सुप्रीम कोर्ट पहुंचा बेहद गंभीर मामला, शीर्ष अदालत ने केंद्र और राज्यों से 4 हफ्ते में मांगा जवाब
देश में नशीले पदार्थों के बढ़ते कारोबार और ड्रग्स तस्करी के विस्तार पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है. शीर्ष अदालत ने कहा कि ड्रग्स का इस्तेमाल और इसकी तस्करी अब किसी एक क्षेत्र की समस्या नहीं रह गई है, बल्कि इसका असर देश के अलग-अलग हिस्सों में दिखाई दे रहा है. मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने केंद्र सरकार और सभी राज्यों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है.
ड्रग्स तस्करी को लेकर सुप्रीम कोर्ट की चिंता
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने NDPS यानी नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंसेज एक्ट से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की. पीठ में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल हैं.
सुनवाई के दौरान अदालत ने संकेत दिया कि ड्रग्स से जुड़ी चुनौती लगातार गंभीर होती जा रही है. ऐसे में कानून लागू करने वाली एजेंसियों और न्यायिक व्यवस्था को मिलकर इससे निपटने के लिए अधिक प्रभावी रणनीति तैयार करने की जरूरत है.
अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क भी बड़ी चुनौती
पीठ के सदस्य जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने ड्रग तस्करी के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की ओर भी ध्यान आकर्षित किया. उन्होंने गोल्डन क्रिसेंट जैसे क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए भारत की भौगोलिक स्थिति से जुड़ी चुनौतियों पर बात की.
भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमाएं कई ऐसे क्षेत्रों के करीब हैं, जहां से नशीले पदार्थों की अवैध आवाजाही के रास्ते सक्रिय माने जाते हैं. अफगानिस्तान और म्यांमार से जुड़े मार्गों के कारण देश में ड्रग्स की तस्करी रोकना सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है.
किस याचिका पर हुई सुनवाई?
यह मामला बीजेपी नेता और अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय की ओर से दाखिल याचिका से जुड़ा है. याचिका में NDPS मामलों की जांच से लेकर मुकदमे के अंतिम निपटारे तक पूरी प्रक्रिया को ज्यादा तेज, पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए कई सुझाव दिए गए हैं.
याचिकाकर्ता ने मांग की है कि ड्रग्स से जुड़े मामलों की जांच और सुनवाई के लिए स्पष्ट समयसीमा निर्धारित की जाए, ताकि लंबे समय तक चलने वाले मुकदमों को कम किया जा सके.
FSL रिपोर्ट के लिए तय हो समयसीमा
याचिका में फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी यानी FSL की रिपोर्ट दाखिल करने के लिए भी निश्चित समयसीमा तय करने की मांग की गई है. ड्रग मामलों में बरामद पदार्थों की वैज्ञानिक जांच बेहद महत्वपूर्ण होती है. ऐसे में रिपोर्ट में देरी होने से जांच और ट्रायल दोनों प्रभावित हो सकते हैं.
याचिका में तलाशी और जब्ती की प्रक्रिया की वीडियोग्राफी अनिवार्य करने का सुझाव भी दिया गया है. इसके अलावा सैंपल लेने और जब्त सामग्री की इन्वेंट्री तैयार करने की प्रक्रिया को भी रिकॉर्ड करने की मांग की गई है.
ड्रग मामलों के लिए विशेष अदालतों का सुझाव
ड्रग तस्करी से जुड़े मामलों का तेजी से निपटारा करने के लिए विशेष अदालतों के गठन की मांग भी की गई है. याचिका में कहा गया है कि तस्करों के साथ-साथ उनके फाइनेंसरों और पूरे नेटवर्क से जुड़े लोगों के खिलाफ प्रभावी कानूनी कार्रवाई जरूरी है.
इसके अलावा अवैध गतिविधियों से अर्जित संपत्तियों की समय पर पहचान और जब्ती की प्रक्रिया को मजबूत बनाने का सुझाव दिया गया है.
नए साइकोट्रॉपिक पदार्थों पर भी नजर
याचिका में बदलते ड्रग ट्रेंड को देखते हुए नए साइकोट्रॉपिक पदार्थों की पहचान के लिए विशेषज्ञ समिति बनाने की मांग की गई है. ऐसी समिति नए पदार्थों का अध्ययन कर उन्हें प्रतिबंधित सूची में शामिल करने के संबंध में समय पर सुझाव दे सकती है.
ड्रग्स से राष्ट्रीय सुरक्षा तक जुड़ा मामला
याचिका में ड्रग्स की समस्या को केवल स्वास्थ्य या कानून-व्यवस्था का विषय न मानकर राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जोड़ा गया है. आशंका जताई गई है कि नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार से होने वाली कमाई का इस्तेमाल संगठित अपराध और आतंकी गतिविधियों की फंडिंग में हो सकता है.
अब केंद्र और राज्यों के जवाब के बाद सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई महत्वपूर्ण होगी. आने वाले समय में अदालत यह तय कर सकती है कि NDPS मामलों की जांच, सबूतों की सुरक्षा और मुकदमों के निपटारे की व्यवस्था को अधिक समयबद्ध और पारदर्शी बनाने के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए.
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यूपी के ग्रामीण इलाकों में पैदा होंगे कमाई नए रास्ते, ऐसे बढ़ेगी पशुपालकों की इनकम
UP News: योगी सरकार की पहल से ग्रामीण इलाकों में कमाई के नई रास्ते खुल रहे हैं. सीएम योगी के विजन के तहत अब यूपी के पशुपालकों के लिए कमाई का नया रास्ता खुल गया है. दरअसल, बुलंदशहर में किसान उत्पादक संगठन (FPO) के माध्यम से गौमूत्र की खरीद शुरू हुई है. जो पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर की जा रही है. इस पहले के तहत किसानों और पशु पालकों से 10 रुपये प्रति लीटर की दर से गोमूत्र खरीदा जा रहा है. योगी सरकार इस पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद प्रदेश के अन्य जिलों में भी इस मॉडल को पहुंचाने की तैयारी कर रही है. जिससे राज्य के गोवंश पालकों को दूध के अलावा गोमूत्र से भी अतिरिक्त कमाई का रास्ता खुल जाएगा.
बुलंदशहर की स्यानी तहसील में चल रही योजना
बता दें कि फिलहाल बुलंदशहर की स्याना तहसील के नरसैना गांव में एफपीओ के जरिए इस प्रयोग की शुरुआत की गई है. जिससे 15 गांवों को जोड़ा गया है. इस योजना का नेतृत्व डॉ. प्रवीण कर रहे हैं. गोमूत्र इकट्ठा करन के लिए सभी गांवों में केंद्र बनाए गए हैं. वर्तमान में इन केंद्रों के माध्यम से हर दिन करीब 500 लीटर गोमूत्र इकट्ठा किया जा रहा है. फिलहाल गोमूत्र 10 रुपये प्रति लीटर खरीदा जा रहा है, बाद में इसकी दर बढ़ाकर 20 रुपये प्रति लीटर करने की योजना है.
गोमूत्र संग्रहण के लिए गांवों में लगाए गए टैंक
फिलहाल गोमूत्र के संग्रहण के लिए गांवों में 200 लीटर क्षमता वाले टैंक लगाए गए हैं. जिससे पशु पालकों को गोमूत्र बेचने के लि कहीं दूर जाने की जरूरत नहीं है. ग्राम स्तर पर ही इसकी खरीद और संग्रह का इंतजाम किया गया है.
- क्योंकि स्थानीय स्तर पर संग्रहण की व्यवस्था होने से पशु पालकों, खासकर महिलाओं को इससे आसानी से जोड़ा जा सकता है. क्योंकि इस व्यवस्था में ग्रामीण महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है.
- यही नहीं गांवों में गोमूत्र एकत्र करने में सहयोग करने वाली महिलाओं को प्रति लीटर दो रुपये कमीशन भी दिया जाता है. इससे महिलाओं के लिए भी गांव में रहते हुए अतिरिक्त आमदनी का का रास्ता मिल गया है.
शेयर होल्डर बनीं 300 महिलाएं
इस पायलट प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे डॉ. प्रवीण ने बताया कि इस पहल को सिर्फ गोमूत्र की खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसे महिला सशक्तीकरण से भी जोड़ा गया है. उन्होंने कहा कि करीब 300 महिलाओं के सहयोग से यह काम शुरू किया गया है.
- इन सभी महिलाओं को शेयर होल्डर बनाया गया है. इससे महिलाएं सिर्फ गोमूत्र संग्रहण व्यवस्था का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि इस पूरे आर्थिक मॉडल से सीधे जुड़ी हुई हैं. उन्होंने आगे कहा कि गोमूत्र संग्रह के बदले उन्हें मिलने वाला कमीशन महिलाओं के लिए छोटी आय का नियमित साधन बन रहा है.
- डॉ. प्रवीण ने कहा कि इसका दायरा बढ़ने पर अधिक संख्या में ग्रामीण महिलाओं को इससे जोड़ा जाएगा. खासतौर पर गोपालन करने वाले परिवारों की महिलाओं के लिए यह घर और गांव में रहते हुए आमदनी बढ़ाने का नया जरिया बन सकता है.
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गोमूत्र और जड़ी-बूटियों से तैयार हो रहीं दवाएं
बता दें कि ग्रामीण इलाकों से इकट्ठे किए जा रहे इस गोमूत्र का इस्तेमाल खेती के लिए उपयोगी उत्पाद तैयार करने में किया जा रहा है. इसके साथ ही गोमूत्र में विभिन्न जड़ी-बूटियों को मिलाकर खेतों में इस्तेमाल होने वाली दवाएं बनाई जा रही हैं. बाद में इन्हें समितियों के माध्यम से किसानों तक पहुंचाया जाता है. बता दें कि इस मॉडल का उद्देश्य खेती में रासायनिक उत्पादों के विकल्प के रूप में गोमूत्र आधारित उत्पादों को बढ़ावा देना है.
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