म्यांमार के राष्ट्रपति ने वांग यी से मुलाकात की
बीजिंग, 26 अप्रैल (आईएएनएस)। म्यांमार के नए राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग ने 25 अप्रैल को राजधानी नाय प्यी ताव में चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ मुलाकात की।
इस मौके पर मिन आंग ह्लाइंग ने वांग यी से राष्ट्रपति शी चिनफिंग को आभार और अभिवादन पहुंचाने की मांग की। मिन आंग ह्लाइंग ने कहा कि म्यांमार चीन के साथ संबंधों को प्राथमिकता देता है, अविचल रूप से एक चीन की नीति पर कायम रहता है और शी चिनफिंग द्वारा प्रस्तुत चार वैश्विक पहलों का समर्थन करता है। म्यांमार की नई सरकार चीन के साथ उच्च स्तरीय आदान-प्रदान मजबूत करना चाहती है, ताकि विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ सके और म्यांमार-चीन साझे भविष्य वाले समुदाय का समान निर्माण हो सके। म्यांमार देश में चीन के हितों को नुकसान पहुंचाने वाली किसी भी कार्रवाई को कतई इजाजत नहीं देगा और लगातार ऑनलाइन जुए व दूरसंचार धोखाधड़ी का विरोध करेगा।
वहीं, वांग यी ने मिन आंग ह्लाइंग तक राष्ट्रपति शी चिनफिंग का स्नेहपूण अभिवादन पहुंचाया। वांग यी ने कहा कि म्यांमार के प्रति चीन की नीति में निरंतरता रही है। चीन दृढ़ता से अपनी राष्ट्रीय स्थिति के अनुरूप और जनता का समर्थन प्राप्त होने वाले विकास के रास्ते पर बढ़ने में म्यांमार का समर्थन करता है। चीन दृढ़ता से राष्ट्रीय प्रभुसत्ता, सुरक्षा और प्रादेशिक अखंडता की रक्षा करने में म्यांमार का समर्थन करता है। चीन दृढ़ता से राष्ट्रीय शांति, जातीय सुलह और सामाजिक सामंजस्य साकार करने में म्यांमार का समर्थन करता है।
वांग यी ने कहा कि तथ्यों से साबित हुआ है कि चीन-म्यांमार साझे भविष्य वाले समुदाय का निर्माण दोनों देशों के विकास की मांग और लोगों के मूल हितों के अनुरूप है। दोनों देशों को इस रास्ते पर कायम रहना चाहिए। चीन म्यांमार की नई सरकार की पांच प्रमुख नीतिगत प्राथमिकताओं का समर्थन करता है और लगातार म्यांमार का समर्थन करेगा।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
--आईएएनएस
एबीएम/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
देश में बिजली की मांग बढ़ी, रिकॉर्ड डिमांड 256.11 गीगावॉट तक पहुंची
नई दिल्ली, 26 अप्रैल (आईएएनएस)। विद्युत मंत्रालय द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार, देश भर में भीषण गर्मी के कारण शनिवार को भारत में बिजली की अधिकतम मांग रिकॉर्ड 256.11 गीगावॉट तक पहुंच गई, जिससे घरेलू और वाणिज्यिक दोनों उपभोक्ताओं को एयर कंडीशनर और अन्य कूलिंग डिवाइस का उपयोग बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ा।
शनिवार को बिजली की अधिकतम मांग पिछले दिन की 252.07 गीगावॉट की खपत को पार कर गई, जो कि अब तक का सबसे उच्च स्तर था। वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि देश में बिजली उत्पादन मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त था, इसलिए बिजली कटौती की कोई आवश्यकता नहीं पड़ी।
विशेषज्ञों का मानना है कि बिजली की मांग में और भी वृद्धि होगी। विद्युत मंत्रालय का अनुमान है कि इस गर्मी के लिए यह 270 गीगावॉट होगी।
अधिकारियों ने बताया कि अप्रैल की शुरुआत में बेमौसम बारिश से तापमान में कमी आने के कारण बिजली की मांग अपेक्षाकृत कम रही थी, लेकिन हाल के दिनों में इसमें तेजी से वृद्धि हुई है। हालांकि, अप्रैल के मध्य से तापमान में लगातार वृद्धि के कारण बिजली की खपत में भारी उछाल आया है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, कई क्षेत्रों में तापमान सामान्य से 5 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक बढ़ गया है, जो देश के कुछ हिस्सों में लू लगने की आशंका को दर्शाता है।
मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने अप्रैल से जून 2026 तक पूरे देश में भीषण लू चलने की चेतावनी जारी की है। उत्तरी भारत-गंगा के मैदानी इलाकों, मध्य भारत और पूर्वी तटीय राज्यों में सामान्य से अधिक लू चलने की आशंका है। कई क्षेत्रों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से अधिक हो सकता है, और उच्च आर्द्रता से जान का खतरा और बढ़ जाएगा।
हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान और मध्य प्रदेश में अप्रैल, मई और जून के महीनों में भीषण गर्मी पड़ने की आशंका है।
अप्रैल के अंत में ही पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश और केरल के कुछ हिस्सों में लू की स्थिति देखने को मिल रही है।
अधिक गर्मी से हीट एग्जॉस्टशन और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है, खासकर बच्चों, बुजुर्गों और बाहरी कामगारों के लिए।
लोगों को सलाह दी गई है कि वे प्यास न लगने पर भी जितना हो सके उतना पानी पीकर खुद को हाइड्रेटेड रखें।
उन्हें दोपहर के व्यस्त समय के दौरान बाहरी गतिविधियों से बचने और हल्के रंग के ढीले कपड़े पहनने का भी आग्रह किया गया है जो गर्मी को अवशोषित नहीं करते हैं और हवा को आने-जाने देते हैं।
--आईएएनएस
डीकेपी/
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