निजी क्षेत्र का अंतरिक्ष निवेश पांच वर्षों में 600 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक : डॉ.जितेंद्र सिंह
नई दिल्ली, 26 अप्रैल (आईएएनएस)। केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने रविवार को पूरे देश के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में अंतरिक्ष प्रयोगशालाएं स्थापित करने की योजनाओं की समीक्षा के दौरान कहा कि निजी क्षेत्र का अंतरिक्ष निवेश पांच वर्षों में 600 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक हो गया है।
इन योजनाओं के तहत, पहले चरण में सात ऐसी प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी ताकि छात्रों को उपग्रह प्रणालियों, रॉकेटरी और मिशन डिजाइन में व्यावहारिक अनुभव प्रदान किया जा सके।
यह समीक्षा इन-स्पेस के अध्यक्ष डॉ. पवन गोयनका द्वारा दी गई विस्तृत जानकारी के बाद हुई, जिन्होंने भारत के अंतरिक्ष सुधारों में हुई प्रगति और मूल्य श्रृंखला में निजी खिलाड़ियों की बढ़ती भागीदारी का अवलोकन प्रस्तुत किया।
भारत का निजी अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र तेजी से विकसित हुआ है, और स्टार्टअप्स की संख्या 2019 में एकल अंक से बढ़कर 2026 की शुरुआत तक 400 से अधिक हो गई है। ये स्टार्टअप्स अब प्रक्षेपण यान, उपग्रह और पेलोड निर्माण, जमीनी अवसंरचना, डेटा सेवाओं और उभरते इन-ऑर्बिट क्षेत्रों में सक्रिय हैं।
इस गति को बनाए रखने के लिए कई लक्षित पहलें शुरू की गई हैं। विकास के चरण में स्टार्टअप्स को सहयोग देने के लिए एसआईडीबीआई के साथ मिलकर 1,000 करोड़ रुपए का वेंचर कैपिटल फंड शुरू किया जा रहा है, वहीं 500 करोड़ रुपए का टेक्नोलॉजी एडॉप्शन फंड शुरुआती चरण के नवाचारों को व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य उत्पादों में परिवर्तित करने में मदद कर रहा है। सीड फंड योजना के तहत विचार और प्रोटोटाइप चरण में स्टार्टअप्स को 1 करोड़ रुपये तक का अनुदान, मार्गदर्शन और इकोसिस्टम सहायता प्रदान की जा रही है।
केंद्र सरकार के अंतरिक्ष विभाग के मुताबिक,कुशल कार्यबल तैयार करने के प्रयास भी जारी हैं, जिसके तहत 17 विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरे किए जा चुके हैं और उपग्रह निर्माण, प्रक्षेपण यान प्रणाली और अंतरिक्ष साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में लगभग 900 प्रतिभागियों को प्रमाणित किया जा चुका है।
अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की वैश्विक भागीदारी लगातार मजबूत होती जा रही है, और अब इसकी साझेदारी 45 से अधिक देशों तक फैली हुई है। हाल के सहयोगों में सिंगापुर और संयुक्त अरब अमीरात के साथ समझौते, अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष मंचों में भारतीय कंपनियों की भागीदारी और घरेलू स्टार्टअप को वैश्विक बाजारों से जोड़ने की पहल शामिल हैं।
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इजरायल के नेशनल पब्लिक डिप्लोमेसी डायरेक्टरेट की प्रमुख बनीं जिपी होटोवेली
तेल अवीव, 26 अप्रैल (आईएएनएस)। इजरायल में जिपी होटोवेली को नेशनल पब्लिक डिप्लोमेसी डायरेक्टरेट का प्रमुख नियुक्त किया गया है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने जिपी होटोवेली को डायरेक्टरेट का प्रमुख बनाने का फैसला लिया। होटोवेली की नियुक्ति को मंजूरी के लिए कैबिनेट के सामने लाया गया, जहां इजरायली सरकार ने एकमत से मंजूरी दे दी।
नेशनल पब्लिक डिप्लोमेसी डायरेक्टरेट का प्रमुख इजरायल के प्रधानमंत्री कार्यालय के तहत काम करने वाली एक प्रमुख संस्था है। इस संस्था के ऊपर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इजरायल की छवि को बढ़ावा देने, मीडिया अभियानों का प्रबंधन करने और युद्ध या संकट के समय हसबारा (सार्वजनिक कूटनीति/जनसंपर्क) प्रयासों के समन्वय की जिम्मेदारी होती है।
प्रधानमंत्री और मंत्रियों ने इस नियुक्ति का स्वागत किया और इस जरूरी भूमिका में जिपी की सफलता की कामना की। वह 5 मई, 2026 को इस पद की जिम्मेदारी संभालेंगी।
होटोवेली की शिक्षा की बात करें, तो उनके पास लॉ में बैचलर और मास्टर डिग्री दोनों हैं। इसके अलावा वह एक सर्टिफाइड वकील हैं। उन्होंने कई सीनियर पब्लिक सर्विस पदों पर काम किया है, जिनमें मिनिस्टर ऑफ सेटलमेंट, मिनिस्टर ऑफ डायस्पोरा अफेयर्स, उपविदेश मंत्री और ब्रिटेन में इजरायली राजदूत का पद शामिल है।
अपनी अलग-अलग भूमिकाओं के दौरान, होटोवेली ने इजरायल की वैश्विक छवि को बढ़ावा देने के लिए बहुत काम किया है। दुनिया भर के अंतरराष्ट्रीय मीडिया आउटलेट्स में उनका अक्सर इंटरव्यू लिया गया है और उन्होंने युद्ध के समय सहित अंतरराष्ट्रीय एडवोकेसी प्रयासों को आगे बढ़ाया है।
यह नियुक्ति सिविल सर्विस कमिश्नर की हेड वाली अपॉइंटमेंट कमेटी की सिफारिश के बाद किया गया। कमेटी ने पिछले गुरुवार को होटोवेली की उम्मीदवारी की समीक्षा की और आधिकारिक तौर पर सरकार के सामने उनकी नियुक्ति की सिफारिश करने का फैसला किया।
डायरेक्टरेट के आखिरी हेड, मोशिक अवीव, की मई 2024 में मौत हो गई थी और अभी तक उनकी जगह कोई और नहीं आया है। इजरायल ने कई मोर्चों पर लड़ाई लड़ी है और उसे अपने साथियों और दुश्मनों, दोनों से दुनिया भर में कड़ी और बढ़ती आलोचना का सामना करना पड़ा है।
द टाइम्स ऑफ इजरायल के अनुसार, पीएम नेतन्याहू की दक्षिणपंथी लिकुड पार्टी की सदस्य और पूर्व उप विदेश मंत्री होटोवेली को पिछले कुछ सालों में अपनी टिप्पणियों के लिए आलोचना का सामना करना पड़ा है। उन्होंने 2017 में कहा था कि अमेरिकी यहूदी अपने बच्चों को अपने देश के लिए लड़ने के लिए कभी नहीं भेजते। हालांकि, इस बयान के बाद उन्होंने माफी भी मांगी। होटोवेली ने 2020 से 2025 तक लंदन में इजरायल के राजदूत के रूप में काम किया।
--आईएएनएस
केके/एबीएम
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