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कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: नीरज चोपड़ा ने सिल्वर और यशवीर सिंह ने जीता ब्रॉन्ज मेडल, पीएम मोदी ने दी बधाई

Commonwealth Games 2026: ग्लासगो में चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के स्टार एथलीटों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए इतिहास रच दिया है। पुरुषों की जैवलिन थ्रो स्पर्धा में भारत ने डबल पोडियम फिनिश हासिल किया है। ओलंपिक चैंपियन नीरज चोपड़ा ने सिल्वर मेडल अपने नाम किया, जबकि यशवीर सिंह ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए ब्रॉन्ज मेडल जीता है। भारत के इस ऐतिहासिक प्रदर्शन पर देश भर में खुशी का माहौल है।

पीएम नरेंद्र मोदी ने की एथलीटों की सराहना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीरज चोपड़ा और यशवीर सिंह की इस ऐतिहासिक सफलता पर उनकी जमकर तारीफ की है। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर बधाई देते हुए कहा कि इन युवा एथलीटों की उपलब्धि देश के तमाम युवाओं को प्रेरित करेगी।

यशवीर सिंह को ब्रॉन्ज मेडल जीतने पर बधाई देते हुए प्रधानमंत्री ने लिखा कि उन्होंने शानदार थ्रो के साथ अपनी कड़ी मेहनत और लगन का परिचय दिया है। वहीं, सिल्वर मेडल जीतने वाले नीरज चोपड़ा की निरंतरता, संयम और जुझारू भावना की सराहना करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि उनकी सफलता हर भारतीय को गौरवान्वित करती है।

नीरज चोपड़ा का शानदार थ्रो
ग्लासगो खेलों में ओलंपिक चैंपियन नीरज चोपड़ा ने अपने बेहतरीन खेल का प्रदर्शन करते हुए सीजन का बेस्ट थ्रो फेंका। उन्होंने 85.83 मीटर के शानदार प्रयास के साथ सिल्वर मेडल पर कब्जा जमाया। हालांकि, इस प्रदर्शन के बावजूद वह अपना कॉमनवेल्थ खिताब बचाने से चूक गए।

नीरज ने अपनी शुरुआत 80.97 मीटर के थ्रो के साथ की थी और अपने दूसरे प्रयास में सुधार करते हुए 85.83 मीटर की दूरी तय की, जो इस प्रतियोगिता में उनका सर्वश्रेष्ठ प्रयास रहा। इसके अलावा उनके अन्य वैध थ्रो 81.29 मीटर और 80.73 मीटर के रहे, जबकि उनके अंतिम दो प्रयास फाउल हो गए।

यशवीर सिंह का बेहतरीन निजी प्रदर्शन
भारत के लिए यह इवेंट इसलिए भी खास रहा क्योंकि यशवीर सिंह ने भी पोडियम पर अपनी जगह बनाई। उन्होंने अपने करियर का पर्सनल बेस्ट थ्रो 85.41 मीटर दर्ज करते हुए ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। एक बेहद कड़े मुकाबले में वह अपने देश के सीनियर खिलाड़ी नीरज चोपड़ा से महज 42 सेंटीमीटर पीछे रहे।

श्रीलंका के पाथिराज ने जीता गोल्ड
इस रोमांचक प्रतियोगिता में श्रीलंका के आर.टी. पाथिराज ने एक बड़ा उलटफेर करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। पाथिराज ने गेम्स रिकॉर्ड बनाते हुए 89.75 मीटर का करिश्माई थ्रो फेंका, जो उनके करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा। उन्होंने मजबूत खिलाड़ियों को पीछे छोड़ते हुए कॉमनवेल्थ का ताज अपने नाम किया।

अन्य खिलाड़ियों का प्रदर्शन
शीर्ष खिलाड़ियों की इस रेस में ग्रेनेडा के एंडरसन पीटर्स 83.88 मीटर के साथ चौथे स्थान पर रहे। उनके बाद दक्षिण अफ्रीका के डौव स्मिट (82.88 मीटर) और त्रिनिदाद एंड टोबैगो के केशव वॉल्कॉट (82.55 मीटर) का स्थान रहा।

भले ही नीरज चोपड़ा अपना पिछला खिताब डिफेंड करने में सफल नहीं रहे, लेकिन भारत का यह डबल पोडियम फिनिश कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के सबसे सफल पलों में दर्ज हो गया है।

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Who is Asmita Dey: कौन हैं अस्मिता डे? जिन्होंने CWG 2026 में जूडो का पहला गोल्ड जीतकर रचा इतिहास

Asmita Dey Biography: भारत की 22 वर्षीय जूडोका अस्मिता डे ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में इतिहास रच दिया है। उन्होंने ग्लासगो में खेले गए महिला 48 किग्रा वर्ग के फाइनल में कनाडा की हेइडी क्वैच को 2-1 से हराकर कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो का गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनने का गौरव हासिल किया। उनकी इस ऐतिहासिक जीत के साथ भारत को जूडो में पहला कॉमनवेल्थ गेम्स गोल्ड भी मिला।

कौन हैं अस्मिता डे?

22 मार्च 2003 को त्रिपुरा के बेलोनिया में जन्मीं अस्मिता डे का सफर किसी प्रेरणादायक कहानी से कम नहीं है। साइकिल रिपेयर की दुकान चलाने वाले पिता की बेटी अस्मिता ने सीमित संसाधनों के बावजूद अपने सपनों को कभी नहीं छोड़ा। शुरुआती दिनों में उन्होंने 800 मीटर दौड़ में हिस्सा लिया, लेकिन एक कोच की सलाह पर उन्होंने जूडो को अपना करियर बनाया।

2015 में उन्होंने त्रिपुरा स्पोर्ट्स स्कूल में दाखिला लिया, जहां बीना देबनाथ और बाद में माणिक लाल देब की देखरेख में उन्होंने जूडो की बारीकियां सीखीं। स्कूल गेम्स और खेलो इंडिया प्रतियोगिताओं में लगातार शानदार प्रदर्शन के बाद उन्हें स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) भोपाल के रीजनल सेंटर में ट्रेनिंग का मौका मिला।

ऐसे चमका इंटरनेशनल करियर

अस्मिता ने जुलाई 2022 में बैंकॉक में आयोजित एशियन कैडेट और जूनियर जूडो चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। इस दौरान उन्होंने चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और मलेशिया की खिलाड़ियों को हराया और अंतरराष्ट्रीय पदक जीतने वाली त्रिपुरा की पहली जूडोका बनीं।

इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

  • 2022: एशियन कैडेट एवं जूनियर चैंपियनशिप – ब्रॉन्ज
  • 2022: खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स – गोल्ड
  • 2023: एशियन ओपन (कुवैत) – सिल्वर
  • 2023: जूनियर एशिया कप (मकाऊ) – गोल्ड
  • 2024: कॉमनवेल्थ जूडो चैंपियनशिप – ब्रॉन्ज
  • 2025: अफ्रीकन ओपन (कैसाब्लांका) – गोल्ड
  • 2026: कॉमनवेल्थ गेम्स (ग्लासगो) – गोल्ड

TOPS स्कीम से मिला बड़ा सहारा

अस्मिता भारत सरकार की टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS) की डेवलपमेंट एथलीट हैं। उन्होंने कई बार कहा है कि उनका अगला लक्ष्य भारत के लिए ओलंपिक मेडल जीतना है। जापान की दिग्गज जूडोका उटा आबे और भारतीय जूडो खिलाड़ी अवतार सिंह उनके प्रेरणास्रोत रहे हैं।

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में रचा इतिहास

ग्लासगो में खेले गए महिला 48 किग्रा फाइनल में अस्मिता डे ने कनाडा की हेइडी क्वैच को 2-1 से हराया। पूरे मुकाबले में उन्होंने संयमित खेल दिखाया और 'यूको' के जरिए निर्णायक बढ़त हासिल कर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। इस जीत के साथ वह कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो का गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन गईं और भारतीय खेल इतिहास में अपना नाम दर्ज करा लिया।

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