जमानत मिली लेकिन शर्तें कड़ी! सोनम रघुवंशी पर इंदौर एंट्री बैन, चर्चा में ‘एकादशी’ कनेक्शन
हनीमून हत्याकांड में आरोपी सोनम रघुवंशी को जमानत मिलना जितना चौंकाने वाला था, उससे कहीं ज्यादा चर्चा कोर्ट की उन शर्तों की हो रही है, जिन्होंने उसकी आजादी को सीमित कर दिया है। लोग सोच रहे थे कि जमानत मिलते ही वह इंदौर लौट आएगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।
अदालत ने साफ कर दिया है कि जमानत का मतलब पूरी आजादी नहीं होता। इस केस में भी यही हुआ है, जहां गंभीर आरोपों के बीच सोनम को राहत तो मिली, लेकिन सख्त नियमों के साथ।
सोनम रघुवंशी जमानत की शर्तें
सोनम रघुवंशी जमानत मामले में अदालत ने कई स्पष्ट और सख्त शर्तें तय की हैं। सबसे अहम शर्त यह है कि वह शिलांग छोड़कर कहीं और नहीं जा सकती।
अदालत ने यह फैसला इसलिए लिया ताकि जांच प्रभावित न हो और आरोपी फरार न हो सके। सोनम को हर सुनवाई पर अदालत में उपस्थित होना होगा। साथ ही उसे गवाहों और सबूतों से किसी भी तरह की छेड़छाड़ करने से सख्ती से रोका गया है।
अगर वह इंदौर आना चाहती है, तो उसे पहले अदालत से अनुमति लेनी होगी। बिना अनुमति के क्षेत्र छोड़ना जमानत की शर्तों का उल्लंघन माना जाएगा, जिससे उसकी जमानत रद्द भी हो सकती है।
पुलिस की गलती बनी जमानत की वजह
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद सोनम को जमानत कैसे मिल गई। अदालत ने पुलिस की कार्यवाही में कई खामियां पाईं। गिरफ्तारी के समय आरोपी को स्पष्ट रूप से कारण नहीं बताए गए, जो कि कानून के खिलाफ है।
दस्तावेजों में भी अलग-अलग धाराएं लिखी गई थीं, जिससे मामला कमजोर पड़ गया। अदालत ने माना कि इससे आरोपी को अपने बचाव का पूरा मौका नहीं मिला। यह स्थिति बताती है कि जांच में छोटी-छोटी गलतियां भी बड़े फैसलों को प्रभावित कर सकती हैं।
संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन
अदालत ने यह भी माना कि गिरफ्तारी के समय आरोपी के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ है। हर व्यक्ति को यह अधिकार है कि उसे गिरफ्तारी का कारण तुरंत बताया जाए। यह अधिकार कानून में स्पष्ट रूप से दिया गया है। अदालत ने कहा कि जब यह प्रक्रिया सही तरीके से नहीं अपनाई जाती, तो आरोपी को जमानत मिलना स्वाभाविक हो जाता है, चाहे मामला कितना भी गंभीर क्यों न हो।
‘एकादशी’ कनेक्शन
इस मामले में एक और पहलू सामने आया है, जिसने लोगों की उत्सुकता और बढ़ा दी है। वह है ‘एकादशी’ का कनेक्शन। राजा रघुवंशी की हत्या जिस दिन हुई, वह एकादशी का दिन था। इसके बाद परिवार में बच्चे का जन्म भी एकादशी को हुआ। सबसे दिलचस्प बात यह है कि सोनम रघुवंशी की जमानत भी एकादशी के दिन ही हुई। हालांकि इसे सिर्फ एक संयोग माना जा सकता है, लेकिन इसने पूरे मामले को और भी चर्चा में ला दिया है।
कैसे शुरू हुई पूरी कहानी
इस मामले की शुरुआत एक शादी से हुई, जो कुछ ही दिनों में एक दर्दनाक घटना में बदल गई। इंदौर के कारोबारी राजा रघुवंशी और सोनम रघुवंशी की शादी मई में हुई थी। शादी के बाद दोनों घूमने के लिए निकले। कुछ दिनों बाद राजा का शव मेघालय में एक खाई से मिला, जिससे हत्या की पुष्टि हुई।
मध्य प्रदेश: 4.88 लाख किसानों से 19 लाख 90 हजार मीट्रिक टन गेहूं उपार्जित, अब तक 9.60 लाख स्लॉट बुक, 9 मई है लास्ट डेट
मध्य प्रदेश में समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन की प्रक्रिया जारी है। अबतक प्रदेश में 4 लाख 88 हजार 270 किसानों से 19 लाख 90 हजार मीट्रिक टन गेहूं खरीदा जा चुका है। किसानों को 2548 करोड़ रुपये से अधिक के भुगतान भी किए जा चुके हैं। इसके अलावा अबतक 9.60 लाख किसानों द्वारा 57.75 लाख मीट्रिक टन गेहूं के विक्रय के लिए स्लॉट बुक किए जा चुके हैं। बड़े एवं मध्यम वर्ग के 1 लाख 60 हजार किसानों ने भी स्लॉट बुक कराया है।
जिन किसानों ने अबतक स्लॉट बुक नहीं किए हैं वे 9 मई 2026 तक कर सकते हैं। अब हर शनिवार को भी स्लॉट बुकिंग एवं उपार्जन का कार्य जारी रहेगा। इस साल किसानों से 2585 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस राशि सहित 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं का उपार्जन किया जा रहा है।
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि किसान को तहसील के स्थान पर जिले के किसी भी उपार्जन केन्द्र पर उपज विक्रय करने की सुविधा दी गई। उपार्जन केन्द्रो पर प्रतिदिन, प्रति उपार्जन केन्द्र पर गेहूं विक्रय के लिये स्लॉट बुकिंग की क्षमता 1000 क्विंटल से बढ़ाकर 2250 क्विंटल प्रतिदिन, प्रति उपार्जन केन्द्र किया गया। तौल कांटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 कर दी गई है। FAQ मापदण्ड को शिथिल करते हुए चमकविहीन गेहूं की सीमा 50% तक, सूकड़े दाने की सीमा 06% से बढ़ाकर 10% तक और क्षतिग्रस्त दानों की सीमा बढ़ाकर 06% तक की गई। उपार्जित गेहूं को रखने के लिये जूट बारदानों के साथ ही PP/HDP बैग एवं जूट के भर्ती बारदाने का उपयोग किया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर उपार्जित गेहूं के सुरक्षित भंडारण की पर्याप्त व्यवस्था की गई है।
गौरतलब है कि प्रदेश में गेहूँ उपार्जन के लिये इस वर्ष रिकार्ड 19 लाख 4 हजार किसानों ने पंजीयन कराया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 3 लाख 60 हजार अधिक है। विगत वर्ष समर्थन मूल्य पर लगभग 77 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन किया गया था। इस वर्ष सरकार द्वारा 100 लाख मीट्रिक टन गेहूं के उपार्जन का लक्ष्य रखा गया है।
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