चीनी फैक्ट्रियों पर बढ़ती निर्भरता से यूरोप की रणनीतिक स्वतंत्रता खतरे में: रिपोर्ट
नई दिल्ली, 24 अप्रैल (आईएएनएस)। यूरोप अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता खोता जा रहा है, क्योंकि वह चीन की फैक्ट्रियों पर लगातार ज्यादा निर्भर होता जा रहा है, यहां तक कि ऊर्जा के ग्रीन ट्रांजिशन के लिए भी, जिसे वह खुद आगे बढ़ाना चाहता है। यह बात एक लेख में कही गई है।
ब्रुसेल्स सिग्नल में छपे इस लेख के मुताबिक, चीन अब दुनिया के 80 प्रतिशत सोलर पैनल, 75 प्रतिशत बैटरियां और 70 प्रतिशत इलेक्ट्रिक वाहन बनाता है, जो अगली पीढ़ी की एनर्जी और मोबिलिटी पर पूरी मोनोपॉली दिखाता है। यह स्थिति यूरोप के लिए एक गंभीर खतरा है।
लेख में कहा गया है कि जहां अमेरिका मध्य पूर्व में दिखावटी और जोखिम भरी लड़ाइयों में उलझा है, वहीं चीन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग में तेजी से आगे बढ़ रहा है। ये वही क्षेत्र हैं जो आने वाले 50 वर्षों में ताकत तय करेंगे। दूसरी तरफ, यूरोप अपने बचे उद्योगों को भी नियमों के बोझ से खत्म करने में लगा है।
लेख में यह भी बताया गया कि चीन दुनिया के 90 से ज्यादा देशों में बंदरगाह परियोजनाओं में शामिल है और इस तरह वह वैश्विक समुद्री व्यापार के अहम रास्तों पर अपना प्रभाव बढ़ा रहा है। हर वह बंदरगाह जहां वह काम करता है, एक तरह से नए दौर की “रणनीतिक मौजूदगी” बन जाता है, जहां व्यापार की शर्तें धीरे-धीरे पूर्वी देशों के हाथ में जाती दिखती हैं।
इसके अलावा लेख में यह भी चिंता जताई गई है कि चीन अपनी मुद्रा “रेनमिनबी” को वैश्विक रिजर्व करेंसी बनाने की कोशिश कर रहा है। अगर ऐसा हुआ, तो पश्चिमी देशों जैसे यूरोप के लिए अपने खर्च और कल्याणकारी योजनाओं को चलाना मुश्किल हो सकता है, जो अब तक डॉलर और यूरो की ताकत पर आधारित हैं।
अंत में लेख में चेतावनी दी गई है कि अगर यूरोप अपनी इंडस्ट्री को कमजोर करता रहा और सिर्फ नौकरशाही बढ़ाता रहा, तो वह एक ऐसे हालात में पहुंच सकता है जहां उसकी ऊर्जा, बुनियादी ढांचा और फैसले भी बाहरी देशों पर निर्भर हो जाएंगे। इससे वह अपने भविष्य के फैसले खुद लेने की क्षमता खो सकता है और धीरे-धीरे उसकी वैश्विक भूमिका भी कमजोर पड़ सकती है।
--आईएएनएस
एवाई/डीएससी
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मीत हेयर का राघव चड्ढा पर हमला, कहा-जिस आम युवा को केजरीवाल ने राष्ट्रीय पहचान दी, उसी ने दिया धोखा
आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के वरिष्ठ नेता और सांसद गुरमीत सिंह मीत हेयर ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि चुनाव आते ही हार के डर से विपक्षी नेताओं को ईडी और सीबीआई के जरिए डराना शुरू कर देती है. लालच देकर अपनी पार्टी में शामिल कर लेती है. शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए सांसद मीत हेयर ने उदाहरण देते हुए कहा कि असम में हेमंत विश्व शर्मा पर कांग्रेस में रहते हुए सीबीआई की छापेमारी हुई, लेकिन भाजपा में शामिल होते ही वे पाक-साफ हो गए. महाराष्ट्र में अजीत पवार पर एक ही रात में 70 मुकदमे दर्ज किए गए और अमित शाह ने उन्हें देश का सबसे भ्रष्ट नेता बताया, लेकिन भाजपा में शामिल होते ही उन्हें डिप्टी सीएम बना दिया गया.
राघव चड्ढा का साथ छोड़ देना नैतिकता के खिलाफ
मीत हेयर ने राघव चड्ढा के व्यवहार पर गहरी नाराजगी जताते हुए कहा कि जिस पार्टी और अरविंद केजरीवाल ने एक आम युवा को राष्ट्रीय पहचान दी, उसी पार्टी के सबसे मुश्किल समय में राघव चड्ढा का साथ छोड़ देना नैतिकता के खिलाफ है. उन्होंने कहा कि जब केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और संजय सिंह जेल में थे और कार्यकर्ता सड़कों पर लाठियां खा रहे थे, तब राघव चड्ढा विदेश चले गए.
राघव चड्ढा ने एक ट्वीट तक नहीं किया: मीत हेयर
उन्होंने आगे कहा कि जब अरविंद केजरीवाल जी जेल से बाहर आए और उन्हें कोर्ट ने राहत दी, तब भी राघव चड्ढा ने एक ट्वीट तक नहीं किया. पंजाब में हाल ही में आप नेताओं और राज्यसभा सांसद मित्तल और मंत्री संजीव अरोड़ा के घरों पर हुई छापेमारी को उन्होंने इसी कड़ी का हिस्सा बताया.
पंजाबी जेलों और मुकदमों से नहीं डरते: मीत हेयर
सांसद ने सुनील जाखड़ और रवनीत बिट्टू को आड़े हाथों लेते हुए हेयर ने कहा कि वे पंजाब के इतिहास और सिखों के सिद्धांतों को जानते हैं. पंजाब वह कौम है जो सूखे पत्ते खाकर भी युद्ध लड़ना जानती है, लेकिन झुकना नहीं. उन्होंने चेतावनी दी कि भाजपा जितना डराएगी, पंजाब में उसका उतना ही ज्यादा नुकसान होगा. 90% कुर्बानियां देने वाले पंजाबी जेलों और मुकदमों से नहीं डरते. भाजपा का यह एजेंडा अन्य राज्यों में चल सकता है, लेकिन पंजाब की तासीर अलग है. जाखड़ और बिट्टू शायद कुर्सी के लालच या डर के मारे चुप हैं, लेकिन आने वाले समय में भाजपा को इस दमनकारी राजनीति का भारी खमियाजा भुगतना पड़ेगा.
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