Jio Platforms Q4 Results: जियो प्लेटफॉर्म्स के प्रॉफिट में 13 फीसदी उछाल, रेवेन्यू में भी अच्छी ग्रोथ
जियो प्लेटफॉर्म्स का ऑपरेशन से रेवेन्यू मार्च तिमाही में 12.6 फीसदी बढ़कर 38,259 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले की समान अवधि में यह 33,986 करोड़ रुपये था। मार्च तिमाही में कंपनी का EBITDA 17.9 फीसदी बढ़कर 20,060 करोड़ रुपये रहा
चीनी फैक्ट्रियों पर बढ़ती निर्भरता से यूरोप की रणनीतिक स्वतंत्रता खतरे में: रिपोर्ट
नई दिल्ली, 24 अप्रैल (आईएएनएस)। यूरोप अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता खोता जा रहा है, क्योंकि वह चीन की फैक्ट्रियों पर लगातार ज्यादा निर्भर होता जा रहा है, यहां तक कि ऊर्जा के ग्रीन ट्रांजिशन के लिए भी, जिसे वह खुद आगे बढ़ाना चाहता है। यह बात एक लेख में कही गई है।
ब्रुसेल्स सिग्नल में छपे इस लेख के मुताबिक, चीन अब दुनिया के 80 प्रतिशत सोलर पैनल, 75 प्रतिशत बैटरियां और 70 प्रतिशत इलेक्ट्रिक वाहन बनाता है, जो अगली पीढ़ी की एनर्जी और मोबिलिटी पर पूरी मोनोपॉली दिखाता है। यह स्थिति यूरोप के लिए एक गंभीर खतरा है।
लेख में कहा गया है कि जहां अमेरिका मध्य पूर्व में दिखावटी और जोखिम भरी लड़ाइयों में उलझा है, वहीं चीन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग में तेजी से आगे बढ़ रहा है। ये वही क्षेत्र हैं जो आने वाले 50 वर्षों में ताकत तय करेंगे। दूसरी तरफ, यूरोप अपने बचे उद्योगों को भी नियमों के बोझ से खत्म करने में लगा है।
लेख में यह भी बताया गया कि चीन दुनिया के 90 से ज्यादा देशों में बंदरगाह परियोजनाओं में शामिल है और इस तरह वह वैश्विक समुद्री व्यापार के अहम रास्तों पर अपना प्रभाव बढ़ा रहा है। हर वह बंदरगाह जहां वह काम करता है, एक तरह से नए दौर की “रणनीतिक मौजूदगी” बन जाता है, जहां व्यापार की शर्तें धीरे-धीरे पूर्वी देशों के हाथ में जाती दिखती हैं।
इसके अलावा लेख में यह भी चिंता जताई गई है कि चीन अपनी मुद्रा “रेनमिनबी” को वैश्विक रिजर्व करेंसी बनाने की कोशिश कर रहा है। अगर ऐसा हुआ, तो पश्चिमी देशों जैसे यूरोप के लिए अपने खर्च और कल्याणकारी योजनाओं को चलाना मुश्किल हो सकता है, जो अब तक डॉलर और यूरो की ताकत पर आधारित हैं।
अंत में लेख में चेतावनी दी गई है कि अगर यूरोप अपनी इंडस्ट्री को कमजोर करता रहा और सिर्फ नौकरशाही बढ़ाता रहा, तो वह एक ऐसे हालात में पहुंच सकता है जहां उसकी ऊर्जा, बुनियादी ढांचा और फैसले भी बाहरी देशों पर निर्भर हो जाएंगे। इससे वह अपने भविष्य के फैसले खुद लेने की क्षमता खो सकता है और धीरे-धीरे उसकी वैश्विक भूमिका भी कमजोर पड़ सकती है।
--आईएएनएस
एवाई/डीएससी
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