लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोमवार को छात्रों के मुद्दों पर चर्चा के सरकार के प्रस्ताव को ठुकरा दिया। उन्होंने मांग की कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पहले एक सवाल का जवाब दें: दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कथित गोलीबारी का आदेश किसने दिया था? गांधी ने कहा कि विपक्ष की मांग कभी यह नहीं थी कि शाह सिर्फ़ संसद में आकर आम मुद्दों पर भाषण दें। विपक्ष चाहता था कि वे साफ़ करें कि क्या उन्होंने 20 जून को दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के ख़िलाफ़ पुलिस कार्रवाई का आदेश दिया था। गांधी ने कहा कि सवाल यह नहीं था कि अमित शाह संसद में आकर कुछ आम विषयों पर भाषण देंगे। सवाल हमेशा यही रहा है कि अमित शाह यह साफ़ करें कि दिल्ली में हमारे युवाओं पर गोली चलाने का आदेश किसने दिया था।
उन्होंने आरोप लगाया कि पेलेट गन चलाई गईं और छात्रों को कीलों वाली लाठियों से पीटा गया। साथ ही, उन्होंने मांग की कि शाह इस मामले में पूरी सच्चाई बताएं। गांधी ने पूछा, क्या उसने इसका ऑर्डर दिया था या नहीं?
अगर उन्होंने आदेश दिया था, तो वे दोषी हैं
गांधी ने आगे कहा कि अगर शाह ने गोली चलाने का आदेश दिया था तो इसकी ज़िम्मेदारी उनकी होगी, और अगर उन्हें इस कार्रवाई के बारे में पता नहीं था तो यह उनकी अक्षमता मानी जाएगी। गांधी ने कहा कि अगर उन्होंने आदेश दिया था, तो हमारे बच्चों पर गोली चलवाने के लिए वे दोषी हैं। और अगर उन्हें इस घटना के बारे में पता नहीं था, तो वे अक्षम हैं। दोनों ही सूरतों में उन्हें पद छोड़ देना चाहिए। उन्होंने कहा कि विपक्ष यह साफ़ जानना चाहता है कि क्या गृह मंत्री ने इस कार्रवाई की मंज़ूरी दी थी, और अगर नहीं, तो गृह मंत्रालय में किसने ऐसा किया। गांधी ने कहा अमित शाह में संसद आकर हमारे सामने खड़े होने की हिम्मत नहीं है। पिछले 15 दिनों में उन्होंने यही दिखाया है। न तो नरेंद्र मोदी और न ही अमित शाह में इतनी हिम्मत है। किसी को उनकी राय में दिलचस्पी नहीं है; हम बस यह जानना चाहते हैं कि गोली चलाने का आदेश किसने दिया, और अगर उन्होंने आदेश नहीं दिया, तो गृह मंत्रालय में किसने दिया? हम यह समझना चाहते हैं: क्या यह ज़िम्मेदारी का मामला है या अक्षमता का?
विपक्ष ने दिल्ली पुलिस पर 20 जून को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बैनर तले विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों के ख़िलाफ़ ज़रूरत से ज़्यादा सख़्त कार्रवाई करने का आरोप लगाया है। उन्होंने पैलेट गन के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए हैं। गांधी ने कहा कि कथित गोलीबारी पर जवाब की मांग उन तीन मुद्दों में से एक थी जिन पर विपक्ष ज़ोर दे रहा था। गांधी ने कहा सबसे पहले, उन्हें यह बात बिल्कुल साफ़ करनी चाहिए। उसके बाद ही किसी चर्चा का सवाल उठता है। उन्होंने कहा कि दूसरी मांग यह थी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जो हुआ, उसके लिए माफ़ी मांगें। गांधी के अनुसार, तीसरी मांग राम मंदिर में चोरी के आरोपों से जुड़ी थी।
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सोमवार को लोकसभा ने विपक्ष के सांसदों की ज़बरदस्त नारेबाज़ी के बीच बिना किसी चर्चा के 'ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स बिल, 2026' पास कर दिया। राज्यसभा ने 'टैक्सेशन एंड अदर लॉज़ (अमेंडमेंट) बिल, 2026' को वॉइस वोट (मौखिक मतदान) के ज़रिए लौटा दिया। इससे पहले, उच्च सदन ने 'बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल, 2026' को वॉइस वोट से पास किया था। सोमवार को दोनों सदनों में कुछ रुकावटें आईं। सुबह 11 बजे कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही मिनटों बाद, विपक्ष के विरोध और अलग-अलग मुद्दों पर चर्चा की मांग के बीच लोकसभा की कार्यवाही स्थगित कर दी गई। कुछ मिनटों बाद राज्यसभा की कार्यवाही भी स्थगित कर दी गई। दोनों सदनों की कल 11 बजे फिर से शुरू हुई।
लोकसभा में विरोध के बीच चार बिल पेश किए गए - ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स बिल, 2026; मिनरल्स एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल, 2026; केरल (ऑल्टरेशन ऑफ़ नेम) बिल, 2026 और नेशनल कोऑपरेटिव डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (अमेंडमेंट) बिल, 2026। राज्यसभा ने कुछ देर के लिए कामकाज किया, लेकिन कुछ ही मिनटों बाद कार्यवाही स्थगित कर दी गई।
आज क्या कुछ हुआ
संसद में जारी गतिरोध को समाप्त करने के लिए सरकार ने सोमवार को छात्रों के आंदोलन के मुद्दे पर चर्चा और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के जवाब की पेशकश की, लेकिन कांग्रेस ने कहा कि विपक्ष अयोध्या के राम मंदिर से कथित चढ़ावे की चोरी के मामले पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और छात्रों पर पुलिस कार्रवाई पर गृह मंत्री अमित शाह के जवाब की अपनी दोनों मांगों पर कायम है। कांग्रेस ने यह भी कहा कि ये दोनों मांगें एक दूसरे से जुड़ी हैं तथा ‘‘विपक्षी एकजुटता’’ में दरार डालने के सरकार के किसी भी प्रयास को सफल नहीं होने दिया जाएगा।
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने सोमवार को लोकसभा में कहा कि सरकार छात्रों के मुद्दे पर सदन में चर्चा के लिए तैयार है और गृह मंत्री अमित शाह विस्तार से जवाब देने को तैयार हैं, लेकिन विपक्ष को उनका पूरा जवाब सुनना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी पहले दिन से यह मांग कर रहे थे कि गृह मंत्री अमित शाह को (छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर) जवाब देना चाहिए। रीजीजू ने कहा कि मैं सरकार की ओर से स्पष्ट शब्दों में कहना चाहता हूं कि सरकार छात्रों के मामले को लेकर चर्चा के लिए तैयार है और पूरा जवाब देने के लिए तैयार है। गृह मंत्री अमित शाह विस्तार से जवाब देने को तैयार हैं। उन्होंने विपक्ष को आड़े हाथ लेते हुए यह भी कहा कि कांग्रेस और विपक्ष से अनुरोध है कि उन्हें गृह मंत्री के जवाब के समय डरना नहीं है, भागना नहीं है। उन्हें पूरा जवाब सुनना पड़ेगा।
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