दिनेश त्रिवेदी: राजनीति का अनुभवी चेहरा और 'सर्वश्रेष्ठ सांसद', अब संभालेंगे भारत-बांग्लादेश के रिश्तों की कमान
नई दिल्ली, 27 अप्रैल (आईएएनएस)। दिनेश त्रिवेदी भारतीय राजनीति का एक अनुभवी चेहरा हैं, जिन्होंने संसद, सरकार और कूटनीति—तीनों क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सोमवार को भारत के विदेश मंत्रालय ने उन्हें बांग्लादेश का नया उच्चायुक्त नियुक्त किए जाने का ऐलान किया। मंझे हुए राजनेता के सामने चुनौती तो है, लेकिन अनुभव ऐसा है कि रिश्ते बेहतर होंगे, इसकी उम्मीद बढ़ जाती है।
4 जून 1950 को दिनेश त्रिवेदी का जन्म दिल्ली में हुआ। पिता का नाम हीरालाल और मां का उर्मिलाबेन था। परिवार बंटवारे की त्रासदी झेलकर कराची से भारत पहुंचा था। रोजी-रोटी और अवसर की तलाश में परिवार कोलकाता से लेकर पंजाब तक का सफर किया।
माई नेता डॉट कॉम पर उपलब्ध सामग्री के अनुसार, त्रिवेदी ने कोलकाता के ही सेंट जेवियर्स कॉलेज से वाणिज्य में स्नातक किया और बाद में अमेरिका से प्रबंधन की पढ़ाई की। राजनीति में आने से पहले वे व्यवसाय और एविएशन क्षेत्र से जुड़े रहे तथा एक प्रशिक्षित पायलट भी रहे हैं।
इन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत कांग्रेस से की, लेकिन बाद में वे जनता दल में शामिल हुए और 1990 में पहली बार राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए। 1998 में उन्होंने ममता बनर्जी के साथ मिलकर ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (एआईटीएमसी) की स्थापना में अहम भूमिका निभाई।
2009 में वे पश्चिम बंगाल के बैरकपुर से लोकसभा सांसद चुने गए और केंद्र की सत्ता में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया और फिर 2011 में रेल मंत्री बने। रेल बजट के दौरान यात्री किराए में वृद्धि के प्रस्ताव को लेकर वे चर्चा में रहे, और इसके बाद उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया।
त्रिवेदी कई संसदीय समितियों के सदस्य रहे हैं, और संसदीय कार्यों में उनकी सक्रिय भागीदारी के लिए उन्हें ‘आउटस्टैंडिंग पार्लियामेंटेरियन अवॉर्ड’ (2016-17) से भी सम्मानित किया गया। वह इंडो-यूरोपियन यूनियन पार्लियामेंट्री फोरम के चेयरमैन और विभिन्न संसदीय समितियों (वित्त, वाणिज्य, आदि) में सक्रिय भूमिका निभाते रहे।
राजनीतिक सफर में बदलाव करते हुए उन्होंने 2021 में टीएमसी से अलग होकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थाम लिया।
अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में त्रिवेदी ने आर्थिक, सामाजिक और रणनीतिक मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाई है। वे उन नेताओं में गिने जाते हैं जिन्होंने विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ काम करते हुए प्रशासनिक अनुभव और नीतिगत समझ विकसित की है।
--आईएएनएस
केआर/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
न्यूजीलैंड ने भारत में 20 अरब डॉलर के निवेश को प्रोत्साहित करने की प्रतिबद्धता जताई: सीआईआई
नई दिल्ली, 27 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत और न्यूजीलैंड के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) का उद्योग जगत ने जोरदार स्वागत किया है। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने इसे दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई देने वाला एक महत्वपूर्ण और भविष्य को ध्यान में रखकर उठाया गया कदम बताया है। यह समझौता व्यापार विविधीकरण, नवाचार और सतत विकास जैसे साझा लक्ष्यों पर आधारित है, जो एक मजबूत और टिकाऊ साझेदारी की नींव रखता है।
सीआईआई ने सोमवार को कहा कि इस समझौते की एक खास बात यह है कि इसमें व्यापार के साथ निवेश को भी जोड़ा गया है। न्यूजीलैंड ने अगले 15 वर्षों में भारत में 20 अरब डॉलर तक निवेश को प्रोत्साहित करने की प्रतिबद्धता जताई है। इससे भारत में औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम और इनोवेशन हब्स के विकास को गति मिलेगी। यह मॉडल व्यापार, निवेश और रोजगार सृजन को एक साथ जोड़कर समग्र विकास को बढ़ावा देगा।
भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) का स्वागत करते हुए शीर्ष उद्योग मंडल ने कहा कि इस एफटीए के तहत भारतीय निर्यात को 100 प्रतिशत ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिलने से आने वाले वर्षों में व्यापार में बड़ा विस्तार देखने को मिल सकता है।
इससे ट्रांसपोर्ट और ऑटोमोबाइल, फार्मास्युटिकल्स, प्लास्टिक और रबर, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण तथा मशीनरी जैसे प्रमुख सेक्टर अपने निर्यात को बढ़ाने और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा मजबूत करने की स्थिति में होंगे।
इस समझौते का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को 5 अरब डॉलर तक पहुंचाना है, जो दोनों देशों के बीच बढ़ते आर्थिक सहयोग का संकेत है।
यह समझौता एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, एग्रीटेक, फूड प्रोसेसिंग, डिजिटल टेक्नोलॉजी और फार्मास्युटिकल्स जैसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में सहयोग के नए अवसर खोलता है। भारत की विशाल क्षमता और डिजिटल ताकत के साथ न्यूजीलैंड की नवाचार क्षमता मिलकर वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी उद्योगों का निर्माण कर सकती है। साथ ही, ग्रीन और सस्टेनेबल मैन्युफैक्चरिंग में साझेदारी जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने में भी मदद करेगी।
सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने इस ऐतिहासिक समझौते के लिए भारत सरकार को बधाई देते हुए कहा कि यह भारत-न्यूजीलैंड व्यापार को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा। उन्होंने कहा कि यह एफटीए भारतीय उद्योग के लिए एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा और इससे निर्यात की प्रतिस्पर्धा में उल्लेखनीय सुधार होगा।
उन्होंने आगे कहा कि टेक्सटाइल, लेदर, सिरेमिक और ऑटो कंपोनेंट्स जैसे क्षेत्रों में टैरिफ खत्म होने से नए बाजारों में विस्तार और निरंतर निर्यात वृद्धि के अवसर मिलेंगे। इसके साथ ही यह समझौता उत्पादकता बढ़ाने, व्यापार लागत कम करने और एमएसएमई सेक्टर को मजबूत समर्थन देने में मदद करेगा।
यह समझौता नवाचार को बढ़ावा देने, निवेश आकर्षित करने और वैश्विक नेटवर्क को मजबूत करने के साथ-साथ भारत की दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती को भी सुदृढ़ करेगा।
बनर्जी ने आगे उम्मीद जताई कि दोनों देशों के हितधारकों के साथ मिलकर इस समझौते की पूरी क्षमता का लाभ उठाया जाएगा और भविष्य में इस रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत किया जाएगा।
--आईएएनएस
डीबीपी
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