गर्मी का बढ़ता प्रकोप, हीट स्ट्रोक से कैसे बचें? हेल्थ एक्सपर्ट की सलाह
नई दिल्ली, 25 अप्रैल (आईएएनएस)। देश भर में गर्मी का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। दिन का तापमान लगातार चढ़ रहा है और लू चलने की संभावना भी बढ़ गई है। ऐसे में हीट स्ट्रोक का खतरा सबसे ज्यादा हो जाता है। ऐसे में हेल्थ एक्सपर्ट इससे बचाव के लिए महत्वपूर्ण सलाह देते हैं।
हीट स्ट्रोक तब होता है जब शरीर का तापमान बहुत तेजी से बढ़ जाता है और शरीर ठंडक बनाने की क्षमता को खो देता है। यह जानलेवा भी हो सकता है, इसलिए गर्मी के मौसम में सतर्क रहना बहुत जरूरी है।
नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) ने आम लोगों से अपील की है कि वे सावधानी बरतकर खुद को और अपने परिवार को हीट स्ट्रोक से बचाएं। समय पर सही बचाव और प्राथमिक उपचार अपनाकर इस गंभीर समस्या से बचा जा सकता है।
एनएचएम ने सभी से अपील की है कि गर्मी के मौसम में बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों का खास ध्यान रखें। उन्हें ज्यादा देर धूप में न रहने दें। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि थोड़ी सी सावधानी से हीट स्ट्रोक को आसानी से रोका जा सकता है। गर्मी को मात देने के लिए हल्का भोजन करें, ठंडे पानी का इस्तेमाल करें और शरीर को ठंडा रखने की कोशिश करें।
हीट स्ट्रोक से बचाव के आसान उपाय भी हैं जैसे- दोपहर के सबसे गर्म समय यानी 12 बजे से 4 बजे तक में भारी या ज्यादा मेहनत वाले काम करने से बचें। बाहर जाने से बचें। पूरे दिन पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। भले ही प्यास न लगे, फिर भी थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहें। ज्यादा कैफीन या चीनी वाले ड्रिंक्स जैसे कोल्ड ड्रिंक्स, चाय, कॉफी से बचें। ये शरीर को और डिहाइड्रेट कर सकते हैं। हल्के रंग के ढीले और सूती कपड़े पहनें। गहरे रंग के कपड़े ज्यादा गर्मी सोखते हैं। बाहर काम करते समय हर 15-20 मिनट में कुछ देर के लिए छांव में आराम करें।
हीट स्ट्रोक के लक्षण दिखने पर प्राथमिक उपचार पर ध्यान दें। अगर किसी व्यक्ति को हीट स्ट्रोक के लक्षण नजर आएं, जैसे चक्कर आना, उल्टी, तेज बुखार, बेहोशी या शरीर का तापमान बहुत बढ़ जाना तो तुरंत पीड़ित व्यक्ति को किसी ठंडी और हवादार जगह पर लिटा दें। उनके शरीर पर ठंडी पट्टी या ठंडे पानी से सेक करें, खासकर गर्दन, कलाई, और पैरों के तलवों पर। उन्हें ठंडे पानी के छोटे-छोटे घूंट पिलाते रहें। हालत में सुधार होने पर नमी वाले हल्के फल या खाद्य पदार्थ व जूस दें।
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डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
चीनी अधिकारी तिब्बत को 'शोपीस' की तरह मानते हैं: निर्वासित नेता
टोक्यो/बीजिंग, 25 अप्रैल (आईएएनएस)। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि तिब्बत में डेमोक्रेटिक सुधार, आजादी और विकास को लेकर चीन के दावे खोखले हैं। तिब्बत मेनलैंड में लोकतंत्र नहीं है।
दलाई लामा के जापान और पूर्व एशिया के लिए संपर्क ऑफिस के प्रतिनिधि, त्सावांग गिलापो आर्य ने जापान फॉरवर्ड में इसका जिक्र किया है। गिलापो ने कहा कि चीनी शासन खुद को लोकतांत्रिक बताता है और दावा करता है कि पहले गुलाम रहे लोग मालिक बन गए हैं।
हालांकि, उन्होंने कहा कि 76 साल के लोकतांत्रिक सुधारों के बाद भी किसी भी तिब्बती ने स्वायत्त क्षेत्र के पार्टी सचिव के तौर पर काम नहीं किया। आर्य ने इसे लगातार विदेशी गुलामी की एक कड़वी याद बताया।
आर्य ने कहा कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) के आधिकारिक मुखपत्र द ग्लोबल टाइम्स ने हाल ही में सेंट्रल तिब्बतन एडमिनिस्ट्रेशन (सटीए) के फरवरी के चुनावों का मजाक उड़ाया। द ग्लोबल टाइम्स ने इसे बिना जमीन के चुनाव बताया और कहा कि ये निर्वासन में रह रहे अलगाववादी समूहों द्वारा बनाया गया एक संस्थागत भ्रम हैं।
विशेषज्ञ ने कहा, ऐसे बयान को चीनी एक्सपर्ट्स के विचार के तौर पर पेश किया जाता है, लेकिन लोकतंत्र और तिब्बती समुदाय के चुनावों के प्रति उनकी आंखें बंद कर लेना और दुनिया भर में उनकी बढ़ती पहचान उनकी विशेषज्ञता पर सवाल उठाती है।
आर्य ने बताया कि 1959 में दलाई लामा, लगभग 80,000 लोगों के साथ भारत, नेपाल और भूटान भाग गए, जहां उन्होंने शरणार्थियों का समर्थन करने के लिए निर्वासन लिया। उन्होंने आगे कहा कि उन्होंने अपने देश में अन्याय और दमन को दूर करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी समर्थन जुटाया।
आर्य ने जोर देकर कहा, “आज 75 साल से ज्यादा समय के बाद, दलाई लामा और सीटीए के नेतृत्व में तिब्बतियों ने बहुत लंबा सफर तय किया है, तिब्बत में जो बर्बाद हो रहा था उसे बचाया है और एक जिंदादिल लोकतांत्रिक समुदाय बनाया है जिसकी दुनिया भर में सराहना हो रही है।”
विशेषज्ञ के मुताबिक, तिब्बत एक दिखावे की चीज बन गया है, जैसे एक सुंदर कटा हुआ फूल, जिसमें कोई चीज या असली जड़ें नहीं हैं, जबकि मठ और ननरी सीसीपी कैडर के कंट्रोल में हैं।
आर्या ने कहा, “बच्चों और युवाओं को मठों में जाने और उनमें शामिल होने से मना किया गया है। सभी तिब्बती स्कूल बंद कर दिए गए हैं और उनकी जगह चीनी कॉलोनियल बोर्डिंग स्कूल बना दिए गए हैं, जहां चार साल की उम्र के करीब दस लाख बच्चों को सरकार की एसिमिलेटिव पॉलिसी के तहत जबरदस्ती सिखाया जाता है।”
उन्होंने कहा, “तिब्बती भाषा को भी हतोत्साहित किया जाता है। जो लोग अपनी भाषा को बढ़ावा देते हैं, उन्हें झूठे आरोपों में गिरफ्तार किया जाता है और टॉर्चर किया जाता है। अल्पसख्यक देशों के लोगों पर दबाव डालने और उन्हें जबरदस्ती एसिमिलेशन में डालने को सही ठहराने के लिए कानून बनाए गए हैं।”
चीनी अधिकारियों द्वारा बड़े पैमाने पर किए जा रहे गलत कामों पर जोर देते हुए आर्य ने कहा, “तिब्बती, तिब्बत के अंदर और बाहर, और उनके समर्थक न केवल तिब्बतियों की, बल्कि चीनी लोगों और दूसरी जातीय अल्पसंख्यकों की भी आजादी और भलाई चाहते हैं।”
--आईएएनएस
केके/डीकेपी
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