नंदा की चौकी पुल की एप्रोच रोड का CM धामी ने किया निरीक्षण, 12 घंटे में पूरा हुआ पुनर्निर्माण
देहरादून में नंदा की चौकी पुल की क्षतिग्रस्त एप्रोच रोड के पुनर्निर्माण कार्य का मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को निरीक्षण किया. सहसपुर के भाऊवाला में आयोजित महिला संवाद एवं सम्मान कार्यक्रम से लौटते समय मुख्यमंत्री प्रेमनगर स्थित नंदा की चौकी पहुंचे. यहां उन्होंने मौके पर चल रहे निर्माण कार्य की प्रगति और व्यवस्थाओं का जायजा लिया.
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से सड़क के पुनर्निर्माण, निर्माण की गुणवत्ता, सुरक्षा इंतजाम और यातायात संचालन को लेकर जानकारी ली. उन्होंने यह भी देखा कि सड़क को दोबारा चालू करने के बाद आम लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो और यातायात व्यवस्था सुचारू बनी रहे.
क्षतिग्रस्त सड़क की सूचना मिलते ही शुरू हुआ काम
नंदा की चौकी पुल की एप्रोच रोड क्षतिग्रस्त होने की जानकारी सामने आने के बाद राज्य सरकार ने तत्काल कार्रवाई की. मुख्यमंत्री के निर्देश पर संबंधित विभागों को बिना देरी किए राहत और पुनर्निर्माण कार्य शुरू करने के निर्देश दिए गए.
सरकार की ओर से अधिकारियों को निर्माण कार्य को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने को कहा गया, ताकि सड़क बंद रहने से स्थानीय लोगों और वाहन चालकों को लंबे समय तक परेशानी का सामना न करना पड़े.
महज 12 घंटे में पूरा हुआ पुनर्निर्माण
सरकार के निर्देश के बाद संबंधित विभागों, अभियंताओं और कर्मचारियों ने युद्धस्तर पर काम किया. एप्रोच रोड का पुनर्निर्माण महज 12 घंटे के भीतर पूरा कर लिया गया. इसके बाद क्षेत्र में यातायात व्यवस्था को जल्द सामान्य करने में मदद मिली.
तेजी से किए गए इस निर्माण कार्य से स्थानीय लोगों को राहत मिली और महत्वपूर्ण मार्ग पर आवाजाही प्रभावित होने की अवधि भी कम हुई.
CM ने गुणवत्ता और सुरक्षा व्यवस्था पर लिया फीडबैक
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने केवल निर्माण की गति ही नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता पर भी अधिकारियों से जानकारी ली. उन्होंने सड़क निर्माण में निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया.
इसके साथ ही कार्यस्थल पर सुरक्षा व्यवस्था और यातायात संचालन की स्थिति का भी जायजा लिया गया. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि निर्माण के दौरान आम लोगों की सुरक्षा और सुचारू यातायात को प्राथमिकता दी जाए.
अधिकारियों और कर्मचारियों की सराहना
मुख्यमंत्री ने एप्रोच रोड के पुनर्निर्माण कार्य को कम समय में पूरा करने के लिए संबंधित अधिकारियों, अभियंताओं और कर्मचारियों के प्रयासों की सराहना की. उन्होंने कहा कि आपात स्थिति में विभागों के बीच बेहतर समन्वय और तेजी से कार्रवाई जरूरी होती है.
नंदा की चौकी में सड़क क्षतिग्रस्त होने के बाद जिस तेजी से काम शुरू किया गया, उससे यह सुनिश्चित करने की कोशिश की गई कि लोगों को लंबे समय तक आवागमन की समस्या न झेलनी पड़े.
आमजन की सुविधा पर सरकार का फोकस
नंदा की चौकी पुल क्षेत्र में यातायात की दृष्टि से महत्वपूर्ण मार्ग है. ऐसे में एप्रोच रोड के क्षतिग्रस्त होने से लोगों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका थी. सरकार की त्वरित कार्रवाई से स्थिति को जल्द सामान्य करने में मदद मिली.
मुख्यमंत्री के निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने निर्माण कार्य और यातायात व्यवस्था से जुड़ी मौजूदा स्थिति की जानकारी दी. राज्य सरकार का कहना है कि सड़क और पुल जैसे महत्वपूर्ण आधारभूत ढांचे की सुरक्षा तथा समय पर मरम्मत को प्राथमिकता दी जा रही है.
कुल मिलाकर, नंदा की चौकी पुल की एप्रोच रोड का 12 घंटे में पुनर्निर्माण और उसके बाद मुख्यमंत्री द्वारा मौके पर निरीक्षण प्रशासन की त्वरित कार्रवाई और निर्माण कार्य की निगरानी को दर्शाता है. अब निर्माण की गुणवत्ता और सड़क की दीर्घकालिक मजबूती पर भी विशेष नजर रखी जा रही है.
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Bihar Drinking Water Crisis: बिहार में विकास की रफ्तार और सरकार के बड़े-बड़े दावों पर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं. राज्य में जिन बड़ी विकास परियोजनाओं का उद्घाटन कराने की भव्य तैयारियां चल रही थीं, उनमें से कई आज भी अधूरी लटकी पड़ी हैं. लगभग 47,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली यह परियोजनाएं तय समय सीमा बीत जाने के बाद भी पूरी नहीं हो सकी हैं. एक तरफ जहां अरबों रुपये की फाइलें सरकारी दफ्तरों में अटकी पड़ी हैं, वहीं दूसरी तरफ जमीन पर आम जनता बुनियादी जरूरतों के लिए तरस रही है. राज्य के कई जिलों में पीने के पानी की समस्या ने इतना विकराल रूप ले लिया है कि लोगों का जीवन कठिन हो गया है. विशेष रूप से वैशाली, बांका और दरभंगा जैसे जिलों में सरकार की महत्वाकांक्षी नल-जल योजना पूरी तरह धाराशायी होती दिखाई दे रही है.
करोड़ों की योजनाएं अधूरी और जनता परेशान
बिहार में विकास की धीमी चाल का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जनहित से जुड़ी बड़ी योजनाएं समय पर पूरी नहीं हो पा रही हैं. नल-जल योजना को हर घर तक साफ पानी पहुंचाने के मकसद से शुरू किया गया था, लेकिन देखरेख के अभाव और तकनीकी कमियों के कारण यह योजना लोगों की प्यास बुझाने में नाकाम साबित हो रही है. वैशाली से लेकर बांका और दरभंगा तक, ग्रामीण इलाकों में नल-जल योजना का ढांचा खड़ा तो कर दिया गया, लेकिन नलों से पानी गायब है. भीषण गर्मी के इस मौसम में भूजल स्तर लगातार नीचे गिर रहा है, जिससे पारंपरिक चापाकल भी पानी देना बंद कर चुके हैं. ऐसे में ग्रामीण जनता दूर-दराज के इलाकों से पानी ढोने को मजबूर है.
बांका में बूंद-बूंद पानी को तरस रहे लोग
बांका जिले के शंभूगंज प्रखंड क्षेत्र के मोढ़िया पचरूखी गांव में स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है. गांव में भूजल स्तर काफी नीचे चले जाने की वजह से ज्यादातर सरकारी और निजी चापाकल पूरी तरह सूख चुके हैं. इसके अलावा गांव में नल-जल योजना के तहत जो बोरिंग लगाई गई थी, वह भी काफी समय से खराब पड़ी है. पानी की किल्लत से तंग आकर दो दर्जन से अधिक ग्रामीण शंभूगंज प्रखंड मुख्यालय पहुंचे और पीएचईडी विभाग के दफ्तर का घेराव किया. ग्रामीणों ने अधिकारियों को बताया कि भीषण गर्मी में पीने के पानी का कोई सहारा नहीं बचा है. विभाग के कनीय अभियंता सुबोध कुमार ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया है कि बोरिंग की खराबी को जल्द ठीक कराया जाएगा और जलापूर्ति बहाल की जाएगी.
दरभंगा में रात तीन बजे से लग रही लाइन
पेयजल की ऐसी ही दर्दनाक तस्वीर दरभंगा प्रखंड क्षेत्र से सामने आ रही है. दरभंगा की आधा दर्जन पंचायतों में जल संकट बहुत गंभीर हो गया है. उघरा पंचायत के वार्ड नंबर 11 की हालत सबसे ज्यादा खराब है. पूरे वार्ड में इस समय सिर्फ एक निजी समरसेबुल चालू हालत में है. इसी एक जलस्रोत के भरोसे सैकड़ों परिवारों का गुजारा हो रहा है. स्थानीय निवासियों का कहना है कि पानी लेने के लिए लोगों को रात के तीन बजे से ही बाल्टी लेकर लाइन में खड़ा होना पड़ता है. रात भर लाइन में लगने के बाद भी लोगों को केवल दो या तीन बाल्टी पानी ही मिल पाता है. पानी के इस संकट के कारण बच्चों को स्कूल जाने से पहले नहाने तक के लिए पानी नहीं मिल पा रहा है. कई बार पानी लेने को लेकर ग्रामीणों के बीच आपस में विवाद और कहासुनी भी हो जाती है.
महिलाओं और बच्चों पर पड़ रहा सबसे बुरा असर
पेयजल की इस भीषण किल्लत की सबसे ज्यादा मार महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ रही है. घर का काम संभालने वाली महिलाओं का आधा दिन सिर्फ पानी की व्यवस्था करने में ही बीत जाता है. बच्चों की पढ़ाई और बुजुर्गों की सेहत पर भी इसका बहुत बुरा प्रभाव पड़ रहा है. उघरा पंचायत के निवासियों का कहना है कि नल-जल योजना की मोटर पिछले कई दिनों से जल चुकी है, लेकिन विभाग की ओर से इसे ठीक करने की कोई ठोस पहल नहीं की गई. सरकारी दावों के विपरीत धरातल पर नल की पाइपलाइन सूखी पड़ी हैं और चापाकल जवाब दे चुके हैं.
प्रशासन और विभाग से जल्द कार्रवाई की मांग
पेयजल की समस्या से बेहाल ग्रामीणों ने अब स्थानीय प्रशासन और पीएचईडी विभाग से युद्धस्तर पर टैंकरों के जरिए जलापूर्ति शुरू करने की गुहार लगाई है. इसके साथ ही गांव में नए समरसेबुल और चापाकल लगाने की मांग भी की गई है. वार्ड प्रतिनिधियों का कहना है कि विभाग को कई बार आवेदन देने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है. ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर समय रहते इस विकराल समस्या का समाधान नहीं निकाला गया, तो गर्मी के मौसम में बीमारियां फैलने का डर बढ़ जाएगा. इस पूरे मामले पर प्रखंड प्रशासन का कहना है कि पीएचईडी विभाग को तुरंत जलापूर्ति बहाल करने और खराब पड़ी बोरिंग की मरम्मत कराने के कड़े निर्देश जारी किए गए हैं.
शेखपुरा के महादलित टोले में दो महीने से जलापूर्ति ठप
शेखपुरा नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड नंबर 33 स्थित एकसारी गांव में पिछले दो महीने से पानी की आपूर्ति बंद है. इस वजह से ग्रामीणों का गुस्सा खुलकर सामने आया है. गांव के महादलित टोले के गरीब और मजदूर परिवार पानी जुटाने के लिए दर-दर भटक रहे हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में तीन जलापूर्ति योजनाएं और वाटर टावर बने हैं, लेकिन पिछले तीन सालों में टंकी में पानी तक नहीं चढ़ाया गया. अब तो टावर से टंकी ही गायब हो चुकी है.
प्रशासनिक अनदेखी से बढ़ा ग्रामीणों का गुस्सा
एकसारी गांव में तीन में से दो बोरवेल पूरी तरह खराब पड़े हैं. इससे करीब 75 प्रतिशत आबादी को पीने का पानी नहीं मिल पा रहा है. यादव टोला, कुर्मी टोला और मांझी टोला में भी हालात बेहद खराब हैं. बार-बार शिकायत करने के बाद भी नगर परिषद या वार्ड पार्षद की ओर से कोई ध्यान नहीं दिया गया. परेशान ग्रामीणों ने अब जिला अधिकारी से मामले में सीधे हस्तक्षेप कर व्यवस्था सुधारने की गुहार लगाई है.
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