शरीर के इन संकेतों न करें नजरअंदाज, हो सकते हैं मलेरिया के लक्षण
नई दिल्ली, 27 अप्रैल (आईएएनएस)। कई बार हमारा शरीर छोटे-छोटे संकेत देता है, लेकिन हम उन्हें आम थकान या मौसम का असर समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन यही लापरवाही आगे चलकर बड़ी परेशानी बन सकती है। खासकर मलेरिया जैसी बीमारी में शुरुआत के लक्षण इतने सामान्य लगते हैं कि लोग समझ ही नहीं पाते कि शरीर अंदर ही अंदर किसी संक्रमण से लड़ रहा है।
आयुष मंत्रालय ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर पोस्ट कर बताया कि मलेरिया में सबसे पहले जो लक्षण दिखते हैं, वो है तेज ठंड लगना और शरीर का कांपना। अचानक ऐसा महसूस होता है जैसे बहुत ज्यादा सर्दी लग गई हो और शरीर बुरी तरह कांपने लगता है। इसके बाद तेज बुखार चढ़ता है, जो कभी-कभी बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। कई लोगों को लगता है कि यह सामान्य वायरल फीवर है, लेकिन मलेरिया में बुखार का पैटर्न थोड़ा अलग होता है।
इसके साथ ही तेज सिरदर्द होना भी आम है। सिर भारी लगने लगता है और किसी काम में मन नहीं लगता। शरीर में कमजोरी और सुस्ती भी बढ़ जाती है, जिससे इंसान दिन भर थका-थका महसूस करता है। कुछ मामलों में उल्टी और मतली भी शुरू हो जाती है, जिससे मरीज और ज्यादा कमजोर हो जाता है।
जैसे-जैसे बुखार उतरता है, वैसे-वैसे शरीर में बहुत ज्यादा पसीना आने लगता है। कपड़े तक भीग जाते हैं और शरीर बिल्कुल थका हुआ महसूस करता है। कई बार लोगों को दस्त भी हो जाते हैं, जिससे पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है।
सबसे बड़ी समस्या यह है कि कुछ लोग इन शुरुआती लक्षणों को हल्के में ले लेते हैं। वे सोचते हैं कि यह सिर्फ मौसम बदलने की वजह से हुआ है और खुद ही ठीक हो जाएगा। लेकिन मलेरिया अगर समय पर पकड़ में न जाए तो यह गंभीर रूप ले सकता है और शरीर के कई अंगों को प्रभावित कर सकता है।
इसलिए जरूरी है कि अगर किसी को बार-बार ठंड लगना, तेज बुखार, सिरदर्द, उल्टी या बहुत ज्यादा पसीना आने जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से जांच करवाएं। शुरुआती इलाज से यह बीमारी आसानी से ठीक हो सकती है।
--आईएएनएस
पीआईएम/एएस
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शराब नीति केस: अरविंद केजरीवाल का बड़ा ऐलान, जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की अदालत में नहीं होंगे पेश
शराब नीति केस: दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने शराब नीति मामले में बड़ा फैसला लिया है. दरअसल, निचली अदालत से बरी होने के बाद जांच एजेंसी ने इस फैसले को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है. इस मामले की सुनवाई जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा (Swarn Kanta Sharma) की बेंच में होनी है. लेकिन केजरीवाल ने ऐलान किया है कि वह जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की अदालत में पेश नहीं होंगे. उन्होंने एक पत्र लिखकर कहा कि न तो वह खुद कोर्ट में आएंगे और न ही किसी वकील के जरिए अपनी बात रखेंगे. केजरीवाल का कहना है कि उन्हें इस अदालत से न्याय मिलने की उम्मीद नहीं रही है.
AAP National Convenor Arvind Kejriwal writes to Justice Swarana Kanta Sharma stating that he will not appear before her in person or through a lawyer.
— ANI (@ANI) April 27, 2026
Kejriwal writes, "My hope of getting justice from Justice Swarn Kanta is shattered. Therefore, I have decided to follow… pic.twitter.com/PIgznx0LUQ
केजरीवाल ने पत्र में क्या लिखा?
अपने पत्र में केजरीवाल ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) का जिक्र करते हुए कहा कि वह अब सत्याग्रह का रास्ता अपनाएंगे. उन्होंने कहा कि यह फैसला उन्होंने अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनकर लिया है. उनका इशारा है कि वह कानूनी लड़ाई के बजाय नैतिक विरोध करेंगे.
#WATCH | AAP National Convenor Arvind Kejriwal releases a video, he says, "My hope of receiving justice from Justice Swarnkanta Sharma Ji has been shattered. Listening to the voice of my conscience, adhering to the principles of Gandhi Ji, and with the spirit of Satyagraha, I… pic.twitter.com/jOTxvyfOHd
— ANI (@ANI) April 27, 2026
सुप्रीम कोर्ट जाने का विकल्प खुला
हालांकि केजरीवाल ने यह भी साफ किया कि अगर इस मामले में कोई फैसला उनके खिलाफ आता है, तो वह सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of India) जाने का अधिकार अपने पास सुरक्षित रखेंगे.
क्या है पूरा मामला?
यह मामला दिल्ली की शराब नीति से जुड़ा है. केजरीवाल और अन्य आरोपियों ने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा से इस केस की सुनवाई से खुद को अलग करने की मांग की थी. उन्होंने जज पर पक्षपात की आशंका जताई थी और कुछ कारण भी बताए थे.
"My hope of receiving justice has shattered": Kejriwal refuses to appear before Delhi HC Judge Swarana Kanta Sharma in excise policy case
— ANI Digital (@ani_digital) April 27, 2026
Read @ANI Story | https://t.co/TlzDeL7SfA #ArvindKejriwal #SwaranaKantaSharma #ExcisePolicyCase #DelhiHighCourt pic.twitter.com/le1UbrpnFc
जज ने याचिका क्यों खारिज की?
जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने इस मांग को खारिज करते हुए कहा कि सिर्फ शक के आधार पर कोई जज किसी मामले से खुद को अलग नहीं कर सकता. उन्होंने कहा कि केजरीवाल की याचिका में ठोस सबूत नहीं हैं और यह न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल उठाने जैसा है. सुनवाई के दौरान जज ने यह भी कहा कि इस तरह की मांग से ऐसी स्थिति बनती है, जहां किसी भी फैसले को अपने हिसाब से पेश किया जा सकता है. उन्होंने साफ कहा कि वह संविधान के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाएंगी और किसी दबाव में नहीं आएंगी.
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