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Bengal Election Phase 2: हिंसा और तनाव के बीच बंपर Voting, Bhabanipur बना सियासी जंग का अखाड़ा

 पश्चिम बंगाल में छिटपुट हिंसा के बीच दूसरे एवं अंतिम चरण के मतदान में पूर्वाह्न 11 बजे तक 142 विधानसभा सीट पर 39.97 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया जबकि भवानीपुर सीट पर उस समय तनाव व्याप्त हो गया जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी ने एक ही बूथ क्षेत्र में एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाए। मतदान सुबह सात बजे शुरू हो गया तथा कोलकाता, हावड़ा, उत्तर और दक्षिण 24 परगना, नदिया, हुगली और पूर्व बर्धमान जिलों में मतदान केंद्रों के बाहर मतदाताओं की कतारें दिखीं।

इस चरण में मतदान के लिए पात्र कुल मतदाताओं में से 1.57 करोड़ महिलाएं हैं और 792 ट्रांसजेंडर हैं। सुबह नौ बजे तक पश्चिम बंगाल में 18.39 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जिसमें पूर्व बर्धमान में सबसे अधिक 20.86 प्रतिशत मतदान हुआ, उसके बाद हुगली में 20.16 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। निर्वाचन आयोग के एक अधिकारी ने बताया कि नादिया में 18.50 प्रतिशत मतदान हुआ, उत्तर 24 परगना में 17.81 प्रतिशत, हावड़ा में 17.76 प्रतिशत, कोलकाता उत्तर में 17.28 प्रतिशत, दक्षिण 24 परगना में 17.25 प्रतिशत और कोलकाता दक्षिण में 16.81 प्रतिशत मतदान हुआ। अधिकारी ने कहा, ‘‘कुछ इलाकों में मामूली घटनाओं को छोड़कर मतदान शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा है। हमने संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है।’’

उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘कुछ क्षेत्रों में मामूली घटनाओं को छोड़कर मतदान शांतिपूर्ण ढंग से जारी है। हमने संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है।’’ पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण में 142 विधानसभा क्षेत्रों में अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था के बीच मतदान जारी है। चक्रबेरिया में एक ही बूथ क्षेत्र पर बनर्जी और अधिकारी का सुबह-सुबह आमना सामना हुआ, जिसने मुख्यमंत्री के चुनावी गढ़ भवानीपुर को पूरे दिन का केंद्र बिंदु बना दिया। इससे प्रतिष्ठा की इस लड़ाई का प्रतीकात्मक महत्व और बढ़ गया, जिसे पिछले विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम सीट पर चुनाव के दोहराव के रूप में देखा जा रहा है, जहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता ने उन्हें 2021 में हराया था।

स्थानीय तृणमूल कांग्रेस नेताओं को कथित तौर पर धमकाने की शिकायतें मिलने के बाद बनर्जी पहले से ही बूथ के बाहर बैठी दिखीं, तभी केंद्रीय बलों की भारी तैनाती के बीच अधिकारी भी वहां पहुंचे। अपनी कार से उतरते हुए अधिकारी ने घोषणा की, ‘‘मैं किसी भी तरह की गुंडागर्दी बर्दाश्त नहीं करूंगा।’’ बनर्जी ने भाजपा पर केंद्रीय बलों, पुलिस पर्यवेक्षकों और निर्वाचन अधिकारियों का इस्तेमाल करके चुनाव में धांधली करने का आरोप लगाया। उन्होंने पत्रकारों से कहा, ‘‘भाजपा इस चुनाव में धांधली करना चाहती है। बंगाल में चुनाव आमतौर पर शांतिपूर्ण होते हैं। क्या यहां गुंडा राज है?’’ उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवान मंगलवार देर रात तृणमूल कांग्रेस के नेताओं के घरों में घुस गए और इलाके में दहशत फैला दी।

बनर्जी ने आरोप लगाया कि चुनाव पर्यवेक्षक भाजपा के इशारे पर काम कर रहे हैं और दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं को जिलों में चुनिंदा तरीके से निशाना बनाया जा रहा है। अधिकारी ने इन आरोपों को ‘‘हताशा’’ का संकेत बताते हुए खारिज कर दिया और दावा किया कि बनर्जी को यह एहसास हो गया है कि उन्हें ‘‘एक भी वोट’’ नहीं मिलने वाला है। बनर्जी आमतौर पर अपना वोट डालने के लिए दिन में देर से कालीघाट स्थित अपने आवास से निकलकर मित्रा इंस्टीट्यूशन स्कूल जाती हैं। हालांकि, इस बार परंपरा तोड़ते हुए वह सुबह आठ बजे से पहले ही मतदान केंद्र पहुंच गईं।

उन्होंने चेतला, पद्मपुकुर और चक्रबेरिया का दौरा किया, जिससे भवानीपुर और दक्षिण बंगाल की व्यापक चुनावी लड़ाई के महत्व का पता चलता है। कई जिलों से हिंसा, तोड़फोड़ और तनाव की खबरें सामने आईं। नदिया जिले के छपरा में एक चुनावी अभ्यास के दौरान एक बूथ के अंदर भाजपा के एक मतदान एजेंट पर कथित तौर पर हमला किया गया। भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस के समर्थकों पर उसके एजेंट पर हमला करने का आरोप लगाया, जबकि सत्तारूढ़ पार्टी ने इस आरोप से इनकार किया।

शांतिपुर में भाजपा के एक शिविर कार्यालय में तोड़फोड़ की घटना हुई। दक्षिण 24 परगना के भांगर में आईएसएफ ने आरोप लगाया कि उसके मतदान एजेंटों को बूथ में प्रवेश करने से रोका गया। इस चरण के मतदान में कुल 3,21,73,837 मतदाता मतदान करने के पात्र हैं, जिनमें 1,64,35,627 पुरुष, 1,57,37,418 महिलाएं और 792 ट्रांसजेंडर मतदाता शामिल हैं। मतदान 41,001 केंद्रों पर हो रहा है, जिनका वेबकास्टिंग के माध्यम से प्रसारण किया जा रहा है।

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Viral Video होने के बाद हरकत में आई सरकार, Odisha में कंकाल लेकर बैंक पहुंचे आदिवासी व्यक्ति को मिला न्याय

ओड़िशा के क्योंझर जिले से दो दिन पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें एक आदिवासी व्यक्ति, जीतू मुंडा, अपनी दिवंगत बहन का कंकाल कंधे पर लादे ओडिशा ग्रामीण बैंक की मलिपासी शाखा ले जाते हुए दिखाई दिए। यह वीडियो देखते ही देखते सोशल मीडिया पर फैल गया और लोगों ने बैंक की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए।

क्या है पूरा मामला?

जीतू मुंडा (50 वर्ष) ओडिशा के क्योंझर जिले के रहने वाले हैं। उनकी बहन काकरा मुंडा का दो महीने पहले निधन हो गया था। उनके परिवार में अब और कोई नहीं बचा था, इसलिए जीतू मुंडा उनकी बैंक खाते की रकम निकालने के लिए ओडिशा ग्रामीण बैंक की मलिपासी शाखा गए थे। बैंक ने उनसे पैसे देने के लिए मृत्यु प्रमाण पत्र और कानूनी वारिस होने के कागजात मांगे। चूँकि जीतू मुंडा पढ़े-लिखे नहीं थे, इसलिए वे इस कानूनी प्रक्रिया को समझ नहीं पाए और खाली हाथ लौट आए।

कागजी कार्रवाई न समझ पाने की वजह से वे बेबस हो गए। इसके बाद उन्होंने एक बेहद चौंकाने वाला कदम उठाया। उन्होंने अपनी बहन की कब्र खोदी, कंकाल निकाला, उसे कपड़े में लपेटा और तपती गर्मी में पैदल चलकर बैंक ले गए। वहाँ मौजूद लोग यह देखकर हैरान रह गए।


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वीडियो वायरल होते ही एक्शन में आई सरकार

जैसे ही यह वीडियो वायरल हुआ और मामला तूल पकड़ने लगा, ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने इसे तुरंत संज्ञान में लिया। मंगलवार शाम को मुख्यमंत्री ने घटना की गंभीरता को देखते हुए इसके उच्च-स्तरीय जांच के आदेश दे दिए। उन्होंने उत्तरी संभाग के राजस्व आयुक्त को मामले की जांच करने के लिए निर्देश दिए ताकि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो।

बैंक ने क्या कहा?

वायरल वीडियो के बाद बैंक ने भी अपना पक्ष रखा। बैंक ने एक्स पर एक पोस्ट के जरिए इन आरोपों को गलत बताया कि उन्होंने पैसे देने के लिए मृत महिला की शारीरिक मौजूदगी की मांग की थी। बैंक के अनुसार, उन्होंने केवल मृत्यु प्रमाण पत्र और कानूनी कागजात मांगे थे। बैंक ने आगे बताया कि सरकारी अधिकारियों द्वारा मृत्यु प्रमाण पत्र और कानूनी वारिस प्रमाण पत्र जारी करते ही, उन्होंने तुरंत 19,402 रुपये की राशि तीन कानूनी वारिसों के नाम पर सेटल कर दी और पैसे उन्हें सौंप दिए। इंडियन ओवरसीज बैंक, जो इस ग्रामीण बैंक का प्रायोजक है, उसने भी यही स्पष्ट किया कि बैंक ने केवल नियम के अनुसार दस्तावेज मांगे थे।
 

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अंत में क्या हुआ?

मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद इस मामले का समाधान निकाल लिया गया। जीतू मुंडा को जिला रेड क्रॉस कोष से 30,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी गई। साथ ही, उन्हें उनकी बहन का मृत्यु प्रमाण पत्र और उत्तराधिकार प्रमाण पत्र भी उपलब्ध करा दिया गया है। पुलिस की मदद से कंकाल को सम्मान के साथ वापस कब्रिस्तान ले जाकर दोबारा दफना दिया गया। मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है और अधिकारियों को लोगों के प्रति अधिक संवेदनशील रहने की सलाह दी है।

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रियान पराग को हो सकती है जेल! ड्रेसिंग रूम में ई सिगरेट पीना पड़ा भारी, मुश्किल में फंसे राजस्थान रॉयल्स के कप्तान

बीसीसीआई के नियमों के मुताबिक, ड्रेसिंग रूम और स्टेडियम परिसर में धूम्रपान पूरी तरह से प्रतिबंधित है, कुछ निर्धारित जगहों पर इसकी अनुमति है. खबरों के अनुसार, पराग के हाथ में ई-सिगरेट देखी गई, जो भारत में इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट निषेध अधिनियम, 2019 (PECA) के तहत प्रतिबंधित है. इस मामले में जेल और आर्थिक दंड भी शामिल है. Wed, 29 Apr 2026 12:15:46 +0530

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