कि उन्हें अवॉर्ड खरीदने का पछतावा था और शर्म थी। इसके बाद अमिताभ बच्चन उनसे नाराज हो गए थे। किस्सा- 6, फ्यूचर वाइफ नीतू सिंह से लगवाते थे एक्स गर्लफ्रेंड यास्मीन को कॉल, होटल में देख दिल टूटा ऋषि कपूर यास्मीन से रिश्ता बरकरार रखना चाहते थे। फिल्म जहरीला इंसान की शूटिंग के समय ऋषि, को-स्टार और दोस्त नीतू सिंह ने यास्मीन को कॉल लगवाते थे, लेकिन जवाब नहीं मिलता था। एक दिन ऋषि ताज होटल में थे, तभी उन्हें यास्मीन दिखीं, जो वहां, ऋषि के ही एक पुराने दोस्त के साथ आई थीं। ये देख ऋषि कपूर का दिल टूट गया। 2 हजार लेकर पहुंचे ऋषि कपूर ने 18 हजार रुपए की शराब पी ली। बाद में उनका मैनेजर से खूब झगड़ा हुआ। किस्सा-7, सलीम-जावेद ने दी थी करियर तबाह करने की धमकी, जवाब में कहा- करके दिखाओ जंजीर, शोले लिखने वाले सलीम-जावेद का 80 के दशक में बड़ा नाम था। हर कोई उनकी लिखी फिल्म करना चाहता था। एक बार राइटर जोड़ी ने ऋषि कपूर को फिल्म ऑफर की, जो उन्होंने ठुकरा दी। सलीम-जावेद इससे चिढ़ गए। एक दिन उनकी मुलाकात प्लेमेट क्लब में हुई। सलीम खान (सलमान के पिता) ने ऋषि को देखते ही कहा- तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई हमारी फिल्म ठुकराने की। जवाब मिला- मुझे फिल्म पसंद नहीं आई। सलीम ने गुस्से में कहा- तुम जानते नहीं हो क्या कि इंडस्ट्री में आजतक हमें किसी ने इनकार नहीं किया। हम तुम्हारा करियर तबाह कर सकते हैं। ये सुनकर ऋषि कपूर ने कहा- आप मुझे बर्बाद करने के लिए क्या कर सकते हैं। सलीम ने कहा- तुम्हारे साथ कौन काम करेगा, क्या तुम जानते हो, हमने राजेश खन्ना को जंजीर ऑफर की थी, लेकिन उन्होंने फिल्म करने से इनकार किया था। हमने उनके साथ कुछ नहीं किया, बस उनकी जगह अमिताभ को ले आए, जिन्होंने उन्हें बर्बाद कर दिया। हम तुम्हारे साथ भी यही करेंगे। इस पर ऋषि कपूर ने कहा- गो अहेड (आगे बढ़ो) और मुझे बर्बाद करके दिखाओ। किस्सा-8ः दाऊद इब्राहिम ने कॉल कर चाय पर किया इनवाइट साल 1988 में ऋषि कपूर दोस्त बिट्टू आनंद के साथ आशा भोसले का प्रोग्राम अटेंड करने दुबई गए थे। एयरपोर्ट पर अचानक एक शख्स उनके पास आया और उन्हें मोबाइल थमाते हुए कहा, दाऊद साहब बात करेंगे। दाऊद ने कॉल पर कहा- किसी भी चीज की जरूरत हो तो बस मुझे बता देना। ये सुनकर ऋषि कपूर डर गए। कुछ समय बाद दाऊद इब्राहिम के राइट हैंड ने उनसे कहा कि दाऊद आपके साथ चाय पीना चाहते हैं। ऋषि कपूर इनकार नहीं कर सके। उसी शाम उनके होटल में एक रोल्स रॉय आई, जो उन्हें एक अनजान जगह ले गया। दाऊद ने ऋषि से मुलाकात की और कहा- मैं ड्रिंक नहीं करता इसलिए आपको चाय पर बुलाया। ये मुलाकात 4 घंटे चली। किस्सा- 9, नीतू के लिए गिफ्ट की जगह ले आए कुत्ते के बिस्कुट ऋषि कपूर ने 13 फिल्मों में को-स्टार रहीं नीतू सिंह से 1970 में शादी की थी। इस शादी से कपल को दो बच्चे बेटा रणबीर कपूर और बेटी रिद्धिमा कपूर हुई। एक बार ऋषि कपूर अमेरिका गए, तो नीतू सिंह ने फरमाइश कर कई चीजों की लिस्ट थमा दी। कुछ दिनों बाद ऋषि कपूर 3 सूटकेस के साथ लौटे। नीतू को लगा कि सूटकेस में उनकी चीजें होंगी, लेकिन असल में उनमें पातलु कुत्ते के बिस्कुट थे। इस बात से ऋषि-नीतू का खूब झगड़ा हुआ था। किस्सा-10, मूड खराब हुआ तो डायरेक्टर को हाईवे पर कार से उतारा ऋषि कपूर हमेशा से ही गुस्से के तेज थे। फिल्म की स्क्रिप्ट सुनने से पहले ही कह देते थे पहले मेरी शर्तें सुनो, मंजूर हो, तब ही बात आगे होगी। शर्त होती थीं, सुबह 10 से पहले रात 8 के बाद शूट नहीं करूंगा। नाइट सीन हो, तब भी दिन में सेट बनाकर करो। संडे शूट नहीं करूंगा। एक दिन फिल्म सिटी में शूटिंग करते हुए एक डायरेक्टर ने कहा कि वो उन्हें स्क्रिप्ट नरेशन देना चाहते हैं। वो बिजी थे, तो डायरेक्टर ने कि पैकअप के बाद जब आप घर निकलो, तो मैं रास्ते में मेकअप वैन में ही सुना दूंगा। वो मान गए। मेकअप वैन में ऋषि कपूर हमेशा, पीछे की तरफ कमरे में न बैठकर ड्राइवर के साथ आगे बैठते थे। क्योंकि उन्हें हिलते हुए रूम पसंद नहीं आते थे। लेकिन उस दिन ड्राइवर की वजह से उन्हें पीछे रूम में बैठना पड़ा। वो पहले ही चिढ़े हुए थे, तभी डायरेक्टर ने लगातार बोलना शुरू कर दिया। फिल्म में क्या अच्छा, कैसी होगी, हीरो क्या करेगा, वगैरह-वगैरह। मेकअप वैन हाइवे पर थी। फिल्म की ज्यादातर कहानी एक रात की थी, तो ऋषि कपूर का और इंट्रेस्ट कम हो गया, क्योंकि वो रात को शूट नहीं करते थे। तभी उन्होंने पूछा, सेट कहां होगा, तो डायरेक्टर ने काफी एक्साइटमेंट में कहा, ज्यादातर शूटिंग रोड में होगी। ये सुनते ही ऋषि कपूर और चिढ़ गए। उन्होंने तुरंत ड्राइवर को आवाज दी और कहा- गाड़ी रोको, और उस डायरेक्टर को हाईवे पर ही उतार दिया और वहां से निकल गए। 50 साल का करियर और 121 फिल्में- अपने 50 सालों के फिल्मी करियर में ऋषि ने तकरीबन 121 फिल्मों में काम किया। 1973 से 2000 के बीच ऋषि ने 92 रोमांटिक फिल्मों में काम किया जिनमें से 36 फिल्में सुपरहिट साबित हुईं। इनमें 'कर्ज', 'दीवाना', 'चांदनी', 'सागर', 'अमर अकबर एंथनी', 'हम किसी से कम नहीं', 'प्रेम रोग', 'हिना' जैसी फिल्में शामिल हैं। ………………………………………….. फिल्मी सितारों से जुड़ी ये खबरें भी पढ़िए- विनोद खन्ना की पुण्यतिथि, पिता ने पिस्तौल तानी:अमिताभ ने फेंका ग्लास, तो टांके आए: महेश भट्ट को धमकाया, आखिरी ख्वाहिश थी- पाकिस्तान जाना लंबी कद-काठी, गोरी रंगत और गहरी आंखें। 18 साल की उम्र में कॉलेज के दिनों में कई लड़कियां विनोद खन्ना के लुक की तारीफ करती नहीं थकती थीं। सबका एक ही सुझाव था, ‘हीरो जैसे लगते हो, फिल्मों में जाओ’, लेकिन विनोद के पिता चाहते थे कि बेटा पढ़ाई पूरी कर खानदानी टेक्सटाइल बिजनेस संभाले। विनोद का बागी रवैया तभी शुरू हो गया था, जब उन्होंने पिता के कहने पर कॉमर्स के बजाय साइंस चुना। एक रोज उनकी कॉलेज पार्टी में कुछ फिल्मी हस्तियां पहुंचीं, जिनमें उस दौर के नामी हीरो सुनील दत्त और उनकी दोस्त अंजू महेंद्रू भी थीं। वो देखना चाहते थे कि टीनएजर्स किस तरह पार्टी करते थे। पूरी खबर पढ़ें…
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