28 साल बाद बड़े पर्दे पर लौटेगी तब्बू और नागार्जुन की जोड़ी, कभी होते थे इनके अफेयर के चर्चे
साउथ सिनेमा के सुपरस्टार नागार्जुन ने अपने फिल्मी करियर में दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया है। अब यह सुपरस्टार अपनी 100वीं फिल्म करने जा रहा है। इस फिल्म से जुड़ी सबसे खास बात यह है कि इसमें एक्टर के साथ उनकी एक्स गर्लफ्रेंड को देखा जाने वाला है।
नागार्जुन की इस फिल्म की सबसे ज्यादा चर्चा इसलिए हो रही है क्योंकि एक समय ऐसा था जब तब्बू को कथित तौर पर उनकी गर्लफ्रेंड बोला जाता था। अब दर्शक इस पुरानी जोड़ी को पर्दे पर देखने के लिए काफी उत्सुक हैं। चलिए जान लेते हैं कि ये कौन सी फिल्म है और इसे किस टाइटल के साथ बनाया जाने वाला है।
दो दशक बाद साथ नजर आएंगे नागार्जुन कर तब्बू
नागार्जुन तब्बू को आखिरी बार फिल्म आविदा मां आविदा में देखा गया था। इसके बाद इन दोनों को कभी भी स्क्रीन पर साथ काम करते हुए नहीं देखा गया। अब खुद तब्बू ने इस बात पर मुहर लगा दी है कि वो इस फिल्म में नागार्जुन के साथ नजर आने वाली हैं। भूत बंगला एक्ट्रेस ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट के जरिए एक तस्वीर शेयर करते हुए इस फिल्म के बारे में जानकारी दी है। एक्ट्रेस ने चेयर पर क्लैपबोर्ड रखी हुई तस्वीर शेयर की है। इस पर किंग 100 लिखा है, जो इस फिल्म का टेंटेटिव टाइटल है।
इस तस्वीर को शेयर करते हुए एक्ट्रेस ने कैप्शन में लिखा हमने किंग 100 की शूटिंग शुरू कर दी है। इस फिल्म के साथ 28 साल बाद ये जोड़ी वापस लौट रही है। बता दें कि मीडिया रिपोर्ट्स में इनका गहरा पास्ट होने की बात कही जाती है।
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लंबा चला था दोनों का अफेयर
नागार्जुन और तब्बू की पहली मुलाकात 1996 में हुई थी जब यह दोनों निल्ले पेल्लादाटा में काम कर रहे थे। 90 के दशक में इन दोनों के अफेयर की खूब चर्चा हुई। यह कहां जाता है कि जब दोनों ने एक दूसरे को डेट करना शुरू किया था तब नागार्जुन पहले से शादीशुदा था। लगभग 10 से 15 साल तक दोनों एक दूसरे को डेट किया। तब्बू उनसे शादी करना चाहती थी और इस वजह से सुपरस्टार का घर टूटते टूटते बचा था।
यह कहा जाता है कि नागार्जुन अपनी पत्नी अमला को नहीं तोड़ना चाहते थे। वहीं एक्टर की पत्नी ने घर टूटने की खबरों को अफवाह बताया था। उन्होंने यह भी कहा था कि तब्बू के साथ उनकी अच्छी दोस्ती है। यह भी कहा जाता है कि एक दशक तक नागार्जुन के साथ रहने के बाद एक्ट्रेस ने उनसे अलग होने का निर्णय लिया क्योंकि उन्हें समझ आ गया था कि एक्टर के साथ उनका कोई फ्यूचर नहीं है।
अफगानिस्तान: कुनार यूनिवर्सिटी पर पाकिस्तानी हमले में 30 लोग घायल, उच्च शिक्षा मंत्रालय ने की निंदा
काबुल, 28 अप्रैल (आईएएनएस)। अफगानिस्तान के उच्च शिक्षा मंत्रालय ने कुनार प्रांत में सैयद जमालुद्दीन अफगान यूनिवर्सिटी पर पाकिस्तानी मिसाइल हमले की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि इस हमले में करीब 30 छात्र और प्रोफेसर घायल हो गए, जबकि यूनिवर्सिटी परिसर को भी काफी नुकसान पहुंचा है।
हमले के बाद सोमवार को जारी एक बयान में, मंत्रालय ने इसे “कायरतापूर्ण, बेरहम और सभी इस्लामिक और अंतरराष्ट्रीय सिद्धांतों के खिलाफ” बताया।
इस हमले को शिक्षा और अफगानिस्तान की बुनियादी नींव पर हमला बताते हुए, मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से इस “बेरहम कार्रवाई” के सामने खामोश न रहने की अपील की।
बयान में आगे कहा गया कि अफगानिस्तान के उच्च शिक्षा मंत्री शेख नेदा मोहम्मद नदीम ने अधिकारियों से घायलों का तुरंत इलाज और देखभाल सुनिश्चित करने का निर्देश जारी किया।
मंत्रालय ने भरोसा दिलाया कि वह देश के शैक्षिक केंद्रों, खासकर विश्वविद्यालयों और धार्मिक संस्थानों की सुरक्षा के लिए अपने सभी संसाधनों का इस्तेमाल करेगा।
इस बीच, एक बड़े अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ने कुनार की राजधानी असदाबाद में पाकिस्तानी सैन्य हमलों में आम लोगों को पहुंचे नुकसान की खबरों पर गहरी चिंता जताई है।
स्थानीय सोर्स का हवाला देते हुए, इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स फाउंडेशन (आईएचआरएफ) ने कहा कि सोमवार दोपहर को हुए हमलों में रिहायशी इलाकों के साथ-साथ सैयद जमालुद्दीन अफगान यूनिवर्सिटी भी शामिल थी। इन हमलों में काफी संख्या में आम लोगों की मौत हुई और करीब 48 लोग घायल हुए।
ह्यूमन राइट्स संस्था ने कहा कि स्थानीय मेडिकल केंद्रों से मिली रिपोर्ट से पता चला है कि कई घायलों को यहां लाया गया और कुछ शव भी पहुंचाए गए।
आईएचआरएफ ने एक छात्र के हवाले से बताया कि हमले के वक्त क्लास चल रही थी। उसने कहा कि ऐसी बातें सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाने को लेकर गंभीर चिंता पैदा करती हैं।
ह्यूमन राइट्स संस्था ने कहा, यह घटना कुनार प्रांत में सीमा पार हिंसा के एक परेशान करने वाले पैटर्न को दिखाती है, जहां पिछले हमलों में कथित तौर पर महिलाओं और बच्चों समेत आम लोगों की मौत हुई है और जरूरी सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचा है।
इसमें आगे कहा गया, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून के तहत, किसी भी लड़ाई में शामिल सभी पार्टियों की यह जिम्मेदारी है कि वे हर समय आम लोगों और लड़ाकों के बीच और आम लोगों के सुविधा केंद्रों और मिलिट्री टारगेट के बीच फर्क करें। आम लोगों या आम लोगों के इंफ्रास्ट्रक्चर—जिसमें शैक्षिक संस्थान भी शामिल हैं—पर हमले पूरी तरह से प्रतिबंधित हैं।
आईएचआरएफ ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मूल्यों के तहत इस घटना की तुरंत, स्वतंत्र और पारदर्शी जांच की मांग उठाई।
--आईएएनएस
केआर/
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