भारत-यूएई रिश्ते और मजबूत होने की ओर, संकट के बीच बढ़ा भरोसा
अबू धाबी/नई दिल्ली, 29 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच द्विपक्षीय साझेदारी और मजबूत होने की संभावना है। पश्चिम एशिया के मौजूदा संकट के बीच दोनों देशों के बीच अच्छी समझ और तालमेल दिख रहा है।
इस बढ़ते भरोसे का अंदाजा यूएई के नेताओं के हाल के बयानों से भी लगता है। भारत में यूएई के राजदूत अब्दुलनासेर अलशाली ने तनाव के दौरान कहा कि यूएई में रहने वाले भारतीयों को इस देश की लीडरशिप परिवार की तरह मानती है। उन्होंने यह भी कहा, “यूएई में आपका परिवार अकेला नहीं है,” जो दोनों देशों के बीच मजबूत रिश्तों को दिखाता है।
थिंक टैंक ‘पॉलीटेइया रिसर्च फाउंडेशन’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह सिर्फ औपचारिक कूटनीति नहीं है, बल्कि आपसी भरोसे, एक-दूसरे पर निर्भरता और लंबे समय की स्थिरता पर आधारित साझेदारी है।
रिपोर्ट में कहा गया कि एक नाजुक युद्धविराम के बीच, खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के सभी देशों पर ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमले हुए, लेकिन यूएई को सबसे ज्यादा नुकसान झेलना पड़ा। इसके बावजूद जब इस्लामाबाद में शांति वार्ता हुई, तो यूएई के हितों को उतनी अहमियत नहीं दी गई, जैसे वह इस प्रक्रिया में मायने ही नहीं रखता।
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के दौरान, जब यूएई पर हमले हुए, तब पाकिस्तान का झुकाव ज्यादा ईरान की तरफ दिखाई दिया। उसके बयान और कदम ऐसे लगे जैसे वह अप्रत्यक्ष रूप से ईरान का समर्थन कर रहा हो, बजाय यूएई की सुरक्षा चिंताओं को समझने के।
इससे यूएई में नाराजगी पैदा हुई। इसके जवाब में उसने कथित तौर पर पाकिस्तान से करीब 3.5 अरब डॉलर का कर्ज लौटाने को कहा। यह नाराजगी सोशल मीडिया पर यूएई के एक्सपर्ट्स और लोगों की प्रतिक्रियाओं में भी दिखी, जहां कई लोगों ने पाकिस्तान के रुख की आलोचना की।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि इस पूरे समय भारत ने यूएई से लगातार संपर्क बनाए रखा। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने युद्धविराम के बाद यूएई का दौरा किया और समर्थन व एकजुटता का संदेश दिया।
इस दौरान उन्होंने यूएई के नेताओं से मुलाकात की और क्षेत्रीय सुरक्षा, ऊर्जा स्थिरता और इस संघर्ष के असर जैसे मुद्दों पर चर्चा की।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने खास तौर पर यूएई में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा और भलाई पर ध्यान दिया। दोनों देशों ने अपने व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने और स्थिरता बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई।
भारत ने लगातार यूएई और अन्य खाड़ी देशों पर हुए हमलों की निंदा की और कहा कि उनकी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान होना चाहिए। भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक प्रस्ताव का भी समर्थन किया, जिसमें ईरान के हमलों की कड़ी निंदा की गई और तुरंत शांति की अपील की गई। इससे साफ दिखता है कि इस संकट के दौरान भारत ने यूएई का खुलकर साथ दिया।
--आईएएनएस
एवाई/डीकेपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
कोरियाई प्रायद्वीप और परमाणु मुद्दों पर दक्षिण कोरिया-अमेरिका की अहम चर्चा
सियोल, 29 अप्रैल (आईएएनएस)। दक्षिण कोरिया और अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारियों ने कोरियाई प्रायद्वीप की स्थिति और वैश्विक निरस्त्रीकरण और परमाणु प्रसार रोकने से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा की। यह जानकारी सियोल के विदेश मंत्रालय ने बुधवार को दी।
मंत्रालय के मुताबिक, दक्षिण कोरिया के उप विदेश मंत्री (कूटनीतिक रणनीति और खुफिया) जियोंग योन-डू ने अमेरिका के विदेश विभाग में आर्म्स कंट्रोल और नॉन-प्रोलिफरेशन ब्यूरो के सहायक सचिव क्रिस्टोफर येव से न्यूयॉर्क में मंगलवार (अमेरिकी समय) को मुलाकात की। यह बैठक परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) सम्मेलन के दौरान हुई।
योनहाप समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, मंत्रालय ने बताया, “दोनों पक्षों ने कोरियाई प्रायद्वीप की स्थिति और निरस्त्रीकरण और अप्रसार से जुड़े अहम मुद्दों पर अपने विचार साझा किए। दोनों ने माना कि मौजूदा समय में जब इन क्षेत्रों में कई जटिल चुनौतियां हैं, तो आपसी तालमेल बहुत जरूरी है। उन्होंने एनपीटी समीक्षा सम्मेलन के दौरान मिलकर काम करने पर सहमति जताई।”
जियोंग ने यूक्रेन के उप विदेश मंत्री ओलेक्जेंडर मिशचेंको से भी अलग से बातचीत की। इस दौरान दोनों ने द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय हालात पर चर्चा की।
जियोंग ने बताया कि दक्षिण कोरिया सरकार यूक्रेन की मदद जारी रखे हुए है, जिसमें मानवीय संकट से निपटना और पुनर्निर्माण में सहयोग देना शामिल है।
मिशचेंको ने इसके लिए धन्यवाद जताया और उम्मीद जताई कि दोनों देश द्विपक्षीय और बहुपक्षीय स्तर पर आगे भी सहयोग जारी रखेंगे।
मंत्रालय के अनुसार, दोनों पक्षों ने अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवीय सिद्धांतों के तहत यूक्रेन में उत्तर कोरियाई युद्धबंदियों के मुद्दे को सुलझाने के लिए साथ काम जारी रखने पर सहमति जताई।
जियोंग ने संयुक्त राष्ट्र के राजनीतिक और शांति निर्माण मामलों के विभाग, संयुक्त राष्ट्र निरस्त्रीकरण कार्यालय और ऑस्ट्रेलिया, वियतनाम, नीदरलैंड और स्वीडन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भी अलग-अलग बैठकें कीं। इन बैठकों में सहयोग बढ़ाने और लंबित मुद्दों पर चर्चा हुई।
इससे पहले मार्च में दक्षिण कोरिया और अमेरिका की सेनाओं ने योनचॉन सीमा क्षेत्र में नदी पार करने का संयुक्त अभ्यास किया था। यह उनका सालाना वसंतकालीन अभ्यास है, जिसका मकसद दोनों देशों की सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाना है।
यह अभ्यास उसी समय हुआ जब उत्तर कोरिया ने पूर्वी सागर की ओर करीब दस बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। माना जा रहा है कि यह कदम सियोल-वॉशिंगटन के संयुक्त सैन्य अभ्यास के जवाब में ताकत दिखाने के लिए उठाया गया।
यह ट्रेनिंग सियोल से करीब 50 किलोमीटर उत्तर में स्थित येओनचियोन के इम्जिन नदी पर हुई। इसमें करीब 200 तरह के उपकरण शामिल थे, जैसे केएम-3 एम्फीबियस ब्रिजिंग वाहन और रिबन ब्रिज सिस्टम।
यह अभ्यास ‘फ्रीडम शील्ड’ नाम के कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य दोनों देशों की संयुक्त रक्षा क्षमता को मजबूत करना है।
इसमें दक्षिण कोरिया की कैपिटल मैकेनाइज़्ड इन्फैंट्री डिवीजन और 7वीं इंजीनियर ब्रिगेड के करीब 700 सैनिकों ने हिस्सा लिया, साथ ही अमेरिका के 2nd इन्फैंट्री डिवीजन की स्ट्राइकर ब्रिगेड कॉम्बैट टीम ने भी हिस्सा लिया।
--आईएएनएस
एवाई/डीकेपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others
News Nation



















