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यूरोपीय संघ के सदस्यों की रूस में प्रवेश रोक सूची का व‍िस्‍तार, ईयू के नए प्रतिबंधों के जवाब उठाया कदम

मॉस्को, 27 अप्रैल (आईएएनएस)। रूसी विदेश मंत्रालय ने सोमवार को बताया क‍ि रूस में प्रवेश से रोक वाले यूरोपीय संघ (ईयू) से जुड़े लोगों की उस लिस्ट को काफी बढ़ा दिया गया है। यह कदम यूरोपीय संघ के 20वें प्रतिबंध पैकेज के जवाब में उठाया गया है।

मंत्रालय ने कहा कि ये फैसले गैरकानूनी हैं, और इस प्रतिबंधित सूची में यूरोपीय संस्थानों, यूरोपीय संघ के सदस्य देशों और ब्रसेल्स की रूस-विरोधी नीतियों का समर्थन करने वाले कई यूरोपीय देशों के प्रतिनिधि शामिल हैं।

यूरोपीय संघ लगातार रूस पर दबाव बना रहा है और एकतरफा प्रतिबंधों को बढ़ाता जा रहा है। यह नया प्रतिबंध पैकेज 23 अप्रैल को यूरोपीय संघ की काउंसिल ने मंजूर किया था।

रूस के विदेश मंत्रालय का कहना है कि इस तरह के कदम, जो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को नजरअंदाज करके उठाए जाते हैं, अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन हैं।

मंत्रालय ने बताया कि जिन लोगों को बैन किया गया है, उनमें वे लोग शामिल हैं, जो यूक्रेन को सैन्य मदद देने के फैसलों में शामिल हैं, रूस की क्षेत्रीय अखंडता को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों में लगे हैं, रूस पर प्रतिबंध लगाने में भूमिका निभा रहे हैं, दूसरे देशों के साथ रूस के रिश्ते खराब कर रहे हैं, रूस के हितों के खिलाफ समुद्री गतिविधियों में बाधा डाल रहे हैं, रूसी अधिकारियों के खिलाफ झूठे केस बना रहे हैं, रूस के नेतृत्व के खिलाफ “ट्रिब्यूनल” बनाने की कोशिश कर रहे हैं, और रूसी सरकारी संपत्तियों को जब्त करने या उनसे होने वाले मुनाफे का इस्तेमाल करने की बात कर रहे हैं।

रूस ने यूरोपीय देशों के कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं और अकादमिक क्षेत्र के लोगों पर भी कार्रवाई की है, जो रूस के खिलाफ सख्त रुख रखते हैं। यूरोपीय संघ के सदस्य देशों की संसदों और यूरोपीय संसद के वे सदस्य भी इस लिस्ट में हैं, जिन्होंने रूस-विरोधी प्रस्तावों और कानूनों के पक्ष में वोट किया था।

मंत्रालय ने यह भी कहा कि यूरोपीय संघ की ये नीतियां रूस की विदेश नीति पर कोई असर नहीं डाल पाएंगी। रूस का कहना है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करता रहेगा, नागरिकों के अधिकारों और स्वतंत्रता को सुनिश्चित करेगा, और एक न्यायसंगत, बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था बनाने में सक्रिय रूप से भाग लेता रहेगा।

इसके अलावा, यूरोपीय संघ ने रूस पर 20वें प्रतिबंध पैकेज के साथ ही यूक्रेन को 90 अरब यूरो का कर्ज देने का फैसला भी किया है।

--आईएएनएस

एवाई/एबीएम

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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Nitesh Rane Convicted: नितेश राणे को इंजीनियर पर कीचड़ फेकना पड़ गया भारी, कोर्ट ने सुनाई जेल की सजा

Nitesh Rane Convicted: महाराष्ट्र की राजनीति में सक्रिय रहने वाले और अपनी बेबाक बयानबाजी के लिए मशहूर बीजेपी नेता नितेश राणे के लिए कानूनी मोर्चे पर एक बड़ी खबर आई है. सिंधुदुर्ग की एक अदालत ने सोमवार को उन्हें साल 2019 के चर्चित 'कीचड़ कांड' में दोषी करार दिया है. यह मामला उस समय का है जब नितेश राणे विपक्ष में हुआ करते थे और उन्होंने जनता की शिकायतों के बीच एक सरकारी अधिकारी के साथ अभद्र व्यवहार किया था. अदालत ने इस मामले में नितेश राणे को एक महीने की जेल की सजा सुनाई है. हालांकि, अदालत ने उन्हें ऊपरी अदालत में अपील करने का मौका देते हुए सजा को फिलहाल निलंबित कर दिया है.

क्या है पांच साल पुराना यह चर्चित मामला?

यह पूरा घटनाक्रम 4 जुलाई 2019 का है. उस समय नितेश राणे कांग्रेस पार्टी के विधायक थे. मुंबई और गोवा को जोड़ने वाले राजमार्ग के चौड़ीकरण का काम चल रहा था. कंकावली के पास गाड नदी पर बने एक पुल के पास सड़क की हालत काफी खराब थी और वहां जगह-जगह जलभराव की समस्या हो रही थी. नितेश राणे अपने समर्थकों के साथ वहां पहुंचे और उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के सब-डिवीजनल इंजीनियर प्रकाश शेडेकर को मौके पर बुलाया. सड़क की खराब क्वालिटी से नाराज होकर राणे और उनके समर्थकों ने इंजीनियर शेडेकर के साथ बहस की. इसी दौरान इंजीनियर पर कीचड़ वाला पानी फेंका गया और उन्हें सार्वजनिक रूप से कीचड़ में चलने के लिए मजबूर किया गया.

अदालत ने कहा- कानून हाथ में लेना गलत

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश वीएस देशमुख ने इस मामले की सुनवाई करते हुए नितेश राणे के कृत्य पर कड़ी नाराजगी जताई. जज ने अपने फैसले में कहा कि भले ही राणे का मकसद सड़क के खराब काम और जनता की परेशानी को उठाना रहा हो, लेकिन उन्हें किसी सरकारी कर्मचारी का इस तरह सार्वजनिक रूप से अपमान करने का कोई हक नहीं था. अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि जो लोग कानून बनाने की जिम्मेदारी निभाते हैं, उन्हें ही कानून अपने हाथ में नहीं लेना चाहिए. अगर इस तरह की घटनाओं को बढ़ावा मिला, तो सरकारी कर्मचारी अपनी गरिमा के साथ काम नहीं कर पाएंगे. कोर्ट ने इसे सत्ता का दुरुपयोग माना और कहा कि समाज में ऐसी प्रवृत्तियों पर रोक लगाना बहुत जरूरी है.

बाकी आरोपी हुए बरी

इस मामले में पुलिस ने नितेश राणे के साथ-साथ कुल 30 लोगों को आरोपी बनाया था. इन सभी पर दंगा करने, सरकारी कर्मचारी के काम में बाधा डालने और आपराधिक साजिश रचने की धाराएं लगाई गई थीं. लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने पाया कि नितेश राणे के खिलाफ सबूत पर्याप्त हैं, लेकिन बाकी 29 लोगों के खिलाफ आरोपों की पुष्टि करने के लिए ठोस सबूत नहीं मिले. यही वजह रही कि कोर्ट ने बाकी सभी आरोपियों को बरी कर दिया, जबकि नितेश राणे को दोषी पाया गया. अदालत ने माना कि शिकायतकर्ता इंजीनियर एक बड़े पद पर तैनात थे और उन्हें जिस तरह अपमानित किया गया, उससे उनकी गरिमा को ठेस पहुंची है.

राणे के पास अभी अपील का है विकल्प

अदालत द्वारा एक महीने की जेल की सजा सुनाए जाने के बाद नितेश राणे को तत्काल जेल नहीं जाना पड़ेगा. कोर्ट ने उनकी सजा को कुछ समय के लिए निलंबित कर दिया है ताकि वह इस फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट या ऊपरी अदालत में अपनी अपील दायर कर सकें. नितेश राणे महाराष्ट्र के कद्दावर नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री नारायण राणे के बेटे हैं. वर्तमान में वह बीजेपी के टिकट पर विधायक हैं और कैबिनेट मंत्री के रूप में सरकार का हिस्सा हैं. इस सजा के बाद उनकी राजनीतिक मुश्किलें बढ़ सकती हैं या नहीं, यह तो आने वाले वक्त में पता चलेगा, लेकिन कोर्ट के इस फैसले ने सरकारी कर्मचारियों के सम्मान और नेताओं के व्यवहार को लेकर एक बड़ी बहस जरूर छेड़ दी है.

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