बिहार में बूंद-बूंद को तरसे लोग, करोड़ों खर्च के बाद भी नल सूखे! क्या है नल-जल योजना की जमीनी हकीकत?
Bihar Drinking Water Crisis: बिहार में विकास की रफ्तार और सरकार के बड़े-बड़े दावों पर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं. राज्य में जिन बड़ी विकास परियोजनाओं का उद्घाटन कराने की भव्य तैयारियां चल रही थीं, उनमें से कई आज भी अधूरी लटकी पड़ी हैं. लगभग 47,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली यह परियोजनाएं तय समय सीमा बीत जाने के बाद भी पूरी नहीं हो सकी हैं. एक तरफ जहां अरबों रुपये की फाइलें सरकारी दफ्तरों में अटकी पड़ी हैं, वहीं दूसरी तरफ जमीन पर आम जनता बुनियादी जरूरतों के लिए तरस रही है. राज्य के कई जिलों में पीने के पानी की समस्या ने इतना विकराल रूप ले लिया है कि लोगों का जीवन कठिन हो गया है. विशेष रूप से वैशाली, बांका और दरभंगा जैसे जिलों में सरकार की महत्वाकांक्षी नल-जल योजना पूरी तरह धाराशायी होती दिखाई दे रही है.
करोड़ों की योजनाएं अधूरी और जनता परेशान
बिहार में विकास की धीमी चाल का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जनहित से जुड़ी बड़ी योजनाएं समय पर पूरी नहीं हो पा रही हैं. नल-जल योजना को हर घर तक साफ पानी पहुंचाने के मकसद से शुरू किया गया था, लेकिन देखरेख के अभाव और तकनीकी कमियों के कारण यह योजना लोगों की प्यास बुझाने में नाकाम साबित हो रही है. वैशाली से लेकर बांका और दरभंगा तक, ग्रामीण इलाकों में नल-जल योजना का ढांचा खड़ा तो कर दिया गया, लेकिन नलों से पानी गायब है. भीषण गर्मी के इस मौसम में भूजल स्तर लगातार नीचे गिर रहा है, जिससे पारंपरिक चापाकल भी पानी देना बंद कर चुके हैं. ऐसे में ग्रामीण जनता दूर-दराज के इलाकों से पानी ढोने को मजबूर है.
बांका में बूंद-बूंद पानी को तरस रहे लोग
बांका जिले के शंभूगंज प्रखंड क्षेत्र के मोढ़िया पचरूखी गांव में स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है. गांव में भूजल स्तर काफी नीचे चले जाने की वजह से ज्यादातर सरकारी और निजी चापाकल पूरी तरह सूख चुके हैं. इसके अलावा गांव में नल-जल योजना के तहत जो बोरिंग लगाई गई थी, वह भी काफी समय से खराब पड़ी है. पानी की किल्लत से तंग आकर दो दर्जन से अधिक ग्रामीण शंभूगंज प्रखंड मुख्यालय पहुंचे और पीएचईडी विभाग के दफ्तर का घेराव किया. ग्रामीणों ने अधिकारियों को बताया कि भीषण गर्मी में पीने के पानी का कोई सहारा नहीं बचा है. विभाग के कनीय अभियंता सुबोध कुमार ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया है कि बोरिंग की खराबी को जल्द ठीक कराया जाएगा और जलापूर्ति बहाल की जाएगी.
दरभंगा में रात तीन बजे से लग रही लाइन
पेयजल की ऐसी ही दर्दनाक तस्वीर दरभंगा प्रखंड क्षेत्र से सामने आ रही है. दरभंगा की आधा दर्जन पंचायतों में जल संकट बहुत गंभीर हो गया है. उघरा पंचायत के वार्ड नंबर 11 की हालत सबसे ज्यादा खराब है. पूरे वार्ड में इस समय सिर्फ एक निजी समरसेबुल चालू हालत में है. इसी एक जलस्रोत के भरोसे सैकड़ों परिवारों का गुजारा हो रहा है. स्थानीय निवासियों का कहना है कि पानी लेने के लिए लोगों को रात के तीन बजे से ही बाल्टी लेकर लाइन में खड़ा होना पड़ता है. रात भर लाइन में लगने के बाद भी लोगों को केवल दो या तीन बाल्टी पानी ही मिल पाता है. पानी के इस संकट के कारण बच्चों को स्कूल जाने से पहले नहाने तक के लिए पानी नहीं मिल पा रहा है. कई बार पानी लेने को लेकर ग्रामीणों के बीच आपस में विवाद और कहासुनी भी हो जाती है.
महिलाओं और बच्चों पर पड़ रहा सबसे बुरा असर
पेयजल की इस भीषण किल्लत की सबसे ज्यादा मार महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ रही है. घर का काम संभालने वाली महिलाओं का आधा दिन सिर्फ पानी की व्यवस्था करने में ही बीत जाता है. बच्चों की पढ़ाई और बुजुर्गों की सेहत पर भी इसका बहुत बुरा प्रभाव पड़ रहा है. उघरा पंचायत के निवासियों का कहना है कि नल-जल योजना की मोटर पिछले कई दिनों से जल चुकी है, लेकिन विभाग की ओर से इसे ठीक करने की कोई ठोस पहल नहीं की गई. सरकारी दावों के विपरीत धरातल पर नल की पाइपलाइन सूखी पड़ी हैं और चापाकल जवाब दे चुके हैं.
प्रशासन और विभाग से जल्द कार्रवाई की मांग
पेयजल की समस्या से बेहाल ग्रामीणों ने अब स्थानीय प्रशासन और पीएचईडी विभाग से युद्धस्तर पर टैंकरों के जरिए जलापूर्ति शुरू करने की गुहार लगाई है. इसके साथ ही गांव में नए समरसेबुल और चापाकल लगाने की मांग भी की गई है. वार्ड प्रतिनिधियों का कहना है कि विभाग को कई बार आवेदन देने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है. ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर समय रहते इस विकराल समस्या का समाधान नहीं निकाला गया, तो गर्मी के मौसम में बीमारियां फैलने का डर बढ़ जाएगा. इस पूरे मामले पर प्रखंड प्रशासन का कहना है कि पीएचईडी विभाग को तुरंत जलापूर्ति बहाल करने और खराब पड़ी बोरिंग की मरम्मत कराने के कड़े निर्देश जारी किए गए हैं.
शेखपुरा के महादलित टोले में दो महीने से जलापूर्ति ठप
शेखपुरा नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड नंबर 33 स्थित एकसारी गांव में पिछले दो महीने से पानी की आपूर्ति बंद है. इस वजह से ग्रामीणों का गुस्सा खुलकर सामने आया है. गांव के महादलित टोले के गरीब और मजदूर परिवार पानी जुटाने के लिए दर-दर भटक रहे हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में तीन जलापूर्ति योजनाएं और वाटर टावर बने हैं, लेकिन पिछले तीन सालों में टंकी में पानी तक नहीं चढ़ाया गया. अब तो टावर से टंकी ही गायब हो चुकी है.
प्रशासनिक अनदेखी से बढ़ा ग्रामीणों का गुस्सा
एकसारी गांव में तीन में से दो बोरवेल पूरी तरह खराब पड़े हैं. इससे करीब 75 प्रतिशत आबादी को पीने का पानी नहीं मिल पा रहा है. यादव टोला, कुर्मी टोला और मांझी टोला में भी हालात बेहद खराब हैं. बार-बार शिकायत करने के बाद भी नगर परिषद या वार्ड पार्षद की ओर से कोई ध्यान नहीं दिया गया. परेशान ग्रामीणों ने अब जिला अधिकारी से मामले में सीधे हस्तक्षेप कर व्यवस्था सुधारने की गुहार लगाई है.
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रोहित-विराट समेत 2027 वनडे वर्ल्ड कप की तैयारी के लिए इस टूर्नामेंट में खेलेंगे भारत के 7 सीनियर खिलाड़ी, जानें कब होंगे मैच?
Vijay Hazare Trophy 2027 : विजय हजारे ट्रॉफी 2027 का आयोजन भारत में 14 दिसंबर से होने वाला है. इस बार टूर्नामेंट का फाइनल 8 जनवरी को खेला जाएगा. ये भारत का घरेलू टूर्नामेंट है, जो 50 ओवर फॉर्मेट में खेला जाता है. विजय हजारे ट्रॉफी 2026-27 सीजन का पहला सेमीफाइनल मुकाबला 5 जनवरी 2027 को खेला जाएगा. वहीं 6 जनवरी 2027 को दूसरा सेमीफाइनल खेला जाएगा. इस बार विजय हजारे ट्रॉफी भारतीय क्रिकेट के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण होने वाली है. क्योंकि 2027 में भारत को आईसीसी वनडे वर्ल्ड कप खेलना है.
आईसीसी वनडे वर्ल्ड कप 2027 की शुरुआत 4 अक्टूबर से होगी. इस टूर्नामेंट का अंत 21 नवंबर 2027 को होगा. वनडे वर्ल्ड कप की इस बारे मेजबानी साउथ अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया की मेजबानी में खेला जाने वाला है. उससे पहले विजय हजारे ट्रॉफी भारतीय क्रिकेट टीम के वर्ल्ड कप सिलेक्शन में अहम भूमिका निभा सकती है. क्योंकि इस टूर्नामेंट से उन घरेलू खिलाड़ियों के प्रदर्शन के बारे में पता चलेगा, जिन पर भारतीय चयनकर्ता और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) वनडे वर्ल्ड कप से पहले नजरें बनाए रखा होगा.
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— Indian Cricket (@IndianCricketHQ) August 4, 2026
Mohammed Shami, Mohammed Siraj, Bhuvneshwar Kumar, and Ravindra Jadeja are set to make their comeback in the 2027 ODI World Cup.
- Harshit Rana, Prasidh Krishna, Arshdeep Singh are set to get dropped.
- Gurnoor Brar and Nitish Kumar Reddy will get long… pic.twitter.com/fcFd8NwYz9
इसके साथ ही विजय हजारे ट्रॉफी उन सीनियर खिलाड़ियों को लिए भी मौका है, जो वनडे वर्ल्ड कप 2027 में जगह बनाने चाहते हैं लेकिन चयनकर्ताओं ने उन्हें लगभग स्कीम से बाहर कर दिया है. इन खिलाड़ियों के पास मौका होगा कि वो विजय हजारे ट्रॉफी 2027 में शानदार प्रदर्शन कर एक बार फिर से चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींचे और उन्हें वनडे वर्ल्ड कप 2027 के लिए खुद को चुनने पर मजबूर कर दें.
ऐसे में इस बार विजय हजारे ट्रॉफी में कई सीनियर खिलाड़ियों के भी खेलने की उम्मीद है, जो वनडे वर्ल्ड कप 2027 से पहले खुद को पूरी तरह से प्रैक्टिस देना चाहते हैं. क्योंकि भारतीय टीम के वनडे वर्ल्ड कप 2027 से पहले बहुत कम वनडे मैच खेलने के लिए मिलने वाले हैं. ऐसे में ये खिलाड़ी अपने आप को वर्ल्ड कप के लिए तैयार करने के लिए पूरी तरह से तैयार करने के लिए इस टूर्नामेंट में उतरने वाले हैं.
ये सीनियर खिलाड़ी भी लेंगे विजय हजारे ट्रॉफी में हिस्सा
तमाम मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो, इस बार विजये हजारे ट्रॉफी में विराट कोहली, रोहित शर्मा, रविंद्र जडेजा, मोहम्मद शमी, भुवनेश्वर कुमार और कुलदीप यादव और मोहम्मद शमी जैसे सीनियर खिलाड़ी खेलते हुए नजर आ सकते हैं. ये सभी खिलाड़ी अपनी-अपनी टीमों के वनडे वर्ल्ड कप 2027 की अपनी तैयारियां पुख्ता करने के लिहाज से विजय हजारे ट्रॉफी खेलते हुए नजर आ सकते हैं.
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— IndiaTeamhub (@vivek23mishra) August 9, 2026
List of Players Who Must Play Vijay hazare Trophy or Ranji Domestic Cricket. ????
1. Virat Kohli
2. Rohit Sharma
3. Ravindra Jadeja
4. Mohammed Shami
5. Bhuvneshwar Kumar
6. Mohammed Siraj
7. Kuldeep Yadav pic.twitter.com/Yem49Xsf72
विजय हजारे ट्रॉफी हर प्रदेश की टीम हिस्सा लेती है. ऐसे में इन टूर्नामेंट में वैभव सूर्यवंशी, अभिषेक शर्मा, सूर्यकुमार यादव और संजू सैमसन जैसे खिलाड़ियों के पास भी मौका होगा कि वो भी इस टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन कर वनडे वर्ल्ड कप 2027 के लिए टीम इंडिया में अपनी दावेदार ठोक सकें. अगर ये खिलाड़ी वर्ल्ड कप से पहले इस टूर्नामेंट में धमाल मचाते हैं तो चयनकर्ताओं की मुश्किलें बढ़ जाएंगी.
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