इंग्लैंड ने की महिला टी20 विश्व कप के लिए टीम घोषित, भारत के खिलाफ भी खेलेगी
इंग्लैंड एवं वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) ने आईसीसी महिला टी20 विश्व कप 2026 के लिए मंगलवार को इंग्लैंड की 15 सदस्यीय टीम की घोषणा की जिसकी अगुआई ऑलराउंडर नैट स्काइवर ब्रंट करेंगी। स्काइवर ब्रंट की कप्तानी वाली इंग्लैंड की यही टीम मई-जून में भारत और न्यूजीलैंड के खिलाफ होने वाली सीरीज में भी हिस्सा लेगी जिसके बाद टी20 विश्व कप होगा। यह स्काइवर ब्रंट सातवां टी20 विश्व कप होगा।
भारतीय महिला टीम तीन टी20 अंतरराष्ट्रीय और लॉर्ड्स में एक टेस्ट मैच खेलने के लिए इंग्लैंड का दौरा करेगी। टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच मई के आखिर या जून की शुरुआत में होने हैं जबकि टेस्ट मैच 10 से 13 जुलाई तक होगा। यह इस प्रतिष्ठित मैदान पर इंग्लैंड की महिला टीम के मैच की 50वीं वर्षगांठ का मौका भी है।
इंग्लैंड टीम में नया नाम 18 वर्षीय सरे की स्पिनर टिली कोर्टिन कोलमैन हैं जो अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण करेंगी। साथ ही वारविकशर की इसी वोंग और डरहम की लॉरेन फाइलर को भी पहली बार टी20 विश्व कप के लिए टीम में जगह मिली है। सरे की डैनी वाट हॉज अपने आठवें टी20 विश्व कप में खेलेंगी। समरसेट की चार्जी डीन टीम की उप कप्तान होंगी जबकि हैंपशर की तेज गेंदबाज लॉरेन बेल गेंदबाजी आक्रमण की अगुवाई करेंगी।
इंग्लैंड में 2009 में हुए टी20 विश्व कप में टीम की अगुआई करते हुए उसे खिताब दिलाने वाली मुख्य कोच चार्लोट एडवर्ड्स की खिलाड़ियों को 12 जून से एजबस्टन में शुरू होने वाले इस टूर्नामेंट के लिए 960 से अधिक टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों का अनुभव है। खेल और मनोरंजन जगत के सितारों ने एक अनोखी फिल्म के जरिए इन 15 नाम की घोषणा की।
एडवर्ड्स ने कहा, ‘‘इंतजार और अटकलों का दौर अब खत्म हो गया है। हमने आईसीसी महिला टी20 विश्व कप के लिए अपनी टीम की घोषणा कर दी है। इसमें कोई शक नहीं कि इन 15 नाम को चुनना बेहद मुश्किल काम था।’’ उन्होंने कहा, ‘‘यह चयन बैठकों का अब तक का सबसे कठिन दौर था जिसका मैं हिस्सा रही हूं। इसकी वजह यह है कि हमारे पास चुनने के लिए खिलाड़ियों का जो समूह था वह बहुत मजबूत था।’’
एडवर्ड्स ने कहा, ‘‘अपनी धरती पर आईसीसी महिला टी20 विश्व कप का आयोजन इस देश में क्रिकेट के लिए एक बेहद खास पल है। हम सभी इस बात से बहुत प्रेरित हैं कि खिलाड़ियों के इस समूह के लिए भविष्य में क्या कुछ इंतजार कर रहा है और वे इन गर्मियों में क्या-कुछ हासिल कर सकते हैं।’’ टी20 विश्व कप टीम के अलावा चयनकर्ताओं ने न्यूजीलैंड के खिलाफ एकदिवसीय श्रृंखला और उसके बाद न्यूजीलैंड और भारत के खिलाफ होने वाली दो टी20 अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला के लिए भी टीम घोषित कर दी हैं।
नए एकदिवसीय विश्व कप चक्र की शुरुआत में तीन मैच की एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला के लिए आईसीसी महिला टी20 विश्व कप टीम में पांच खिलाड़ियों को शामिल किया गया है। इनमें किरा चैथली और जोडी ग्रूकोक को पहली बार अंतरराष्ट्रीय टीम में जगह मिली है। सोफिया डंकली, चार्ली डीन और डैनी वाट हॉज को काम के बोझ के प्रबंधन के कारण एकदिवसीय श्रृंखला में नहीं खिलाया जाएगा। सारा ग्लेन के चयन पर विचार नहीं किया गया क्योंकि वे अंगुली में फ्रेक्चर से उबर रही हैं।
इंग्लैंड महिला टीम
नैट स्काइवर ब्रंट, लॉरेन बेल, एलिस कैप्सी, टिली कोर्टिन कोलमैन, चार्ली डीन, सोफिया डंकली, सोफी एकलेस्टोन, लॉरेन फाइलर, डैनी गिब्सन, एमी जोन्स, फ्रेया केम्प, हीथर नाइट, लिन्से स्मिथ, इसी वोंग और डैनी वाट हॉज।
ईरान युद्ध के बीच UAE ने OPEC और OPEC प्लस छोड़ने का किया ऐलान, जानें भारत पर क्या होगा असर?
मध्य पूर्व की राजनीति और वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है. संयुक्त अरब अमीरात ने तेल उत्पादक देशों के प्रमुख संगठन OPEC और OPEC+ से बाहर निकलने का फैसला लेकर दुनिया को चौंका दिया है. यह कदम सिर्फ एक संगठन से अलग होना नहीं, बल्कि दशकों से चले आ रहे तेल के वैश्विक संतुलन को बदलने वाला निर्णय माना जा रहा है.
59 साल पुराना रिश्ता क्यों टूटा?
यूएई 1967 से ओपेक का हिस्सा रहा है, यानी करीब 59 वर्षों तक उसने इस संगठन के साथ मिलकर तेल उत्पादन और कीमतों को संतुलित रखने में भूमिका निभाई. लेकिन बदलते आर्थिक और रणनीतिक हालातों ने उसे यह बड़ा फैसला लेने पर मजबूर कर दिया.
विशेषज्ञों का मानना है कि यूएई अपनी उत्पादन क्षमता का पूरा इस्तेमाल करना चाहता था. उसके पास अधिक तेल निकालने की क्षमता है, लेकिन ओपेक के तय कोटा के कारण वह ऐसा नहीं कर पा रहा था. यही असंतोष धीरे-धीरे इस बड़े निर्णय की वजह बना.
क्षेत्रीय तनाव ने बढ़ाई जटिलता
यह फैसला ऐसे समय आया है जब खाड़ी क्षेत्र में तनाव चरम पर है. ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता टकराव पूरे क्षेत्र को अस्थिर बना रहा है. इसके अलावा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में भी हालात गंभीर बने हुए हैं. यह जलडमरूमध्य दुनिया के करीब 20% कच्चे तेल की सप्लाई का प्रमुख रास्ता है. यहां किसी भी तरह की रुकावट वैश्विक बाजार में तुरंत असर डालती है. मौजूदा तनाव के कारण तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हो रही है, जिससे सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ गया है.
वैश्विक तेल बाजार पर संभावित असर
यूएई के इस कदम का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ सकता है. अगर यूएई स्वतंत्र रूप से उत्पादन बढ़ाता है, तो बाजार में तेल की आपूर्ति बढ़ेगी और कीमतों में गिरावट आ सकती है. लेकिन दूसरी ओर, ओपेक में दरार आने से बाजार में अनिश्चितता और अस्थिरता भी बढ़ सकती है.
ऊर्जा विशेषज्ञ मानते हैं कि यह फैसला वैश्विक तेल राजनीति (Geopolitics) में नए समीकरण पैदा करेगा. ओपेक+ की एकजुटता कमजोर पड़ने से भविष्य में तेल उत्पादन को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है.
भारत पर क्या होगा असर?
भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों के लिए यह स्थिति दोधारी तलवार की तरह है. अगर तेल की कीमतें घटती हैं, तो भारत को राहत मिल सकती है. लेकिन यदि बाजार में अस्थिरता बढ़ती है, तो कीमतों में अचानक उछाल भी देखने को मिल सकता है.
भारत की अर्थव्यवस्था काफी हद तक आयातित तेल पर निर्भर है, इसलिए ऐसे वैश्विक फैसलों का असर सीधे महंगाई और आर्थिक विकास पर पड़ता है. यूएई का ओपेक से बाहर निकलना एक ऐतिहासिक मोड़ है, जो आने वाले समय में वैश्विक ऊर्जा बाजार की दिशा तय कर सकता है. यह फैसला न केवल तेल उत्पादन की रणनीतियों को बदलेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति और आर्थिक संतुलन पर भी गहरा प्रभाव डालेगा। अब पूरी दुनिया की नजर इस पर है कि आगे तेल बाजार किस दिशा में बढ़ता है.
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