Rubika Liyaquat Show: 142 सीटें, 1448 उम्मीदवार… क्या बंगाल बदलने वाला है? डू ऑर डाई फेज शुरू
Rubika Liyaquat Show: बस कुछ ही घंटों में पश्चिम बंगाल में दूसरे और फाइनल फेज की वोटिंग शुरू होने जा रही है, और माहौल ऐसा है कि हर तरफ सियासी गर्मी अपने चरम पर पहुंच चुकी है. इस दूसरे चरण में कुल 8 जिलों की 142 सीटों पर मतदान होगा, जहां करीब 1448 उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में बंद होने वाली है. यानी जनता की एक-एक वोट सीधे आने वाले सियासी भविष्य को तय करेगी. अब इस फेज को दोनों ही पार्टियां 'डू ऑर डाई' की तरह देख रही हैं. पहले चरण के बाद बीजेपी का आत्मविश्वास काफी बढ़ा हुआ बताया जा रहा है, जबकि टीएमसी अपनी पकड़ को मजबूत बताने में लगी है. बीजेपी के अंदरूनी रणनीतिकारों के हवाले से ये भी दावा किया जा रहा है कि पहले फेज में उन्हें उम्मीद से बेहतर सीटें मिल सकती हैं, वहीं टीएमसी इसे पूरी तरह खारिज कर रही है और अपने गढ़ पर भरोसा जता रही है. सबसे ज्यादा चर्चा में है दक्षिण 24 परगना जिला, जहां कुल 31 में से 30 सीटें 2021 में टीएमसी ने जीती थीं. इस बार भी यही इलाका सियासी टकराव का बड़ा केंद्र बना हुआ है. इसी बीच चुनावी माहौल में प्रशासनिक सख्ती और सुरक्षा व्यवस्था भी चर्चा का बड़ा मुद्दा बन गई है. चुनाव आयोग ने कई अधिकारियों के तबादले किए हैं और कुछ पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई भी हुई है. अब बड़ा सवाल यही है क्या दूसरे फेज में वोटिंग रिकॉर्ड तोड़ होगी? क्या बंगाल में सियासी समीकरण बदलेंगे? या फिर नतीजे एक बार फिर सबको चौंका देंगे?
यूट्यूब से सीखा हुनर, दो प्रेमियों ने मिलकर शुरू किया काम, अब रोजाना कर रहे जबरदस्त कमाई
छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर के घड़ी चौक से एक दिलचस्प और प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जहां एक प्रेमी युवा जोड़ी अपने छोटे से स्टार्टअप के जरिए न सिर्फ खुद का भविष्य संवारने में जुटी है, बल्कि लोगों को गर्मी में राहत भी दे रही है. हम बात कर रहे हैं ओम विश्वकर्मा और सुमन किस्पोट्टा की, जिन्होंने अपने प्यार और दोस्ती को एक नए मुकाम तक पहुंचाते हुए लस्सी का कारोबार शुरू किया है. भीषण गर्मी के बीच यह जोड़ी राहगीरों और स्थानीय लोगों को ठंडी और ताजगी से भरपूर लस्सी पिलाकर खास पहचान बना रही है. इस स्टार्टअप की खास बात यह है कि इसकी प्रेरणा डिजिटल प्लेटफॉर्म यूट्यूब से मिली. सुमन ने यूट्यूब के जरिए लस्सी बनाने की कला सीखी और फिर अपने साथी ओम के साथ मिलकर इसे व्यवसाय का रूप दे दिया. दोनों की पहली मुलाकात एक बिस्किट फैक्ट्री में हुई थी, जहां से शुरू हुआ यह रिश्ता अब साझेदारी और आत्मनिर्भरता की मिसाल बन गया है.
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