NCB की बड़ी कार्रवाई, तुर्की से कुख्यात ड्रग तस्कर सलीम डोला भारत लाया गया
Salim Dola: नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी सफलता हासिल करते हुए कुख्यात ड्रग तस्कर मोहम्मद सलीम डोला को तुर्की से भारत वापस लाया है. ‘ऑपरेशन ग्लोबल-हंट’ के तहत की गई इस कार्रवाई में अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों और भारतीय खुफिया तंत्र के बीच मजबूत समन्वय देखने को मिला. आज सुबह नई दिल्ली के IGI एयरपोर्ट पर पहुंचते ही NCB ने सलीम डोला को हिरासत में ले लिया है. 59 वर्षीय डोला मुंबई का निवासी है और पिछले कई वर्षों से अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी नेटवर्क का संचालन कर रहा था.
मोदी सरकार की जीरो टॉलरेंस पॉलिसी का उदाहरण
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने इस कार्रवाई को मोदी सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति का परिणाम बताते हुए कहा कि सरकार ड्रग सिंडिकेट्स के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ रही है. उन्होंने कहा कि अब ड्रग माफियाओं के लिए दुनिया का कोई भी कोना सुरक्षित नहीं है.
ये भी पढ़ें- भारत के लिए आई बड़ी खुशखबरी, न्यूजीलैंड के साथ डील के बाद सस्ती हो जाएंगी ये चीजें, देखें पूरी लिस्ट
साल 2024 में जारी हुआ था रेड नोटिस
डोला के खिलाफ मार्च 2024 में इंटरपोल का रेड नोटिस जारी किया गया था. वह भारत में कई बड़े ड्रग तस्करी मामलों में वांछित था और लंबे समय से कानून प्रवर्तन एजेंसियों की पकड़ से बाहर था. जांच एजेंसियों के अनुसार, उसका नेटवर्क मध्य पूर्व, अफ्रीका और यूरोप तक फैला हुआ था. उसके आपराधिक इतिहास में महाराष्ट्र और गुजरात में हेरोइन, चरस, मेफेड्रोन, मैंड्रेक्स और मेथामफेटामाइन की बड़ी खेपों की तस्करी शामिल है. डोला भारत में निचले स्तर के वितरण नेटवर्क के लिए एक प्रमुख सप्लायर के रूप में काम करता रहा है. गुजरात ATS और मुंबई पुलिस भी लंबे समय से उसकी तलाश में थीं.
2025 में बेटे और अन्य लोगों को पकड़ा गया था
इससे पहले, 2025 में उसके बेटे ताहिल सलीम डोला और अन्य सहयोगियों को UAE से वापस लाकर गिरफ्तार किया गया था. एजेंसियों का मानना है कि सलीम डोला की गिरफ्तारी से इस अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट को बड़ा झटका लगेगा. यह ऑपरेशन तुर्की के अधिकारियों, इंटरपोल और भारतीय एजेंसियों के बीच प्रभावी सहयोग का उदाहरण है और यह दर्शाता है कि भारत अब वैश्विक स्तर पर भी संगठित अपराध के खिलाफ अपनी पकड़ मजबूत कर चुका है.
ये भी पढ़ें- सिक्किम में PM मोदी ने बच्चों संग खेला फुटबॉल, गोल भी दागे, देखिए VIDEO
भारत की आर्थिक ग्रोथ में मैन्युफैक्चरिंग हब निभा रहे अहम भूमिका
नई दिल्ली, 28 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत को 2047 तक 30-35 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने में मैन्युफैक्चरिंग हब अहम भूमिका निभाएंगे। इस दौरान देश की जीडीपी में मैन्युफैक्चरिंग की हिस्सेदारी कम से कम 25 प्रतिशत हो जाएगी, जो कि फिलहाल 16-17 प्रतिशत के बीच है। यह जानकारी केंद्र सरकार की एक आधिकारिक फैक्ट-शीट में मंगलवार को दी गई।
केंद्र ने कहा कि भारत की मैन्युफैक्चरिंग रणनीति में एकीकृत मैन्युफैक्चरिंग केंद्रों के विकास पर अधिक ध्यान केंद्रित किया गया है। ये केंद्र फिजिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर, नियामक सहायता, साझा सुविधाओं और कनेक्टिविटी को संयोजित करने वाले क्षेत्रीय इकोसिस्टम हैं। इन केंद्रों को व्यापक उत्पादन को बढ़ावा देने, लेन-देन लागत को कम करने और दीर्घकालिक मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों को सुदृढ़ करने के लिए डिजाइन किया गया है, जिससे घरेलू और वैश्विक उत्पादन नेटवर्क में भारत की स्थिति मजबूत होती है।
आधिकारिक बयान के अनुसार, इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, सरकार की मैन्युफैक्चरिंग नीति इन्फ्रास्ट्रक्चर पर आधारित एकीकृत हब विकास की ओर मुड़ गई है, ताकि बड़े पैमाने पर उत्पादन, विश्वसनीयता और दीर्घकालिक औद्योगिक प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित की जा सके।
भारत के इन्फ्रास्ट्रक्चर संबंधी दृष्टिकोण में संरचनात्मक परिवर्तन आया है, जिसमें परियोजना-स्तरीय कार्यान्वयन से हटकर प्रणाली-स्तरीय नियोजन पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इस प्रकार का प्रणाली-स्तरीय नियोजन बाधाओं को कम करके, रसद दक्षता में सुधार करके और समय पर कार्यान्वयन को सुनिश्चित करके विनिर्माण हब की प्रभावशीलता को सीधे बढ़ाता है।
बयान में आगे कहा गया कि इन्फ्रास्ट्रक्चर के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए सरकार का पूंजीगत व्यय वित्त वर्ष 2014-15 में 2 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर वित्त वर्ष 2026-27 में 12.2 लाख करोड़ रुपए हो गया है।
वैश्विक निवेश रुझान भारत को एक पसंदीदा मैन्युफैक्चरिंग गंतव्य के रूप में तेजी से मान्यता दे रहे हैं। वर्तमान में देश विश्व स्तर पर तीसरा सबसे अधिक मांग वाला मैन्युफैक्चरिंग केंद्र है। साथ ही, उत्पादन की संरचना में भी बदलाव आ रहा है, जिसमें मध्यम और उच्च प्रौद्योगिकी गतिविधियां कुल विनिर्माण मूल्यवर्धन का 46.3 प्रतिशत हिस्सा हैं, जो अधिक परिष्कृत औद्योगिक संरचनाओं की ओर क्रमिक बदलाव का संकेत देती हैं।
7.47 करोड़ उद्यमों वाले लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) मैन्युफैक्चरिंग उत्पादन का 35.4 प्रतिशत हिस्सा हैं और देश भर में मैन्युफैक्चरिंग केंद्रों का आधार हैं। यह श्रम-प्रधान क्षेत्र अर्थव्यवस्था में रोजगार सृजन और आर्थिक विकास को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
2026-27 के केंद्रीय बजट में विकास की गति को तेज करने के लिए तीन केमिकल पार्क, सात पीएम मित्रा पार्क, एमएसएमई क्लस्टर और 10,000 करोड़ रुपए की बायोफार्मा शक्ति पहल का प्रस्ताव किया गया है।
वहीं, दिल्ली-मुंबई औद्योगिक कॉरिडोर (डीएमआईसी), चेन्नई-बेंगलुरु औद्योगिक कॉरिडोर (सीबीआईसी), अमृतसर-कोलकाता औद्योगिक कॉरिडोर (एकेआईसी) और विशाखापत्तनम चेन्नई औद्योगिक कॉरिडोर (वीसीआईसी) जैसे औद्योगिक कॉरिडोर, कनेक्टिविटी में सुधार और विभिन्न क्षेत्रों में एकीकृत योजना को सुगम बनाकर मैन्युफैक्चरिंग केंद्रों और क्लस्टरों को सहयोग प्रदान करने के लिए डिजाइन किए गए हैं।
--आईएएनएस
एबीएस/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation



















