Independence Day Special: देशभक्ति से लबरेज हैं ये टॉप 5 वेब सीरीज, इन ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर देखें
Independence Day 2026: 15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस अब बस कुछ ही दिन दूर है. इस दिन हर तरफ देशभक्ति का माहौल देखने को मिलता है. कोई तिरंगा फहराकर आजादी का जश्न मनाता है, तो कोई देशभक्ति के गाने सुनकर और फिल्में देखकर इस खास दिन को यादगार बनाता है. अगर इस बार आप घर बैठे ही ये दिन सेलिब्रेट करने का प्लान बना रहे हैं, तो ओटीटी प्लेटफॉर्म आपके लिए शानदार ऑप्शन हैं. खासकर अगर आपको भारतीय सेना, देश के वीर जवानों और आजादी की कहानियों से जुड़ी वेब सीरीज पसंद हैं, तो स्वतंत्रता दिवस पर देखने के लिए कंटेंट की कोई कमी नहीं है. तो चलिए जानते हैं, कौन-सी सीरीज किस प्लेटफॉर्म पर मौजूद है.
1. 1962: द वॉर इन द हिल्स (1962: The War in the Hills)
ये सीरीज 1962 के भारत-चीन युद्ध पर बनी है. इसकी कहानी भारतीय सैनिकों की उस टुकड़ी के इर्द-गिर्द घूमती है, जो बेहद मुश्किल परिस्थितियों में रणनीतिक मोर्चे की रक्षा करती है. सीरीज में युद्ध के साथ सैनिकों की पर्सनल लाइफ और उनके जज्बे को भी दिखाया गया है.
स्टारकास्ट- सीरीज में अभय देओल, सुमीत व्यास, आकाश ठोसर, माही गिल, रोशेल राव अहम रोल में है. अभय देओल ने मेजर सूरज सिंह का किरदार निभाया है.
OTT प्लेटफॉर्म- ये सीरीज पहले Disney+ Hotstar पर रिलीज हुई थी. हालांकि अगस्त 2026 में JustWatch के मुताबिक इस सीरीज को भारत में उपलब्ध नहीं दिखा रहा है.
2. बोस डेड और अलाइव (Bose: Dead/Alive)
बोस डेड और अलाइव सीरीज की बात करे तो ये नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जिंदगी और उनके रहस्यमयी अंत पर बेस्ड है. इसकी कहानी बोस के जीवन, आजादी की लड़ाई और उनकी कथित मौत को लेकर उठे सवालों के इर्द-गिर्द घूमती है. सीरीज इतिहास के साथ रहस्य और थ्रिल का एंगल भी जोड़ती है.
स्टारकास्ट: बोस डेड और अलाइव में राजकुमार राव ने सुभाष चंद्र बोस का किरदार निभाया है. उनके साथ नवीन कस्तूरिया, पत्रलेखा, एडवर्ड सोनेनब्लिक और अन्ना एडोर जैसे कलाकार हैं. सीरीज का निर्देशन पुलकित ने किया है.
OTT प्लेटफॉर्म: इस सीरीज को और अमेजन एमएक्स प्लेयर पर देखा जा सकता है.
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3. द टेस्ट केस (The Test Case)
देशभक्ति से जुड़ी सीरीज की लिस्ट में साल 2017 में रिलीज हुई द टेस्ट केस भी शामिल है. इसकी कहानी भारतीय सेना में पहली महिला कॉम्बैट ऑफिसर बनने की ट्रेनिंग लेने वाली कैप्टन शिखा शर्मा की लाइफ पर बेस्ड है. सीरीज में दिखाया गया है कि कैसे पुरुषों के दबदबे वाले ट्रेनिंग माहौल में शिखा को न सिर्फ शारीरिक चुनौतियों बल्कि लैंगिक पूर्वाग्रहों का भी सामना करना पड़ता है.
स्टारकास्ट: इसमें एक्ट्रेस निमरत कौर लीड रोल में हैं. उनके साथ अक्षय ओबेरॉय, अतुल कुलकर्णी, राहुल देव, अनूप सोनी, मनीत जौरा, सौरभ गोयल और जूही चावला जैसे कलाकार भी नजर आए हैं. इसका निर्देशन नागेश कुकुनूर ने किया है.
OTT: इस सीरीज को जियो हॉटस्टार, एम एक्स प्लेयर और अमेजन एमएक्स प्लेयर पर देख सकते हैं.
4. जीत की जिद(Jeet Ki Zid)
साल 2021 में रिलीज हुई सीरीज जीत की जिद कारगिल युद्ध के हीरो मेजर दीपेंद्र सिंह सेंगर की असली जिंदगी से प्रेरित है. युद्ध में गंभीर रूप से घायल होने के बाद वो चलने की क्षमता खो देते हैं, लेकिन हार मानने के बजाय जिंदगी को दोबारा अपने तरीके से जीने की जिद करते हैं. सीरीज में उनकी कहानी संघर्ष के साथ उनकी पत्नी जया के सपोर्ट को भी दिखाया गया है.
स्टारकास्ट: सीरीज में एक्टर अमित साध ने मेजर दीप सिंह का किरदार निभाया है. वहीं, अमृता पुरी उनकी पत्नी जया के रोल में नजर आई हैं, जबकि सुशांत सिंह भी अहम भूमिका में हैं. सीरीज का निर्देशन विशाल मंगलोरकर ने किया है.
OTT: इस सीरीज में कुल7 एपिसोड हैं और इस जी5 पर देखा जा सकता है.
5. ऑपरेशन सफेद सागर (Operation Safed Sagar)
हाल ही में ऑपरेशन सफेद सागर ओटीटी पर रिलीज हुई है. ये सीरीज 1999 के कारगिल युद्ध में भारतीय वायुसेना के ऑपरेशन सफेद सागर पर आधारित है. कहानी खास तौर पर IAF की Golden Arrows Squadron और उनके पायलट्स के मिशन को दिखाया गया है, जिन्होंने बेहद मुश्किल पहाड़ी परिस्थितियों में दुश्मन के खिलाफ हवाई ऑपरेशन को अंजाम दिया.
स्टारकास्ट: इसमें सिद्धार्थ, जिमी शेरगिल, अभय वर्मा, दिया मिर्जा, प्राजक्ता कोली और आदिल हुसैन समेत बड़ी स्टारकास्ट है. सिद्धार्थ ने स्क्वाड्रन लीडर अजय आहूजा का रोल प्ले किया है, जबकि जिमी शेरगिल विंग कमांडर टोनी धनोआ के किरदार में हैं.
OTT: ये सीरीज 7 अगस्त 2026 से नेटफ्लिक्सपर स्ट्रीम की गई है.
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सुप्रीम कोर्ट पहुंचा बेहद गंभीर मामला, शीर्ष अदालत ने केंद्र और राज्यों से 4 हफ्ते में मांगा जवाब
देश में नशीले पदार्थों के बढ़ते कारोबार और ड्रग्स तस्करी के विस्तार पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है. शीर्ष अदालत ने कहा कि ड्रग्स का इस्तेमाल और इसकी तस्करी अब किसी एक क्षेत्र की समस्या नहीं रह गई है, बल्कि इसका असर देश के अलग-अलग हिस्सों में दिखाई दे रहा है. मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने केंद्र सरकार और सभी राज्यों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है.
ड्रग्स तस्करी को लेकर सुप्रीम कोर्ट की चिंता
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने NDPS यानी नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंसेज एक्ट से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की. पीठ में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल हैं.
सुनवाई के दौरान अदालत ने संकेत दिया कि ड्रग्स से जुड़ी चुनौती लगातार गंभीर होती जा रही है. ऐसे में कानून लागू करने वाली एजेंसियों और न्यायिक व्यवस्था को मिलकर इससे निपटने के लिए अधिक प्रभावी रणनीति तैयार करने की जरूरत है.
अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क भी बड़ी चुनौती
पीठ के सदस्य जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने ड्रग तस्करी के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की ओर भी ध्यान आकर्षित किया. उन्होंने गोल्डन क्रिसेंट जैसे क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए भारत की भौगोलिक स्थिति से जुड़ी चुनौतियों पर बात की.
भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमाएं कई ऐसे क्षेत्रों के करीब हैं, जहां से नशीले पदार्थों की अवैध आवाजाही के रास्ते सक्रिय माने जाते हैं. अफगानिस्तान और म्यांमार से जुड़े मार्गों के कारण देश में ड्रग्स की तस्करी रोकना सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है.
किस याचिका पर हुई सुनवाई?
यह मामला बीजेपी नेता और अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय की ओर से दाखिल याचिका से जुड़ा है. याचिका में NDPS मामलों की जांच से लेकर मुकदमे के अंतिम निपटारे तक पूरी प्रक्रिया को ज्यादा तेज, पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए कई सुझाव दिए गए हैं.
याचिकाकर्ता ने मांग की है कि ड्रग्स से जुड़े मामलों की जांच और सुनवाई के लिए स्पष्ट समयसीमा निर्धारित की जाए, ताकि लंबे समय तक चलने वाले मुकदमों को कम किया जा सके.
FSL रिपोर्ट के लिए तय हो समयसीमा
याचिका में फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी यानी FSL की रिपोर्ट दाखिल करने के लिए भी निश्चित समयसीमा तय करने की मांग की गई है. ड्रग मामलों में बरामद पदार्थों की वैज्ञानिक जांच बेहद महत्वपूर्ण होती है. ऐसे में रिपोर्ट में देरी होने से जांच और ट्रायल दोनों प्रभावित हो सकते हैं.
याचिका में तलाशी और जब्ती की प्रक्रिया की वीडियोग्राफी अनिवार्य करने का सुझाव भी दिया गया है. इसके अलावा सैंपल लेने और जब्त सामग्री की इन्वेंट्री तैयार करने की प्रक्रिया को भी रिकॉर्ड करने की मांग की गई है.
ड्रग मामलों के लिए विशेष अदालतों का सुझाव
ड्रग तस्करी से जुड़े मामलों का तेजी से निपटारा करने के लिए विशेष अदालतों के गठन की मांग भी की गई है. याचिका में कहा गया है कि तस्करों के साथ-साथ उनके फाइनेंसरों और पूरे नेटवर्क से जुड़े लोगों के खिलाफ प्रभावी कानूनी कार्रवाई जरूरी है.
इसके अलावा अवैध गतिविधियों से अर्जित संपत्तियों की समय पर पहचान और जब्ती की प्रक्रिया को मजबूत बनाने का सुझाव दिया गया है.
नए साइकोट्रॉपिक पदार्थों पर भी नजर
याचिका में बदलते ड्रग ट्रेंड को देखते हुए नए साइकोट्रॉपिक पदार्थों की पहचान के लिए विशेषज्ञ समिति बनाने की मांग की गई है. ऐसी समिति नए पदार्थों का अध्ययन कर उन्हें प्रतिबंधित सूची में शामिल करने के संबंध में समय पर सुझाव दे सकती है.
ड्रग्स से राष्ट्रीय सुरक्षा तक जुड़ा मामला
याचिका में ड्रग्स की समस्या को केवल स्वास्थ्य या कानून-व्यवस्था का विषय न मानकर राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जोड़ा गया है. आशंका जताई गई है कि नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार से होने वाली कमाई का इस्तेमाल संगठित अपराध और आतंकी गतिविधियों की फंडिंग में हो सकता है.
अब केंद्र और राज्यों के जवाब के बाद सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई महत्वपूर्ण होगी. आने वाले समय में अदालत यह तय कर सकती है कि NDPS मामलों की जांच, सबूतों की सुरक्षा और मुकदमों के निपटारे की व्यवस्था को अधिक समयबद्ध और पारदर्शी बनाने के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए.
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