भारत की जैव-अर्थव्यवस्था 2047 तक 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है: जितेंद्र सिंह
नई दिल्ली, 24 अप्रैल (आईएएनएस)। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने शुक्रवार को कहा कि भारत की जैव-अर्थव्यवस्था के 2047 तक 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जिससे यह दुनिया की शीर्ष तीन जैव-अर्थव्यवस्थाओं में से एक बन जाएगी।
मंत्री ने आईआईटी रुड़की में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में कहा कि जीव विज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था से संचालित इक्कीसवीं सदी भारत की सदी होगी।
एक आधिकारिक बयान में मंत्री के हवाले से कहा गया है कि नीतिगत सुधारों, मजबूत संस्थागत ढांचों और तेजी से बढ़ते नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र के समर्थन से भारत जीन से क्यूबिट तक, समुद्र की गहराइयों से लेकर अंतरिक्ष तक पूर्ण तकनीकी क्षमता की ओर अग्रसर है।
उभरती प्रौद्योगिकियों में हुए विकास का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय क्वांटम मिशन ने निर्धारित समय से पहले ही कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कर ली हैं, वहीं भारत ने कई महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में वैश्विक स्तर पर शीर्ष स्थान प्राप्त कर लिया है।
उन्होंने कहा कि भारत की जैव-अर्थव्यवस्था 2014 में 10 अरब डॉलर से बढ़कर आज 165 अरब डॉलर से अधिक हो गई है, जो लगभग 18 प्रतिशत वार्षिक दर से बढ़ रही है, और इसका लक्ष्य 2030 तक 300 अरब डॉलर तक पहुंचना है।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के एक बयान में कहा गया है कि जैव प्रौद्योगिकी स्टार्टअप की संख्या लगभग 50 से बढ़कर 11,000 से अधिक हो गई है।
उन्होंने 50,000 करोड़ रुपए के कोष वाले अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (एएनआरएफ) और 1 लाख करोड़ रुपए के अनुसंधान, विकास और नवाचार (आरडीआई) कोष का भी उल्लेख किया, जिनका उद्देश्य गहन तकनीकी नवाचार के लिए दीर्घकालिक, कम लागत वाला वित्तपोषण प्रदान करना है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने हाल के वर्षों में हासिल की गई कई प्रमुख वैज्ञानिक उपलब्धियों को प्रस्तुत किया, जिनमें जीनोम इंडिया के तहत प्रगति, स्वदेशी सीएआर-टी सेल थेरेपी, एमआरएनए वैक्सीन प्लेटफॉर्म का विकास, भारत की पहली स्वदेशी एंटीबायोटिक दवा आदि शामिल हैं।
--आईएएनएस
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How to Exchange Mutilated Banknotes: कटे-फटे नोटों की अब टेंशन खत्म, चुटकियों में बैंक से बदलें अपने खराब पैसे
How to Exchange Mutilated Banknotes: आज के दौर में डिजिटल पेमेंट का चलन काफी बढ़ गया है, लेकिन कैश का महत्व अब भी कम नहीं हुआ है. अक्सर लेन-देन के दौरान हमारे पास गलती से कटे-फटे या गले हुए नोट आ जाते हैं. कई बार जेब में रखा नोट धुलाई में खराब हो जाता है या फिर रखे-रखे चूहे उसे कुतर देते हैं. ऐसी स्थिति में सबसे बड़ी समस्या तब आती है जब कोई दुकानदार या रेहड़ी-पटरी वाला उन नोटों को लेने से साफ मना कर देता है. आम आदमी को लगता है कि उसके पैसे अब बेकार हो गए और उसका नुकसान हो गया है. लेकिन आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है क्योंकि भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई ने इस संबंध में बहुत ही स्पष्ट और राहत देने वाले नियम बनाए हैं.
बैंक में नोट बदलना है आपका अधिकार
आरबीआई के नियमों के मुताबिक, अगर आपके पास कोई भी ऐसा नोट है जो फट गया है, गंदा हो गया है या फिर उसके दो टुकड़े हो गए हैं, तो आप उसे किसी भी बैंक की शाखा में जाकर बदल सकते हैं. इसके लिए सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि आपका उस बैंक में खाता होना अनिवार्य नहीं है. आप किसी भी सरकारी या निजी बैंक की नजदीकी शाखा में जाकर अपने खराब नोट काउंटर पर दे सकते हैं. बैंक अधिकारी आपको नोट बदलने से मना नहीं कर सकता है. अगर कोई बैंक ऐसा करने से इनकार करता है, तो आप इसकी शिकायत भी दर्ज करा सकते हैं.
कैसे तय होती है फटे नोट की कीमत?
बैंक में नोट ले जाने पर आपको उसकी कितनी कीमत मिलेगी, यह इस बात पर निर्भर करता है कि नोट कितना फटा हुआ है. आरबीआई के नियमों के अनुसार, अगर आपके पास 50 रुपये या उससे अधिक मूल्य का नोट है और उसका 80 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा सुरक्षित है, तो बैंक आपको उस नोट की पूरी कीमत देगा. वहीं, अगर नोट का 40 प्रतिशत से 80 प्रतिशत हिस्सा ही सही सलामत है, तो आपको नोट की आधी कीमत ही वापस मिल पाएगी. लेकिन अगर नोट का 40 प्रतिशत से कम हिस्सा बचा है, तो ऐसी स्थिति में बैंक उसे बदलने से मना कर सकता है या उसकी कोई कीमत नहीं मिलेगी.
इन जरूरी हिस्सों का होना है अनिवार्य
नोट बदलते समय बैंक कुछ मुख्य बातों की जांच जरूर करता है. नोट चाहे कितना भी फटा हो, लेकिन उस पर सीरियल नंबर, महात्मा गांधी की फोटो, वॉटरमार्क और आरबीआई गवर्नर के हस्ताक्षर वाला हिस्सा स्पष्ट दिखना चाहिए. अगर ये जरूरी निशान नोट पर मौजूद हैं, तो उसे बदलने में कोई दिक्कत नहीं आएगी. अगर नोट बहुत ज्यादा टुकड़ों में है या फिर बुरी तरह गल गया है, तो उसे बैंक सीधे काउंटर पर नहीं बदलता. ऐसे मामलों में बैंक नोट को स्वीकार कर लेता है और उसकी जांच के बाद पैसे आपके खाते में ट्रांसफर किए जाते हैं.
जले और चिपके हुए नोटों के लिए नियम
कुछ मामले ऐसे होते हैं जहां नोट बुरी तरह जल जाते हैं या फिर आपस में बुरी तरह चिपक जाते हैं कि उन्हें अलग करना मुश्किल होता है. ऐसे नोटों को सामान्य बैंक शाखाएं स्वीकार नहीं करती हैं. इस तरह के नोटों को बदलने के लिए आपको आरबीआई के निर्गम कार्यालय (Issue Office) में जाना होता है. वहां इन नोटों की विशेष जांच की जाती है और अगर सब कुछ सही पाया जाता है, तो उनकी कीमत आपके बैंक खाते में भेज दी जाती है. याद रखें कि अगर बैंक को लगता है कि नोट को जानबूझकर फाड़ा गया है या उसके साथ छेड़छाड़ की गई है, तो वह उसे बदलने से इनकार कर सकता है.
नोट बदलने की प्रक्रिया और शिकायत
नोट बदलने की प्रक्रिया बहुत ही सरल है. छोटे नोटों या कम संख्या में नोटों के लिए आपको कोई फॉर्म भरने की जरूरत नहीं होती. आप सीधे बैंक के कैश काउंटर पर जाकर नोट दे सकते हैं. अगर बैंक अधिकारी नियम का पालन नहीं करता है या नोट बदलने में आनाकानी करता है, तो ग्राहक इसकी शिकायत बैंक के मैनेजर से कर सकते हैं. इसके बावजूद समाधान न होने पर आरबीआई की आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई जा सकती है. अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहकर आप अपनी मेहनत की कमाई को बेकार होने से बचा सकते हैं.
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